राधा-कृष्ण का प्रेम निस्वार्थ और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है- डा शास्त्री
-अगर भक्त गिरीराज की परिक्रमा करते हैं तो जीवन सुख-समृद्धि आती हैं

-श्रीकृष्ण का जीवन हर परिस्थिति में सत्य और धर्म का साथ देने की प्रेरणा देता है।
इंदर । भगवान श्री कृष्ण दिव्य ,सर्वशक्तिमान और प्रेम के अवतार के रूप में जन्म लिया।
वें विष्णु के आठवें अवतार हैं। बालकृष्ण की लीलाओं वृंदावन की रासलीला, द्वारका के राजा और अर्जुन के सारथी के रूप में गीता का ज्ञान देने वाले योगेश्वर स्वरूप में पूजनीय हैं।
आज श्रीमद्भागवत के पंचम दिवस में मुख्य यजमान नंद किशोर पिपलावा, श्रीमती पुष्पा खंडेलवाल, श्याम सुंदर खंडेलवाल, बजरंग पिपलावा विजय पांडेय,अध्यक्ष खांडल समाज म प्र, मनिषा जोशी, विशाल जोशी, सोनाली शर्मा, केदार शर्मा, मंगिलाल, गोदावरी, दामोदर प्रसाद, महेश शर्मा आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया।

भागवतप्रवक्ता डॉ. मनोज मोहन जी शास्त्री* ने खजराना श्री गणेश मंदिर परिसर के दौलतराम छाबछरिय हाल
में श्रीमद्भगवद् कथा में कहा कि भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप दिव्य रूप मेघवर्ण बादलों जैसा सुंदर युवा हैं। वे मोरपंख धारण करते हैं, मुरली बजाते हैं और गले में फूलों की माला पहनते हैं।
भगवान कृष्ण की अनेक लीलाएँ की हैं। राधा-कृष्ण का प्रेम निस्वार्थ और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। गोकुल और वृंदावन में बाललीलाएँ कीं।
वें योगेश्वर और ज्ञानी है। उन्होंने कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन को ‘भगवद गीता’ का अमर संदेश दिया, जिसमें कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग का वर्णन है।
श्री कृष्ण ने मथुरा के राजा कंस को मारकर द्वारका नगरी बसाई।, जिसे उन्होंने स्वयं निर्मित किया था।
कुरुक्षेत्र के युद्ध में वे निहत्थे होकर अर्जुन के सारथी बने।
श्री कृष्ण को भक्त ‘नंदलाल’, ‘गोपाल’, ‘माधव’ और ‘मोहन’ जैसे नामों से बुलाते हैं। श्री कृष्ण का जीवन हर परिस्थिति में सत्य और धर्म का साथ देने की प्रेरणा देता है।
गिरिराज पूजन (गोवर्धन ) कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है।भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है। भगवान कृष्ण ने इंद्र का अहंकार तोड़ने और ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर धारण किया।
आज कथा में गिरिराज जी को छप्पन भोग लगाया गया। । मन गोवर्धन पर्वत की तीन परिक्रमा लगाई। नमस्ते गिरिराजाय श्री गोवर्धन नामिने। भस्म क्लेश नाशय परमानंद दायिने किया ।
यह पूजा न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है।
शाम को गिरिराज के पूजन एवं आरती में राधेश्याम शर्मा गुरुजी, अनूप किशोरीलाल अग्रवाल
, इंदरसिंह ठाकुर, नरेश अग्रवाल, शशि राजेश गोयल , वर्षा बंसल, ओमप्रकाश भाया
ने श्रीमद् भागवत कथा की आरती में भाग लिया। श्रीमद्भागवत की आरती भक्तों को प्रसाद का वितरण किया गया।
श्रीमदभागवत कथा* का पंचम दिवस
भागवतप्रवक्ता “*डॉ. मनोज मोहन जी शास्त्री*, वृंदावन के मुखार बिंद से *श्रीमदभागवत कथा* *श्रीमदभागवत कथा का भव्य आयोजन हो रही हैं।
श्री खजराना गणेश मंदिर, सत्संग हाल*, इंदौर – *श्रीकृष्ण बाललीलाएँ एवं गिरिराज पूजन12 अप्रेल – *महारास एवं रुक्मिणी विवाह* अप्रेल – *श्रीशुकदेव विदाई एवं व्यास पूजन होगा


