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श्रद्धा और विश्वास के बिना जीवन में कोई कर्म सार्थक नहीं हो सकता – आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती

श्रद्धा और विश्वास के बिना जीवन में कोई कर्म सार्थक नहीं हो सकता

– आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती

गीता भवन में वृन्दावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती के प्रेरक उदगार – कल राम एवं कृष्ण जन्मोत्सव

इंदौर। सुख में भगवान का सुमिरन नहीं, विस्मरण होता है। दुख भगवान की शरण में पहुंचने का माध्यम है। जिसने दुख को भगवान का प्रसाद या सुख मान लिया वह दुखी हो ही नहीं सकता। भागवत का ज्ञान विषाद को प्रसाद में बदल देता है। दुख मानव की सम्पत्ति है, जबकि सुख व्यक्ति को अभिमानी बना देता है। जवानी, ज्ञान, धन, सम्पत्ति और अधिकारों का अहंकार मनुष्य को भक्ति से विमुख बना देता है। दुख का कारण समय, स्वभाव और हमारे कर्म होते हैं। दुख के लिए हम खुद जिम्मेदार हैं, भगवान या कोई और नहीं। श्रद्धा और विश्वास के बिना जीवन में कोई कर्म सार्थक नहीं हो सकता।

ये प्रेरक विचार हैं वृन्दावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती के, जो उन्होंने मनोरमागंज स्थित गीता भवन में भक्त मंडल एवं अखंड प्रणव योग वेदांत पारमार्थिक न्यास के तत्वावधान में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में बालक ध्रुव की भक्ति की व्याख्या के दौरान व्यक्त किए। प्रारम्भ में भक्त मंडल की ओर से सुरेश शाहरा, मनोज गुप्ता, राजेंद्र माहेश्वरी, मनोज रामनानी, श्रीमती रश्मि रामनानी, श्रीमती लीला राजेश अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, योगेन्द्र भाटिया, गोविन्द सिंह बैस आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी चन्दन मंगलानी, राकेश मंडन, संतोष पाराशर, सीए श्रीमती केमिशा सोनी ने की। गीता भवन में ज्ञान यज्ञ का यह आयोजन शुक्रवार 23 जुलाई तक प्रतिदिन दोपहर 3.30 से शाम 6.30 बजे तक जारी रहेगा। शनिवार को अमृत मंथन, मत्स्यावतार एवं वामन चरित्र प्रसंगों की कथा होगी। गुरु पूर्णिमा महोत्सव 29 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक झलारिया स्थित स्वामी श्रीअखंड वेदांत आश्रम पर मनाया जाएगा।

कथा में भागवत की महत्ता बताते हुए स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ा डर मृत्यु का होता है। भागवत इस मौत के डर को दूर करती है। मौत टाली नहीं जा सकती, लेकिन मोक्ष में बदली जा सकती है। सम्पत्ति में तृष्णा की याद रहती है लेकिन विपत्ति में कृष्णा की। भागवत वह दिव्य कथा है, जो मनुष्य को व्यथाओं से मुक्ति दिलाकर ज्ञान, भक्ति और सेवा के राजपथ पर ले जाती है। भारत भक्तों की भूमि है। यहां जन्म मिलना ही सबसे बड़ा सौभाग्य है। श्रद्धा और विश्वास के बिना जीवन में कोई कर्म नहीं हो सकता। श्रद्धा स्थिर और विश्वास अटल होना चाहिए क्योंकि ये दोनों शिव-पार्वती के प्रतीक हैं।

भक्त मंडल की ओर से श्रीमती मृदुला शाहरा एवं श्रीमती कांता अग्रवाल ने बताया कि कथा में रविवार 19 जुलाई को राम एवं कृष्ण जन्मोत्सव, 20 को गोवर्धन पूजा, 21 को रुक्मणी विवाह एवं सुदामा चरित्र तथा 22 जुलाई को परीक्षित मोक्ष सहित विभिन्न प्रसंगों की कथा के बाद 23 जुलाई को सुबह हवन-पूजन के साथ समापन होगा। इस दौरान स्वामी भारतानंद सरस्वती, स्वामी पूर्णानंद सरस्वती, स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती, स्वामी ब्रजेशानंद सरस्वती, स्वामी अतुलानंद, ब्रह्मचारी ज्ञानेश चेतन्य, ब्रह्मचारी पंढरीनाथ, ब्रहमचारी योगेश, ब्रह्मचारी कन्हैया सहित अनेक जाने-माने संत-विद्वान भी इस अनुष्ठान में शामिल होंगे। कथा के दौरान प्रसंगानुसार विभिन्न उत्सव भी मनाए जाएँ

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