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आस्था और अन्धविश्वास में फर्क समझाया नाटक ‘बाल भगवान’ ने,अभिनव कला समाज के मंच पर मंचन

इंदौर(विनोद गोयल) । “झंडा ऊँचा रहे हमारा अभियान” के अंतर्गत बुधवार को नाटक बाल भगवान का मंचन किया गया। नाटक समाज में व्याप्त अंधविश्वास, पाखंड और झूठे चमत्कारों पर केन्द्रित था।

स्टेट प्रेस क्लब म.प्र. द्वारा अभिनव कला समाज में आयोजित नाटक बाल भगवान की कहानी एक ऐसे मानसिक रूप से विक्षिप्त बालक के इर्द-गिर्द घूमती है जिसे चमत्कारी बताकर बाल भगवान का रूप दे दिया जाता है। कुछ स्वार्थी लोग अपने फायदे के लिए उसकी आस्था का व्यापार करते हैं और भोली-भाली जनता, राजनेता अंधविश्वास में फँस जाते हैं। नाटक के आखिरी दौर में बालक पेट में व्याप्त अल्सर की बीमारी और अंधविश्वास की चपेट में आकर मर जाता है, तब सच्चाई सामने आती है और समाज को यह संदेश मिलता है कि आस्था और अंधविश्वास में फर्क समझना ज़रूरी है। स्वदेश दीपक के लिखे नाटक का निर्देशन अर्जुन नायक ने किया। नटराज थिएटर ग्रुप एंड फिल्म प्रोडक्शन की पेशकस में करीब 25 कलाकारों के सशक्त अभिनय की दर्शकों ने खूब प्रशंसा की।
प्रारंभ में संस्था सेवा सुरभि के संयोजक ओम प्रकाश नरेड़ा ने 11 से 30 जनवरी तक आयोजित झंडा ऊँचा रहे हमारा अभियान और उससे जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी दी। स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने नाटक कलाकारों का स्वागत किया।

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