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सच्ची मित्रता में ऊंच-नीच या अमीरी-गरीबी का कोई स्थान नहीं होता है -भागवतप्रवक्ता “*डॉ. मनोज मोहन जी शास्त्री

सच्ची मित्रता में ऊंच-नीच या अमीरी-गरीबी का कोई स्थान नहीं होता है-भागवतप्रवक्ता “*डॉ. मनोज मोहन जी शास्त्री

इंदौर ।कृष्ण और सुदामा बचपन के दोस्त थे और गुरुकुल में साथ पढ़ते थे। सुदामा एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण थे, जो अपनी पत्नी सुशीला के बार-बार कहने पर कृष्ण से मिलने द्वारका गए। कृष्ण ने अपने मित्र की दीन अवस्था देखकर उन्हें गले लगाया और सिंहासन पर बैठाकर अपने आंसुओं से उनके चरण धोए।

सुदामा अपने साथ भेंट के रूप में चावल की एक छोटी सी पोटली लेकर गए थे, जिसे कृष्ण ने बड़े प्रेम से खाया।

कृष्ण ने सुदामा की गरीबी को भांप लिया और बिना मांगे ही उनके गाँव में एक महल का निर्माण करवा दिया, जिसे देखकर सुदामा दंग रह गए।

उक्त विचार भागवतप्रवक्ता “*डॉ. मनोज मोहन जी शास्त्री ने

श्री खजराना गणेश मंदिर, के दौलत राम छावछरिया सत्संग हाल*, इंदौr में व्यक्त किए।

 

प्रारम्भ व्यास पीठ का पूजन मुख्य यजमान नन्दकिशोर पिपलावा, श्रीमती पुष्पा खंडेलवाल, बजरंग शर्मा, दामोदर पीपलावा, श्याम सुंदर खंडेलवाल, मनीषा जोशी विशाल जोशी, सोनाली, केदार ने किया।

भागवतप्रवक्ता “*डॉ. मनोज मोहन जी शास्त्री ने कहा कि सच्ची मित्रता में ऊंच-नीच या अमीरी-गरीबी का कोई स्थान नहीं होता है।

 

शुकदेव जी महर्षि वेदव्यास के पुत्र और श्रीमद्भागवत वे जन्मजात ब्रह्मज्ञानी, परम तपस्वी और विरक्त थे। इन्होंने राजा परीक्षित को सात दिनों तक भागवत कथा सुनाकर मोक्ष प्रदान किया था।

शुकदेव जी 12 वर्षों तक अपनी माता वटिका/पिंजल के गर्भ में रहे और शिवजी द्वारा पार्वती जी को सुनाई जा रही ‘अमर कथा’ सुनकर अमर हो गए।

गर्भ में ही वेदों-पुराणों का ज्ञान प्राप्त करने के बाद, जन्म लेते ही वे संसार से विरक्त होकर वन चले गए।

राजा परीक्षित को जब सात दिनों में मृत्यु का श्राप मिला, तब शुकदेव जी ने उन्हें श्रीमद् भागवत कथा सुनाकर मृत्यु के भय से मुक्त किया और भगवान के परमधाम का मार्ग दिखाया।

ज्ञान प्राप्ति के लिए राजा जनक को अपना गुरु बनाया था।

कम उम्र में ही ब्रह्मलीन हो गए थे। ओर अंत सम्पूर्ण श्रीमद्भागवत का संक्षिप्त विवरण बताया गया। कल सुबह दस बजे पूर्ण आहुति होगी।

वे सनातन धर्म में ज्ञान और भक्ति के प्रतीक माने जाते हैं।

श्रीमदभागवत कथा के दिवस प्रसिद्ध भागवतप्रवक्ता “*डॉ. मनोज मोहन जी शास्त्री*, वृंदावन के मुखारबिंद से श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन संपन्न हुआ

श्रीमदभागवत कथा के अंतिम दिवस में कथा में भक्तों का सैलाब उमड़ गया।

श्रीमद्भागवत की महाआरती में युवराज शर्मा पीए पूर्व सीएम राजस्थान, दीपक पंडित श्री वल्लभ शर्मा प्रकाश भाया, संजय कुंजीलाल गोयल, नरेश अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल, इंदर सिंह ठाकुर, गोपाल अग्रवाल में भाग लिया। कथा के अंत में महा प्रसाद का वितरण किया गया।

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