इंदौर। पिपलियाकुमार स्थित स्पेस पार्क फेज-2 के रहवासियों के बीच उस समय हड़कंप मच गया, जब 10 अगस्त 2026 को बैंक रिकवरी ट्रिब्यूनल, जबलपुर का नोटिस सोसायटी परिसर में चस्पा किया गया। नोटिस में हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हुडको) की करीब 1 करोड़ 56 लाख 63 हजार 641 रुपए की बकाया राशि और ब्याज की वसूली का उल्लेख किया गया है। राशि का भुगतान नहीं होने पर नोटिस में दर्शाई गई संपत्तियों को जब्त कर बेचने की कार्रवाई की बात कही गई है।
नोटिस सामने आने के बाद स्पेस पार्क फेज-2 के रहवासियों में चिंता बढ़ गई। रहवासियों के मुताबिक, वे पिछले करीब 18 वर्षों से अपने-अपने फ्लैटों में रह रहे हैं और उन्होंने संबंधित बैंकों से ऋण लेकर फ्लैट खरीदे हैं। उनका कहना है कि जिस भूमि को हुडको के पास बंधक रखकर ऋण लिया गया था, उसका स्पेस पार्क फेज-2 से कोई संबंध नहीं है।
अपराध शाखा की जांच तेज, नही पहुंचे दस्तावेजों के साथ
स्पेस पार्क फेस-02, ग्राम पिप्लया कुमार, वार्ड क्रमांक 36 से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में अपराध शाखा नगरीय इंदौर ने जांच तेज कर दी है। मामले में रहवासी बलराज सिंह गहलोत एवं अन्य की ओर से अरुण डांगरिया और अतुल सुराना के विरुद्ध शिकायत दिए जाने के बाद जांच शुरू की गई है। अपराध शाखा की ओर से जारी सूचना-पत्र में संबंधित व्यक्ति को स्पेस पार्क फेस-02 से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष एवं कथन प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। नोटिस के अनुसार, संबंधित व्यक्ति को 7 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे अपराध शाखा नगरीय इंदौर के कार्यालय में उपस्थित होना था। लेकिन दोनो भूमाफिया आज दिन तक ने अपने दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए है। इस मामलें में नोटिस में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि उपस्थित नहीं होने की स्थिति में एकपक्षीय वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इसके बाद भी दोनो पेश नहीं हुए है। इस मामले में जब टीआई तरूण भाटी से चर्चा की गई तो वह किसी आवश्यक मीटिंग में होने के कारण जवाब नहीं दे पाए।
डीआरटी के आदेशों की प्रतियां निकलवाने पर सामने आया मामला
रहवासियों के अनुसार, बैंक रिकवरी ट्रिब्यूनल जबलपुर की कार्रवाई से संबंधित दस्तावेजों और आदेशों की प्रतियां प्राप्त करने के बाद उन्हें जानकारी मिली कि डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल, जबलपुर के 19 जनवरी 2024, 2 मई 2024 और 6 अगस्त 2026 के आदेशों में कुछ जमीनों को हुडको के पास बंधक रखे जाने का उल्लेख है।
दस्तावेजों के अनुसार, सर्वे नंबर 20/2/5, ग्राम टिगरिया राव, तहसील एवं जिला इंदौर की करीब 0.210 हेक्टेयर भूमि तथा ग्राम निहालपुर मुंडी की विभिन्न सर्वे नंबरों वाली करीब 0.0686 हेक्टेयर भूमि को लेकर ऋण एवं बंधक की कार्रवाई सामने आई है।
रहवासियों का आरोप है कि उक्त संपत्तियां सैटेलाइट इंफा एवं रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से अधिकृत अतुल सुराना द्वारा हुडको के पास बंधक रखकर ऋण लिया गया था। उनका कहना है कि संबंधित ऋण का भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते अब वसूली की कार्रवाई की जा रही है।
“स्पेस पार्क फेज-2 की जमीन अलग है”
रहवासियों का स्पष्ट कहना है कि स्पेस पार्क फेज-2, पिपलियाकुमार सर्वे नंबर 156/1 और 156/2 पर निर्मित है, जबकि बैंक रिकवरी की कार्रवाई में जिन जमीनों का उल्लेख है, वे अलग सर्वे नंबरों की हैं।
रहवासियों का कहना है कि बैंक ट्रिब्यूनल की कार्रवाई में उनके फ्लैटों को भी प्रभावित किए जाने की आशंका पैदा हो गई है, जबकि उन्होंने फ्लैट खरीदते समय संबंधित दस्तावेजों और बैंक स्वीकृतियों के आधार पर खरीदारी की थी।
बैंक ऋण लेकर खरीदे थे फ्लैट
सोसायटी के रहवासियों के अनुसार, बिल्डर द्वारा फ्लैटों की बिक्री के समय एचडीएफसी बैंक सहित अन्य बैंकों से प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी। कई रहवासियों ने इन्हीं बैंकों से होम लोन लेकर अपने फ्लैट खरीदे।
रहवासियों का तर्क है कि यदि सोसायटी की जमीन पहले से किसी बैंक या वित्तीय संस्था के पास बंधक होती या उस पर कोई गंभीर कानूनी विवाद होता, तो संबंधित बैंकों द्वारा फ्लैटों के लिए ऋण स्वीकृत किए जाने पर सवाल उठता। उनका कहना है कि आज तक एचडीएफसी या अन्य संबंधित बैंकों की ओर से उनके फ्लैटों के संबंध में कोई आपत्ति सामने नहीं आई है।
संचालकों से संपर्क का प्रयास, नहीं मिला जवाब
नोटिस चस्पा होने के बाद रहवासियों ने स्पेस पार्क फेज-2 के पूर्व संचालक अतुल सुराना और अरुण डागरिया से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनके मुताबिक दोनों से संपर्क स्थापित नहीं हो सका।
रहवासियों का आरोप है कि यदि सोसायटी की जमीन या फ्लैटों से संबंधित कोई बंधक अथवा ऋण संबंधी जानकारी थी तो इसकी जानकारी फ्लैट खरीदारों को दी जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर फ्लैटों की बिक्री की गई।
अन्य बैंकों से ऋण लेने के भी लगाए आरोप
रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित जमीनों को अन्य बैंकों में भी बंधक रखकर ऋण लिया गया। इस मामले को लेकर अतुल सुराना, अरुण डागरिया और उनकी कंपनियों के खिलाफ विभिन्न थानों में शिकायतें दिए जाने तथा न्यायालय में मामले विचाराधीन होने का भी दावा किया गया है।
रहवासियों ने यह भी कहा है कि संबंधित व्यक्ति और उनकी कंपनियों की जमीनों एवं गतिविधियों को लेकर जिला प्रशासन स्तर पर भी जांच चल रही है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि और संबंधित पक्षों का पक्ष इस शिकायत में उपलब्ध नहीं है।
फ्लैटधारकों को पक्षकार नहीं बनाए जाने पर सवाल
रहवासियों का कहना है कि हुडको की ओर से सैटेलाइट रियलकॉन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को पक्षकार बनाकर बैंक रिकवरी ट्रिब्यूनल, जबलपुर में कार्रवाई की गई। उनका आरोप है कि इस कार्रवाई में वास्तविक फ्लैटधारकों को पक्षकार नहीं बनाया गया और उन्हें सुने बिना ही उनके फ्लैटों की जब्ती और बिक्री से संबंधित आदेश पारित कर दिया गया।
रहवासियों का कहना है कि वे फ्लैट खरीदने वाले स्वतंत्र खरीदार हैं और उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई तथा बैंक ऋण से मकान खरीदे हैं। ऐसे में बिल्डर द्वारा लिए गए किसी ऋण या बंधक की सजा फ्लैटधारकों को नहीं मिलनी चाहिए।
धारा 318(4) बीएनएस के तहत कार्रवाई की मांग
स्पेस पार्क फेज-2 के रहवासियों ने शिकायत में आरोप लगाया है कि पूर्व संचालकों द्वारा पूर्व में लिए गए बैंक ऋण की जानकारी छिपाकर फ्लैटों का निर्माण और विक्रय किया गया तथा खरीदारों से राशि प्राप्त की गई।
रहवासियों ने इस पूरे मामले की जांच कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अतुल सुराना और अरुण डागरिया के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने अपने फ्लैटों को बैंक रिकवरी की कार्रवाई से सुरक्षित रखने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
रहवासियों के सामने सबसे बड़ा सवाल
करीब 18 वर्षों से फ्लैटों में रह रहे परिवार अब यह जानना चाहते हैं कि जिस जमीन को लेकर हुडको की बकाया राशि की वसूली की कार्रवाई चल रही है, उसका स्पेस पार्क फेज-2 के फ्लैटों से कानूनी संबंध क्या है। रहवासियों ने प्रशासन और संबंधित न्यायिक अधिकारियों से दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने तथा फ्लैटधारकों के हितों की रक्षा करने की मांग की है।

