हिमाचल में 15 देशों के योग साधकों की ‘हिमालय यात्रा’ सम्पन्न
–आचार्य अरुण
हिमालयन सिद्ध अक्षर के नेतृत्व में 15 से अधिक देशों के योग आचार्य, प्रशिक्षक, योग शिक्षक और साधकों की 10 दिवसीय विशेष ‘हिमालय यात्रा’ का समापन हुआ। अमेरिका, ब्रिटेन, ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया, हांगकांग, सिंगापुर और चीन सहित विभिन्न देशों के प्रतिभागियों ने इस यात्रा में हिस्सा लिया।
यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने चंद्रताल, कुल्लू-मनाली, वशिष्ठ और जोगिनी जलप्रपात सहित हिमाचल प्रदेश के प्रमुख प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण किया। प्राकृतिक परिवेश में योग, ध्यान, प्राणायाम और स्वास्थ्यवर्धक अभ्यासों के साथ हिमालयी दर्शन, भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं तथा पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों पर संवाद किया गया। मौन, एकाग्रता और आत्मचिंतन के अभ्यास भी यात्रा का हिस्सा रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश की योग एवं आध्यात्मिक परंपराओं को उनके प्राकृतिक परिवेश में अंतरराष्ट्रीय साधकों तक पहुंचाना तथा प्रदेश को हिमालयी ज्ञान और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में सामने लाना था। विदेशी प्रतिभागियों ने हिमालय के शांत वातावरण और यहां की प्राचीन साधना परंपराओं को विशेष अनुभव बताया।
हिमालयन सिद्ध अक्षर का आध्यात्मिक संबंध सिद्ध बाबा बालक नाथ जी की सिद्ध परंपरा से बताया जाता है, जिसकी जड़ें हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर-बिलासपुर क्षेत्र और देवसिद्ध की आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल हिमालय के प्राचीन ज्ञान और परंपराओं से गहराई से जुड़ा है। यात्रा का उद्देश्य विश्वभर के साधकों को इन परंपराओं का उनके वास्तविक परिवेश में अनुभव कराना था।
इस दौरान अक्षर योग केंद्र की ओर से हिमाचल प्रदेश के विद्यालयों और विभिन्न समुदायों में निःशुल्क योग, स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। विद्यार्थियों को शारीरिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े अभ्यास करवाए गए। साथ ही, युवा पीढ़ी को भारतीय योग एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया गया।
अक्षर योग केंद्र द्वारा कुल्लू, मनाली और मंडी क्षेत्रों में योग, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सांस्कृतिक विरासत को समर्पित संस्थानों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इन संस्थानों के माध्यम से योग शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, ध्यान एवं मानसिक स्वास्थ्य, पारंपरिक ज्ञान पर शोध, युवा विकास और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की योजना है।
‘हिमालय यात्रा’ के समापन के साथ प्रतिभागियों को हिमाचल की योग, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का अवसर मिला।


