Eternal Hinduism

खाटूश्याम मंदिर अंबिकापूरी जहां प्रकट होती है हवन में बाबा की सवारी

इंदौर शहर में वैसे तो लगभग पांच खाटू श्याम मंदिर है। इसमें सबसे पहले एयरपोर्ट रोड़ पर स्थित अंबिकापुरी में खाटू श्याम बाबा का मंदिर निर्माण हुआ। इस मंदिर की स्थापना सन 1996 में पंडित रामगोपाल शर्मा ने की। जो राजस्थान के सीकर जिले के ही निवासी है वह जब इंदौर में आए तो उन्होने अपने साथ खाटू श्याम बाबा को भी इंदौर लाने का निर्णय लिया। शुरूआत में तो उन्होने घर में ही बाबा की पूजा अर्चना की उसके बाद उन्होने बाबा खाटू श्याम बाबा के मंदिर का निर्माण कराया।

अभी भी स्थित है छोटा मंदिर
सबसे पहले खाटू श्याम बाबा छोटे से मंदिर में विराजे जहां से बाबा के मंदिर की जानकारी भक्तों तक पहुंचने लगी। फिर भक्त नियमित दर्शन करने के लिए बाबा के मंदिर आने लगे उसके बाद बाबा खाटू श्याम के भव्य मंदिर का निर्माण किया गया।

यहां प्रकट होता है बाबा का घोड़ा
खाटू श्याम बाबा को विराजित करने के बाद जब भी यहां पर भव्य अनुष्ठान होते है और हवन होते है तो हवन की अग्नि में बाबा के घोड़े की आकृति बनती है। हवन की अग्नि में कई दिव्य आकृतियां प्रकृट होती है। वर्षो पूर्व भी हवन की अग्नि में भगवान श्री कृष्ण की आकृति प्रकृट हुई थी। इससे यह बात का अनुमान तो लगाया जा सकता है कि यहां पर खाटू श्याम बाबा की असीम कृपा बिखरती है।

मिलते है दिव्य संकेत
खाटू श्याम बाबा के मुख्य पुजारी रामगोपाल शर्मा जी ने बताया कि खाटू श्याम बाबा की नियमित सेवा और कई आयोजन यहां मंदिर पर आयोजित किए जाते है। जहां हर त्यौहारो पर भगवान खाटू श्याम का विशेष- पूजन अनुष्ठान किए जाते है यही बाबा के प्रकटोत्सव पर भव्य कार्यक्रम होते है। बाबा के कई चमत्कार और दिव्य संकेत हमें लगातार मिलते रहते है। जो भी भक्त यहां नियमित दर्शन करने आता है बाबा उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते है।

नारियल बांध कर मांगते है मन्नत
यहां स्थित वक्षों पर भक्त अपने लिए मन्नत का नारियल बांधते है। मन्नत पुरी होने पर खाटू श्याम बाबा को प्रसाद और जो भी साम्रगी चढ़ाने की मन्नत मानी हो वह वस्तु चढ़ाते है। भक्तो को सवा किलो देशी घी के बेसन के लड्डू चढ़ाना अनिवार्य होता है इसके अलावा भक्त अपनी श्रद्धा भक्ति से कई अन्य साम्रगी भी अर्पित करते है।

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