Eternal Hinduism

आधुनिक युग में डिजिटल जाप माला का क्रेज, क्या है ये नया ट्रेंड?

भगवान तो आस्था के भूखे होते है जहां भक्त का मन लग जाए तो उसे भगवान की ओर जाने से कोई नहीं रोक सकता विगत कुछ वर्षों में जब से एंड्राइड मोबाइल के साथ एप की शुरूआत हुए है तब से लोग मोबाइल पर ही हर प्रकार की धार्मिक कथा सुनते है यहां तक तो ठीक था लेकिन आजकल के युवाओं में डिजिटल जाप माला का चलन बढ़ रहा है, जो आस्था और टेक्नोलॉजी का संगम है। इसमें मोबाइल ऐप या डिजिटल काउंटर के ज़रिए मंत्र जाप की गिनती अपने-आप होती है। इससे व्यस्त जीवनशैली वाले लोग कहीं भी, कभी भी जाप कर सकते हैं। यह मानसिक शांति और सेल्फ-हीलिंग का ज़रिया बन गया है।

काम के साथ जाप
सुबह की भीड़, हाथ में मोबाइल, कानों में ईयरफोन और स्क्रीन पर चल रहा मंत्र जाप, ये नज़ारा आजकल कई युवाओं के लिए बिल्कुल आम हो गया है। पहले जहां जाप माला मंदिर या पूजा की अलमारी तक सीमित थे, वहीं अब वह मोबाइल ऐप और डिजिटल डिवाइस बनकर जेब में आ गए हैं। आस्था और टेक्नोलॉजी का यही मेल आज डिजिटल जाप माला के नाम से युवाओं के बीच नया ट्रेंड बन चुका है।

डिजिटल जाप माला की खास बातें-
मंत्रों की ऑटोमैटिक काउंटिंग, 108 या तय संख्या पूरी होने पर नोटिफिकेशन, मोबाइल और स्मार्ट डिवाइस में आसानी से उपलब्ध, कहीं भी, कभी भी जाप की सुविधा युवाओं को ये ट्रेंड इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि यह उनकी बिजी और डिजिटल लाइफस्टाइल से पूरी तरह मेल खाता है। कॉलेज स्टूडेंट्स हों या ऑफिस जाने वाले प्रोफेशनल्स, ट्रैफिक में फंसे हों या मेट्रो में सफर कर रहे हों, डिजिटल जाप माला हर जगह आपके साथ रहती है। इससे पूजा-पाठ अब किसी तय समय या जगह का मोहताज नहीं रह गया।

धार्मिक अभ्यास के साथ मानसिक शांति
आज कई युवा इसे सिर्फ धार्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि मेंटल शांति और सेल्फ-हीलिंग का ज़रिया मानते हैं। डिजिटल जाप माला से ध्यान केंद्रित होता है और मन को सुकून मिलता है। कई ऐप्स में ऐसे फीचर्स भी मिलते हैं जो इस अनुभव को और बेहतर बनाते हैं. मेडिटेशन म्यूजिक और मंत्रों की ऑडियो गाइड, रोज़ाना जाप के लिए रिमाइंडर, स्ट्रेस कम करने वाले माइंडफुलनेस टूल्स

नहीं मिलती आत्मिक शांति
हालांकि, डिजिटल जाप माला से पारंपरिक मोतियों वाली माला जैसी भावनात्मक अनुभूति नहीं मिलती।  ना ही आत्मिक शांति मिलती है। इससे सिर्फ कुछ देर के लिए मानसिक स्वास्थ्य रिलेक्स हो जाता है लेकिन प्रभाव नही डालते। हम यदि हाथ में माला लेकर जाप करते है तो वह ज़्यादा गहरा असर डालता है। वहीं, समर्थकों का तर्क है कि साधना का असली मकसद मन की एकाग्रता है, माध्यम कोई भी हो।

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