मां नर्मदा परिक्रमा के दौरान नर्मदा में लगभग 41 सहायक नदियों के संगम स्थल है जहां पर आकर सहायक नदियां नर्मदा में मिलती है। जब परिक्रमा होती है तब कई सहायक नदियां सुख गई होती है या उसमें पानी नहीं होता है। वर्तमान में तो कई सहायक नदियों के संगम स्थल खोजना भी मुश्किल है लेकिन नर्मदा परिक्रमा के दौरान जो लोग संतों के साथ परिक्रमा कर रहे है उन्हें भी संत इशारा करते है और वह सहायक नदियों की ओर चलने के बाद सहायक नदियां पार करते है। लेकिन संगम स्थल पर नदियां पार नहीं करते है।
नदी सूखी हो तो भी नहीं करते है संगम पार
नदी जब सूखी हो तो भी संगम स्थल पार नहीं करते है। इसका एक वृंतान्त
स्वयं मंत्री प्रहलाद पटेल ने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया। इन्होने बताया कि जब वे अपने गुरू के साथ नर्मदा परिक्रमा कर रहे थे तो उनके गुरू उन्हें सहायक नदियों की ओर एक किलोमीटर तक यात्रा करने के बाद सहायक नदी को पार करते थे। एक बार यात्रा के दौरान एक सहायक नदी उन्हें सूखी मिली जिसमें पानी नहीं था। तो वह उसे संगम स्थल से ही पार करने के लिए चल पड़े लेकिन गुरू ने उन्हें आदेश दिया कि इसे भी एक किलोमीटर सहायक नदी को ओर यात्रा करके ही पार किया जाएंगा चाहे नदी सूखी हो। इस बात से वह विचलित हो गए। और इस बात का कारण जानने की जिज्ञासा जब तक शांत नहीं हुए वह विचलित ही रहे।
अपूर्व उर्जा होती है संगम स्थलों पर
उनकी जिज्ञासा तब शांत हुई जब मंत्री प्रहलाद पटेल ने अपने गुरुदेव बाबा श्रीजी से इसका कारण पूछा तो उनके गुरू ने उन्हें बताया कि संगम नदियों का हो या पहाड़ों का हो या फिर स्त्री पुरूष का हो वहां जीवन की संभावना होती है। उसे रौदने की गलती मत करना, जहां पर उद्गम होते है वहां पर अपूर्व उर्जा होती है। उद्गम हम ने नहीं बनाए है यह प्रकृति के बनाए हुए है तब आप पैदा हुए । इसलिए संगम स्थल पर जो भी जाता है उसकी ऊर्जी सबसे अलग होती है। यह बात उन्होने अपनी पुस्तक में भी लिखी है।


