HealthNEWS

अंगदान बचा सकता है कई जिंदगियां, अपने को खोने का गम भूला कर दिखाना होगा साहस

इंदौर। अंगदान कई जिंदगियों को बचा सकता है। जो प्यारा शख्स अपनो को छोड़ कर दुनिया छोड़ कर जा रहा है। अपने पीछे यदि कई अन्य जिंदगियों को जीवन दे जाएं तो परिवार को सकून ही मिलेगा। शरीर छोड़ कर जाने वाली आत्मा भी जब यह देखेगी तो शायद उसे भी शांति मिलेगी कि वह अपने पीछे कुछ जिंदगियों को बचा कर उनके परिजनों को खुशी बांट कर जा रही है। लेकिन अंगदान करने का फैसला परिजनो को लेना होता है। जो अपने को तो खो चुके है लेकिन उसके बाद भी उसके अंगों को किसी ओर को दान करने का साहसी कदम उठा पाते है या नहीं। यह अत्यंत ही विकट समय होता होगा जब कोई परिवार अपना दुख भूल कर दूसरों की खुशी को ध्यान में रख कर जागरूकता दिखाए।

एक्सीडेन्ट में मौत के बाद अंगदान करने की जागरूकता
वर्तमान में ब्रेनडेड होने पर कई परिवार अंगदान कराने का फैसला लेते है। लेकिन अभी भी सड़क दुर्घटना में मौत पर अंगदान करने की जागरूकता की आवश्यकता है। चूंकि मानवता और संवेदनशीलता के चलते यह जागरूकता लाना आसान नहीं है लेकिन दुर्घटना में मौत होने पर अंगदान करने की जागरूकता से कई जिंदगियों को नवजीवन मिल सकता है। यह एक अंत्यत कठिन निर्णय लेने का साहस परिवार को दिखाना होगा।

अंगदान जागरूकता को लेकर हुई बैठक
एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर में इंदौर सोसायटी फॉर आर्गन डोनेशन की बैठक संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। संभागायुक्त डॉ. खाड़े ने कहा कि अंगदान के क्षेत्र में इंदौर सोसायटी फॉर आर्गन डोनेशन अच्छा कार्य कर रहा है।

13 अस्पतालों में अंगदान की अनुमति
वर्तमान में इन्दौर संभाग में 13 चिकित्सा संस्थान को अंग प्रत्यारोपण की प्रशासनिक अनुमति जारी की गई है, जिसमें से 11 चिकित्सा संस्थान सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। जिसमें राजश्री अपोलो हॉस्पिटल, चोईथराम हॉस्पिटल एवं विशेष जुपिटर हॉस्पिटल प्रथम तीन चिकित्सा संस्थान है।

साहसिक कदम उठाने के लिए प्रेरित करने वाले को 25 इंसेंटिव
संभागायुक्त ने कहा कि अंगदान कराने वाले डॉक्टरों के अतिरिक्त अन्य कोई भी व्यक्ति जो अंगदान के लिये प्रेरित कर अंगदान कराने में सफलता प्राप्त करेगा, उन्हें सहायता संस्था द्वारा 25 हजार रूपये का इंसेंटिव प्रदान किया जायेगा।

ऐसा है अंगदान का आंकड़ा
कोविड के पूर्व वर्ष 2019 में 77 अंगदान (74 किडनी व 03 लीवर) अनुमति जारी की गई थी। जो वर्ष 2025 में बढ़कर 202 (181 किडनी व 21 लीवर) हो गई है। इसी प्रकार इन्दौर की बढ़ती हुई प्रतिष्ठा एवं चिकित्सा विकास के चलते अब पूरे भारत भर के रोगी प्रत्यारोपण हेतु आ रहे है।
218 रोगियों को है अंगदान की आस
डॉ. खाड़े ने बताया कि वर्तमान में ब्रेन डाईड रोगी के अंग प्राप्ति करने हेतु प्रतीक्षा सूची में इन्दौर संभाग में 218 रोगी (189 किडनी व 29 लीवर) प्रतीक्षारत है। हाल ही में 10 दिन पूर्व शुजालपुर निवासी अनुपम नालमे 39 वर्ष का अंगदान सी.एच.एल हॉस्पिटल में संपन्न हुआ। इन्दौर के शेल्बी हॉस्पिटल में आवंटित दो रोगियों को एक ही दिन में चिकित्सा दल ने किडनी प्रत्यारोपण किया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसनीय उपलब्धि है। त्वचा दान के क्षेत्र में इन्दौर पूरे देश का द्वितीय अधिकतम त्वचा संग्रहीत करने वाला शहर है, जो चोईथराम हॉस्पिटल द्वारा संचालित किया जा रहा है एवं अभी तक 1039 मृतकों के त्वचा दान प्राप्त किये गये हैं, जो मल्टीपल रोगियों को प्रत्यारोपण के काम आ रहे हैं।

10 सालों में 18 हजार लोग देख पाएं दुनिया
डॉ. खाड़े ने बताया कि इन्दौर में पिछले 10 वर्षों में करीब 18000 कॉर्निया (ऑख) प्राप्त की गई है। जिसमें एम.के. इन्टरनेशनल आई बैंक द्वारा 15240, शंकरा आई बैंक द्वारा 2502, एम.व्हाय. आई बैंक द्वारा 256 ऑखों का संग्रहण किया गया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में 62 केरोटोप्लास्टी (आँखों का प्रत्यारोपण) इन्दौर के शासकीय चिकित्सालय एम.व्हाय के नेत्ररोग विभाग द्वारा किया गया। इन्दौर में शासकीय चिकित्सालय सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में अंग प्रत्यारोपण हेतु विशेष तकनीकी व्यवस्थाओं का निर्माण किया गया है। जहाँ अभी तक 6 लाईव किडनी ट्रांसप्लांटेशन हुए है और इस दिशा में बेहतर प्रयास किये जा रहे है। प्रशासन एवं चिकित्सा दल लीवर प्रत्यारोपण हेतु प्रयासरत है।

ये रहे बैठक में मौजूद
बैठक में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया, स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त संचालक डॉ. पूर्णिमा गडरिया, स्वास्थ्य विभाग के डीएचओ डॉ. निर्मला अखण्ड, डॉ. सतीवान खत्री, सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. डी.के. शर्मा, समाजसेवी जनक पलटा, डॉ. अनिल भण्डारी, मुस्कान ग्रुप के संदीपन आर्य और जीतू बागानी, आई बैंक क उमा झंवर, आलोक सिंह सहित विभिन्न शासकीय एवं निजी अस्पतालों के प्रबंधक एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

Shares: