Narmada

क्यों नहीं की जाती है ? नर्मदा नदी की परिक्रमा के दौरान सहायक नदियां पार!

नर्मदा परिक्रमा के दौरान सहायक नदियों को पार करने की अनुमति नहीं रहती है। लेकिन परिक्रमा के दौरान प्रत्येक सहायक नदी को उसके उदगम स्थल तक जा कर पार करना और फिर सहायक नदी को पार करना हर नर्मदा परिक्रमा वासी के लिए असंभव है। यदि सहायक नदी के उद्गम स्थल से पार किया जाए तो नर्मदा परिक्रमा में वर्षों का समय लग जाएगा। तो फिर नर्मदा नदीं की सहायक नदियों को कैसे पार किया जाएं ?  इसका हल संतो ने निकाला और संतो ने सहायक नदियों को पार करने से पहले उससे लगभग एक किलोमीटर सहायक नदी की ओर चलने का कहा गया।

संगम स्थल से दूर जाते है संत
सहायक नदियों का जहां नर्मदा से संगम होता है उस स्थल से सहायक नदी के एक किलोमीटर दूर तक सहायक नदी की ओर यात्रा की जाती है इसके बाद सहायक नदी को पार किया जाता है।

नर्मदा की है 41 सहायक नदियां
मां नर्मदा की कुल 41 प्रमुख सहायक नदियाँ हैं, जिनमें से अधिकांश 39 मध्य प्रदेश में मिलती हैं, और बाकी गुजरात में मिलती है। प्रमुख सहायक नदियाँ बाएं और दाएं किनारे पर मिलती है। जिन सहायक नदियों का जलग्रहण क्षेत्र 500 वर्ग किमी से अधिक है,ऐसी प्रमुख सहायक नदियों की संख्या 41 है। इनमें से 19 सहायक नदियाँ दाएं तट से तथा 22 नदियाँ बाऐं तट से नर्मदा में मिलती है। जिनमें नर्मदा नदी से मध्यप्रदेश में 39 और केवल 02 सहायक नदी गुजरात में मिलती हैं। इनके अतिरिक्त नर्मदा की कई उप सहायक नदियाँ भी है अर्थात एक नदी सहायक नदी से मिलती है तथा आगे जाकर वो सहायक नदी नर्मदा नदी में मिल जाती है। दांए तट पर 1. सिल्गी 2. बलई 3. गौर 4. हिरन 5. बिरंज 6. तेन्दोनी 7. बारना 8. जामनेर 9. कोलार 10. सिप 11. चनकेशर 12. खारी 13. कनार 14. चोरल 15. कारम 16. मान 17. उरी 18. हथनी नदी मिलती है और नर्मदा नदी में मध्यप्रदेश में बायें तटपर 1. खारमेर 2. दूधी 3. छोटातवा 4. बुढनेर 5. सुखरी 6. कावेरी 7. बंजर 8. तवा 9. खरकिया 10.तेमुर 11. हाथेर 12. कुण्डी 13. सोनेर 14. गेजाल  15.बोराड़ 16. शेर 17. अजनाल 18. डेव 19. गोई 20. माचक 21. शक्कर नदी बाई ओर से मध्यप्रदेश में नर्मदा से मिलती है। जिनमें ‘तवा’ नर्मदा की सबसे लंबी सहायक नदी है जो बांद्राभान के पास मिलती है।

 

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