मां नर्मदा परिक्रमा के दौरान नर्मदा में लगभग 41 सहायक नदियों के संगम स्थल है जहां पर आकर सहायक नदियां नर्मदा में मिलती है। जब परिक्रमा होती है तब कई
राजसंमद जिले के कुंभलगढ़ तहसील में स्थित सूरजकुंड धाम के संतश्री अवधेश चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज जिनके तेजोप्रकाश से सूरजकुंड धाम की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली है। संतश्री इस वर्ष
भिक्षावृत्ति जिसे रोकने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश के एक शहर इंदौर में जहां भिक्षावृत्ति रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे है। भिक्षावृत्ति को जहां
मां नर्मदा की परिक्रमा करने के दौरान कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। यदि मां नर्मदा की परिक्रमा के दौरान नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो
नर्मदा तट के सौंदर्य का वर्णन कभी करते-करते इतिहासकार थक जाते थे। जो नर्मदा कभी शांत तो कभी रोद्र रूप दिखाती हुई अपनी सीमाओं में रहने के लिए प्रसिद्ध रही
राजस्थान के राजसंमद जिले की कुंभलगढ़ तहसील में स्थित सुरजकुंड दिव्य धाम के संतश्री अवधेश चेतन्य बह्मचारी महाराज की नर्मदा परिक्रमा को लगभग 16 दिन हो चुके है। यात्रा 17
नर्मदा परिक्रमा वैसे तो हर वर्ष देवउठनी एकादशी से शुरू होती है। जिसे पहले तो साधु संत ही किया करते थे। लेकिन वर्तमान में नर्मदा परिक्रमा एक एडवेंचर में भी
यह यात्रा न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी भक्तों को मजबूत बना रही है, जहां प्रकृति की गोद में नर्मदा मां के दर्शन से आत्मा की
पवित्र नर्मदा नदी की परिक्रमा में संलग्न दाता श्री की यात्रा का 13वां दिन अत्यंत उत्साह और भक्ति से भरपूर रहा। इस आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत मध्य प्रदेश के लोहारा
पुराणों के अनुसार, इस परिक्रमा को 12 करोड़ अन्य पवित्र स्थलों की परिक्रमा के बराबर पुण्यदायी माना जाता है, जो इस यात्रा की महानता को बढ़ाता है। मध्य प्रदेश और











