Eternal Hinduism

प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के तट पर ‘मिनी कुंभ’ की शुरूआत 3 जनवरी से

माघ मेला जिसे ‘मिनी कुंभ’भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक प्राचीन और पवित्र धार्मिक आयोजन है। यह हर साल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम तट पर आयोजित होता है। साल 2026 में लगने वाला माघ मेला बहुत भव्य होगा जिसकों लेकर व्यापक तैयारियां की गई है। इसको लेकर लगातार योगी सरकार भी प्रयास कर रही है। लाखों लोगों के इस माघ मेंले में पहुंचने की संभावना जताई गई है।

विश्व का सबसे बड़ा मेला
उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक और धार्मिक शहर है, जो गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों के संगम (त्रिवेणी संगम) के लिए विश्व प्रसिद्ध है। प्रयाग जो भारत के सर्वाधिक पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। प्रयाग का माघ मेला विश्व का सबसे बड़ा मेला है। हिन्दु पुराणों में, हिन्दु धर्म के अनुसार सृष्टि के सृजनकर्ता भगवान ब्रह्मा द्वारा इसे ‘तीर्थ राज’ अथवा तीर्थस्थलों का राजा कहते है।

सृष्टि का पहला यज्ञ हुआ था यहां
सृष्टि का पहला यज्ञ प्रयागराज जहां तीन पवित्र नदियों गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर ‘प्राकृष्ठ यज्ञ’ संपन्न हुआ था। हमारे पवित्र धर्मग्रंथों वेदों और रामायण तथा महाभारत जैसे महाकाव्यों और पुराणों में भी इस स्थान को ‘प्रयाग’ कहे जाने के साक्ष्य मिलते हैं। प्रत्येक वर्ष जनवरी-फरवरी माह में यहां पवित्र ‘संगम’ के किनारे विश्व प्रसिद्ध माघ मेला आयोजित होता है,

कब शुरू होगा माघ मेला?
पंचांग गणना के आधार पर साल 2026 में माघ मेले की शुरुआत 03 जनवरी को पौष पूर्णिमा के दिन होगी। वहीं, इसका समापन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि को होगा। मान्यता है कि माघ माह में इस संगम पर स्नान करने से सभी पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दौरान कल्पवास, दान और तपस्या का विशेष महत्व बताया गया है।

माघ माह की स्नान तिथियां
पौष पूर्णिमा स्नान – 3 जनवरी
मकर संक्रांति स्नान – 14 जनवरी
मौनी अमावस्या स्नान – 18 जनवरी
वसंत पंचमी स्नान – 23 जनवरी
माघी पूर्णिमा स्नान – 1 फरवरी
महाशिवरात्रि स्नान – 15 फरवरी

मोक्ष प्राप्ति के लिए करते है स्नान
मान्यता है कि माघ मास में देवता स्वयं पृथ्वी पर अवतरित होकर प्रयागराज संगम में स्नान करते हैं। इसलिए इस पवित्र संगम में डुबकी लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कल्पवास का महत्व
इस अवधि में कई श्रद्धालु एक माह तक संगम किनारे रहकर कल्पवास करते हैं। इसे तप, त्याग और सात्विक जीवन का मार्ग माना जाता है, जिससे अक्षय पुण्य मिलता है। पूरे माघ महीने में तिल, गुड़, कंबल और भोजन का दान विशेष रूप से शुभ माना गया है।

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