*प्रतिष्ठित देवेंद्र लाल मेमोरियल मेडल के लिए प्रो. नीलिमा सत्यम नामांकित*
*आईआईटी इंदौर की प्रो. नीलिमा सत्यम प्रतिष्ठित देवेंद्र लाल मेमोरियल मेडल के लिए नामांकित*
*इंदौर* । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त जियोटेक्निकल इंजीनियर एवं पृथ्वी वैज्ञानिक प्रोफेसर नीलिमा सत्यम को भूस्खलन जोखिम आकलन, जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग, भूकंपीय माइक्रोजोनेशन तथा आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन (AGU) के प्रतिष्ठित देवेंद्र लाल मेमोरियल मेडल के लिए नामांकित किया गया है। प्रो. नीलिमा सत्यम मध्यप्रदेश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं और मूल रूप से आंध्र प्रदेश के चित्तूर की रहने वाली हैं।
प्रख्यात भूभौतिक विज्ञानी प्रोफेसर देवेंद्र लाल के नाम पर स्थापित देवेंद्र लाल मेमोरियल मेडल प्रत्येक वर्ष पृथ्वी एवं अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए शुरुआती अथवा मध्य-कैरियर के किसी वैज्ञानिक को प्रदान किया जाता है। प्रोफेसर देवेंद्र लाल के अग्रणी शोध ने पृथ्वी विज्ञान अनुसंधान में कॉस्मोजेनिक आइसोटोप को ट्रेसर के रूप में उपयोग करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
प्रो. नीलिमा सत्यम का शोध जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग, भू-आकृति विज्ञान, रिमोट सेंसिंग, रियल-टाइम सेंसिंग, जियोस्पेशियल एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एकीकृत करता है। इसका उद्देश्य भूस्खलन और अन्य भू-जोखिमों की बेहतर समझ विकसित करने के साथ-साथ उनकी निगरानी और पूर्वानुमान की क्षमता को मजबूत करना है।
उनके शोध कार्य में भूस्खलन संवेदनशीलता मानचित्रण, वर्षा-सीमा (रेनफॉल थ्रेशोल्ड) विश्लेषण, मलबा प्रवाह (डेब्रिस फ्लो) का अध्ययन एवं मॉडलिंग, हाइड्रो-जियोटेक्निकल आकलन तथा सेंसर आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियां शामिल हैं। उनके शोध ने भूस्खलन संभावित पर्वतीय क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी की व्यवस्थाओं के विकास में योगदान दिया है। इससे आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों को वर्षा के कारण होने वाले भूस्खलन और ढलान विफलता की घटनाओं के लिए बेहतर तैयारी एवं त्वरित प्रतिक्रिया में सहायता मिल रही है।
प्रो. नीलिमा सत्यम ने भूकंपीय माइक्रोजोनेशन और भूकंप जोखिम आकलन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके अंतर्गत उच्च-रिजॉल्यूशन शीयर-वेव वेग प्रोफाइलिंग, साइट-रिस्पॉन्स विश्लेषण और जियोटेक्निकल जोखिम मानचित्रण जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया है। इन अध्ययनों से जोखिम को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचे की योजना एवं विकास को वैज्ञानिक आधार प्रदान करने में मदद मिली है।
प्रो. नीलिमा के कार्य का एक महत्वपूर्ण पहलू वैज्ञानिक शोध को इंजीनियरिंग के व्यावहारिक उपयोग में परिवर्तित करना रहा है। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, मृदा एवं नींव इंजीनियरिंग, सड़कों, सुरंगों, तटबंधों, जल निकासी, भू-सुधार तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित राष्ट्रीय तकनीकी मानकों और समितियों के कार्य में भी योगदान दिया है।

