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गर्भ संस्कार से दिव्य संतान….राष्ट्रव्यापी अभियान का शंखनाद 1 फरवरी को,सीएम रहेगे मुख्य अतिथि

इंदौर।श्रेष्ठ संतान के माध्यम से ही हम परिवार को सुदृढ़, समाज एवं राष्ट्र को स्वस्थ, सशक्त, सुरक्षित एवं समृद्ध बना सकते हैं तथा विश्व में सीसीप्रेम, करुणा एवं शांति की पुनर्स्थापना कर सकते हैं। आगामी 1 फरवरी 2026 को इंदौर के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज ऑडिटोरियम संस्कृति, विज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के अनूठे समन्वय का साक्षी बनने हेतु एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम है— “गर्भसंस्कार के विश्वव्यापी अभियान हेतु शंखनाद”।
विज्ञान पर आधारित है पुरा अभियान
गर्भसंस्कार, गर्भस्थ शिशु के लालन-पालन, शिक्षण एवं प्रशिक्षण का विज्ञान-आधारित कार्यक्रम है। इसके अंतर्गत गर्भस्थ माता गर्भधारण से पूर्व से लेकर संपूर्ण गर्भावस्था के दौरान संयमित जीवनचर्या, संतुलित आहार, शुद्ध आचार-विचार एवं रहन-सहन अपनाती है, जिससे शिशु को उत्तम पोषण, समुचित देखभाल तथा मस्तिष्क के स्वस्थ विकास हेतु अनुकूल वातावरण प्राप्त होता है। इस प्रक्रिया में गर्भस्थ माता अपने स्त्री-रोग विशेषज्ञ अथवा चिकित्सक के संपर्क में रहते हुए गर्भसंस्कार विशेषज्ञ से परामर्श लेती है। इस परामर्श में खान-पान, योग, ध्यान, संगीत, मंत्र, कुछ भाषाओं का अध्ययन, पूजा-पाठ एवं संयमित जीवनशैली की जानकारी दी जाती है।

अभिमन्यु, भक्त प्रहलाद गर्भसंस्कार के उदाहरण
दिव्य संतान प्रकल्प के राष्ट्रीय संयोजक, पूर्व राज्य मंत्री दर्जा योगेंद्र महंत ने इंदौर में पत्रकार वार्ता में बताया कि 1 फरवरी को होने वाले इस कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय भैया जी जोशी (निवृत्तमान सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) एवं मुख्यमंत्री मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति में होगा। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में गर्भसंस्कार विज्ञान पर सेमिनार आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात दिव्य दंपत्तियों को स्वस्थ एवं श्रेष्ठ संतान हेतु गर्भसंस्कार के पालन का संकल्प दिलाया जाएगा तथा समाज के प्रबुद्ध जनों द्वारा इस विज्ञान को जन-जन तक, घर-घर तक पहुँचाने का संकल्प लिया जाएगा।

गर्भसंस्कार का विज्ञान किताब का विमोचन
कार्यक्रम में डॉ. अनिल गर्ग (प्लास्टिक सर्जन) एवं डॉ. सीमा गर्ग (हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन एवं गर्भसंस्कार विशेषज्ञ) द्वारा लिखित विस्तृत पुस्तक “गर्भसंस्कार का विज्ञान” का विमोचन भी किया जाएगा। अंत में प्रश्न-जिज्ञासा समाधान सत्र आयोजित होगा, जिसमें आमजन गर्भसंस्कार से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं का समाधान विशेषज्ञों से प्राप्त कर सकेंगे।

महंत जी ने बताया कि गर्भसंस्कार के प्रसार एवं प्रचार हेतु दिव्य संतान प्रकल्प का गठन दो वर्ष पूर्व किया गया था, जो निरंतर देश के विभिन्न भागों में जाकर दंपत्तियों को गर्भसंस्कार की वैज्ञानिक जानकारी, कार्यशालाओं के माध्यम से प्रदान कर रहा है। इसी क्रम में 1 फरवरी 2026 को गर्भसंस्कार को विश्व स्तर तक ले जाने हेतु इंदौर नगरी को राजधानी बनाया जा रहा है, और इसका शंखनाद इंदौर से होगा। डॉ. अनिल गर्ग, जो दिव्य संतान प्रकल्प के विषय विशेषज्ञ हैं, ने गर्भसंस्कार से संबंधित विस्तृत जानकारी दी।

गीताभवन में गर्भसंस्कार ओपीडी
डॉ. संध्या चौकसे जी ने बताया कि 30 जनवरी 2026 को गीताभवन अस्पताल में गर्भसंस्कार ओपीडी का शुभारंभ किया जाएगा। यह ओपीडी दिव्य संतान प्रकल्प एवं बालाजी सेवार्थ विनोद अग्रवाल फाउंडेशन, इंदौर के सहयोग से गीता भवन अस्पताल में संचालित होगी। इसमें गर्भसंस्कार विशेषज्ञ, योग विशेषज्ञ, संगीत विशेषज्ञ, न्यूट्रिशन विशेषज्ञ, मंत्र एवं वैदिक विज्ञान विशेषज्ञ तथा ज्योतिषाचार्य अपनी सेवाएँ प्रदान करेंगे।

राधेश्याम शर्मा ‘गुरूजी’ ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गर्भसंस्कार की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज बच्चों में मानसिक परेशानियाँ, अवसाद, अकेलापन, डिजिटल मीडिया पर अत्यधिक निर्भरता, नशे की प्रवृत्ति, समाज में बढ़ती विषमता, ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, लर्निंग डिसएबिलिटीज एवं फीटल अल्कोहल सिंड्रोम जैसी गंभीर समस्याएँ निरंतर बढ़ रही हैं।  ये समस्याएँ कहीं न कहीं गर्भधारण के समय एवं गर्भावस्था के दौरान दंपत्ति की शारीरिक-मानसिक अवस्था से जुड़ी होती हैं। अतः इन समस्याओं के समाधान एवं गर्भ संस्कार के माध्यम से श्रेष्ठ व दिव्य संतानों द्वारा ही परिवार को सुदृढ़, समाज एवं राष्ट्र को स्वस्थ, सशक्त, सुरक्षित एवं समृद्ध बना सकते हैं तथा विश्व में प्रेम, करुणा एवं शांति की पुनर्स्थापना कर सकते हैं।

अतः गर्भसंस्कार को विश्वव्यापी स्तर पर ले जाने के लिए गर्भ संस्कार का शंखनाद 1 फरवरी 2026 को डेली कॉलेज ऑडिटोरियम, इंदौर से होगा।

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