अंतर्राष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन)
इस्कॉन के 60वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में युवाओं एवं समाज के लिए संस्कार आधारित प्रकल्प चलाएंगे, 26 को बाल रथ यात्रा भी निकलेगी
रविवार को श्री अन्नपूर्णा मन्दिर से निकलने वाली भव्य रथ यात्रा में देश-विदेश के अनेक संत और श्रद्धालु भी आएंगे
इंदौर। अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) की 60वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में इस्कॉन मंदिर इंदौर द्वारा विभिन्न सेवा कार्यों की श्रृंखला चलाई जा रही है। गुरुकुलों के माध्यम से वैदिक एवं नैतिक शिक्षा, फ़ूड फॉर लाइफ के तहत सबके लिए निशुल्क भोजन सेवा, समाज के पुनरुत्थान के लिए युवाओं में चरित्र निर्माण हेतु नशा मुक्ति अभियान, गौसेवा तथा आध्यात्मिक साहित्य वितरण के साथ ही संस्कार आधारित अनेक प्रकल्प चलाए जा रहे हैं। संस्था का संकल्प है कि भविष्य में भी इन सेवाओं का और अधिक विस्तार किया जाए। इंदौर में रविवार 19 जुलाई को श्री अन्नपूर्णा मंदिर से निकलने वाली भव्य रथ यात्रा में भारत के अलावा अन्य देशों से पधारे अनेक भक्त भी शामिल होंगे। रथ यात्रा के समापन पर राजवाडा स्थित गोपाल मंदिर पर भगवान जगन्नाथ की दिव्य कथा एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। रविवार 26 जुलाई को इस्कॉन इंदौर (निपान्या) मंदिर क्षेत्र में एक विशेष बाल रथ यात्रा भी निकाली जाएगी। वर्तमान में 15 जुलाई तक निपान्या स्थित मंदिर पर श्रीवृन्दावन धाम से पधारे श्रीमान सर्वसाक्षी प्रभुजी के श्रीमुख से शाम 5 से 7 बजे तक भगवान जगन्नाथ की कथामृत वर्षा का सिलसिला एवं प्रसाद वितरण चल रहा है।
इस्कॉन इंदौर के अध्यक्ष एवं उत्तर भारत के इस्कॉन ब्यूरो के वाइस चेयरमैन श्री महामन दास प्रभुजी (इस्कॉन गुरु) ने आज पत्रकार वार्ता में उक्त जानकारी देते हुए बताया कि पूरे प्रदेश में इस्कॉन इंदौर के तत्वाधान में भगवान जगन्नाथ की 31 रथ यात्राओं का आयोजन गत 16 जुलाई से किया जा रहा है। 13 जुलाई को इस्कॉन की स्थापना के 60 वर्ष पूरे हो रहे हैं। गत 13 जुलाई 1966 को श्री कृष्णकृपा मूर्ति श्री अभय चरणारविन्द भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद जी ने न्यूयॉर्क में इस्कॉन का विधिवत पंजीयन कराकर इस आध्यात्मिक आन्दोलन की स्थापना की थी, अब वही दिव्य बीज पूरे विश्व में विशाल वटवृक्ष के रूप में कृष्ण भक्ति, भगवद गीता एवं श्रीमद भागवत के दिव्य संदेशो के प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम बन गया है।
हरे कृष्ण हरे राम संकीर्तन की गूंज पिछले 60 वर्षों में पूरे विश्व में गूंज रही है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि श्रील प्रभुपाद ने 69 वर्ष की आयु में अपने गुरु के आदेश का पालन करते हुए मात्र 40 रुपए की धनराशि एवं अत्यंत सीमित संसाधनों के साथ भारत से एक मालवाहक जहाज “जलदूत” से अमेरिका तक की समुद्री यात्रा की। इस दौरान उन्हें दो बार हृदयाघात (हार्ट अटैक) सहित अनेक संघर्षों का सामना भी करना पड़ा लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने दृढ संकल्प से इस्कॉन की स्थापना कर लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक और आध्यात्मिक बदलाव लाकर सनातन धर्म की ध्वजा को समूर्ण विश्व में फहराया। आज पूरे विश्व में करोड़ों श्रद्धालु इस्कॉन से जुड़कर भगवान श्रीकृष्ण के नाम की महिमा का गुणगान कर रहे हैं।
श्री महामनदास जी ने बताया कि इंदौर में रविवार 19 जुलाई को अन्नपूर्णा मंदिर से दोपहर 1 बजे से प्रारम्भ होने वाली रथ यात्रा की जोरदार तैयारियां की जा रही है। रथ यात्रा संयोजक हरि अग्रवाल, किशोर गोयल, अशोक गोयल एवं सहसंयोजक भावेश दवे सहित सैकड़ों श्रद्धालु इस यात्रा की तैयारियों में जुटे हुए हैं। यात्रा में भगवान जगन्नाथ के रथ के लिए वृन्दावन से विशेष पोशाक, फूल एवं अन्य सामग्री आ रही है। यात्रा में देश-विदेश के अनेक संत और भक्त भी शामिल होकर भगवान जगन्नाथ की महिमा का गुणगान करेंगे। गत 12 जुलाई से इस्कॉन मंदिर इंदौर पर वृन्दावन धाम से आए सर्वसाक्षी प्रभु के श्रीमुख से जगन्नाथजी की कथा का आयोजन भी प्रतिदिन शाम 5 से 7 बजे तक हो रहा है। यह क्रम 15 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान आने वाले भक्तों के लिए महाप्रसाद वितरण की नियमित व्यवस्था चल रही है।
इस्कॉन इंदौर द्वारा संचालित “प्रहलाद संडे स्कूल” के बालक-बालिकाओं द्वारा रविवार 26 जुलाई को मंदिर क्षेत्र में भगवान श्रीजगन्नाथ की अनूठी बाल रथ यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा भगवान जगन्नाथ के विशाल रथ की तर्ज पर विशेष रूप से बच्चों के लिए रथ का सुंदर प्रतिरूप बनाकर निकाली जाएगी जिसमें बालक-बालिकाएं हरि नाम संकीर्तन करते हुए, रथ को खींचते हुए भगवान की सेवा का पुण्य लाभ उठाएंगे। इसमें भी विदेश से आए हुए कृष्ण भक्तों की अनुठी प्रस्तुति रहेगी। हमारी नई पीढ़ी में सनातन संस्कृति, भक्ति एवं आध्यात्मिक संस्कारों के अंकुरण एवं वर्धन के उद्देश्य से इस तरह के नियमित आयोजन इस्कॉन इंदौर द्वारा किए जाते रहे हैं और भविष्य में और अधिक विस्तार से किए जाएँगे। श्री महामनदास प्रभुजी ने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपनी गौरवशाली परम्परा के अनुरूप 16 जुलाई से 27 जुलाई तक होने वाली सभी रथ यात्राओं (विशेष रूप से इंदौर में 19 जुलाई) में शामिल होकर भगवान की कृपा एवं सेवा का लाभ उठाने का आग्रह किया
है।


