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जीवन में मिली हर सुविधा और शक्ति का सदुपयोग करें – राष्ट्रसंत सुधासागर

जीवन में मिली हर सुविधा और शक्ति का सदुपयोग करें – राष्ट्रसंत सुधासागर

दलाल बाग में चल रही चातुर्मास की धर्मसभा में प्रेरक आशीर्वचन – कल से शुरू होने वाले संस्कार शिविर में साधकों का आगमन शुरू

 

इंदौर पैर मिले हैं तो मंदिर जाएं, गुरु के विहार में साथ चलें, तीर्थ यात्रा करें, आँखें मिली हैं तो भगवान के दर्शन करें, कान मिले हैं तो जिन वाणी और सत्संग सुनें, धन मिला है तो ऐसे कार्य करें जो धन के बिना संभव नहीं- जैसे मंदिर, विद्यालय, अस्पताल और जरुरतमंदों की सहायता। जीवन में मिली हर सुविधा और शक्ति का सदुपयोग होना चाहिए। मनुष्य को पहले यह पहचान करना चाहिए कि इस जगत में वास्तव में मेरा क्या है और क्या नहीं है। जो वस्तु न तो हमारी थी, न हमारी है और न ही कभी होगी, उसके लिए अपने परिणाम क्यों बिगाड़ें। जीव और शरीर, धन, मकान, वाहन आदि अलग-अलग हैं लेकिन मोह के वशीभूत हम दूसरों के दृव्य को भी अपना मान लेते हैं और यही हमारे मिथ्यात्व का कारण बनता है।

ये प्रेरक विचार हैं संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज के, जो उन्होंने सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में वीआईपी रोड स्थित किला मैदान, दलाल बाग परिसर में निर्मित विद्या-सुधा मंडप में चल रहे चातुर्मास महोत्सव की धर्मसभा में व्यक्त किए। सभा का शुभारंभ मंगलाचरण एवं पाद प्रक्षालन के साथ हुआ। आयोजन समिति की ओर से चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन-शिवानी गोधा, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद-अंतिका गोधा, महामंत्री हर्ष-तृप्ति जैन, मनीष-सपना गोधा एवं आकाश-दीपिका जैन कोयला आदि ने देशभर से आए साधकों की अगवानी की। इस अवसर पर महोत्सव समिति के अध्यक्ष अशोक डोशी, विजय पाटोदी, संजय पाटोदी, प्रिंसपाल टोंग्या, सौरभ बडजात्या, विनोद भैया, राहुल सेठी, भूपेंद्र भोपाली सहित अनेक सहयोगी बंधुओं ने विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया। दलाल बाग पर पर्यूषण महापर्व पर 16 सितम्बर से होने वाले श्रावक संस्कार शिविर में देशभर से साधकों के आगमन का उत्साह देखने को मिल रहा है। धर्मसभा के दौरान प्रतिदिन आचार्य भगवंत एवं मुनि संघ के जयकारों से समूचा सभामंडप गुंजायमान बन रहा है। शिविर में दस हजार से अधिक साधक देश-विदेश से आकर शामिल होंगे। इसके लिए आज से ही साधकों के आगमन का सिलसिला शुरू हो गया है। दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक राष्ट्रसंत के प्रवचनों की अमृत वर्षा का क्रम जारी है।

राष्ट्रसंत प.पू. सुधासागर म.सा. ने कहा कि जो अपना नहीं है उसके लिए मोह नहीं करना चाहिए और हर अवसर को धर्म तथा अच्छे कार्यों में लगाना चाहिए, यही जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग है। पर्युषण के 10 दिन आत्म संयम और जीवन को अनुशासित करने का दुर्लभ अवसर है। हमें अपनी आदतों पर नियन्त्रण रखते हुए धर्म, संयम और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। जीवन में हर चीज गिनकर जीने के बजाय प्रेम और भावना से जीना चाहिए। घर परिवार के लिए भोजन बनाना, बोझ नहीं बल्कि सौभाग्य का अवसर है। इसी तरह जब साधु संतों के आहार का अवसर मिले तो उसे भी पुण्य और धर्म भावना का अवसर मानना चाहिए। भोजन की वास्तविक महत्ता केवल पदार्थ में नहीं बल्कि दाता की भावना में होती है। जैसे माँ अपने बच्चे को बार-बार देखकर भी नहीं थकती वैसे ही श्रद्धालु को भगवान और गुरु के दर्शन से अपने मन को निर्मल बनाने और उनके दर्शनों से कभी उबना नहीं चाहिए।

 

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