श्री श्रीविद्याधाम पर सग्रहमख शतचंडी महायज्ञएवं लक्ष्यार्चन आराधना का क्रम जारी
प्रतिदिन भगवती के विभिन्न स्वरूपों का नियमित श्रृंगार, संध्या को 108 दीपों से महाआरती
इंदौर। विमानतल मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम पर महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सानिध्य में चल रहे शारदीय नवरात्र महोत्सव में सग्रहमख शतचंडी महायज्ञ में आचार्य पं. राजेश शर्मा एवं अन्य सहयोगी 21 विद्वानों के निर्देशन में आहुतियों का क्रम पांचवें दिन भी जारी रहा। गुरुवार को ललिता पंचमी के उपलक्ष्य में मां को प्रिय व्यंजनों की आहुतियां समर्पित कर उनसे समाज एवं राष्ट्र में सुख, शांति एवं सदभाव की प्रार्थना की गई। महायज्ञ में स्वाहाकार की मंगल ध्वनि से समूचा परिसर गुंजायमान बना हुआ है। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु यज्ञ एवं माता रानी के नूतन श्रृंगार के दर्शनार्थ आ रहे हैं।
आश्रम परिवार के सुरेश शाहरा, पं. दिनेश शर्मा, सुश्री उमा शुक्ला एवं राजेन्द्र महाजन ने बताया कि शारदीय नवरात्रि में मंदिर स्थित मां भगवती के स्वरूपों का मनोहारी श्रृंगार क्रमानुसार प्रतिदिन किया जा रहा है। रोज सुबह 7 बजे से वेदपाठ, सायं 6 बजे से ललिता सहस्त्र नामावली से सामूहिक लक्ष्यार्चन, सायं 7.30 बजे महाआरती और रात 9 बजे ललिता सहस्त्र नामावली से सामूहिक लक्ष्यार्चन आराधना का क्रम जारी है। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु इन सभी अनुष्ठानों में उत्साहपूर्व शामिल हो रहे हैं। भगवती के मुख्य मंदिर के समक्ष शिव-पार्वती के प्रतीक बनाकर आकर्षक पुष्प रचना की गई है। प्रतिदिन संध्या को 108 दीपों से भगवती की आरती में भी सैकड़ों श्रद्धालु आकर पुण्य लाभ उठा रहे हैं। फलाहारी प्रसाद वितरण की समुचित व्यवस्था पहले दिन से ही जारी है। इधर, सग्रहमख शतचंडी महायज्ञ में दुर्गा सप्तशती पाठ से हवनात्मक आहुतियों का क्रम जारी हैं। गुरुवार को सुबह ललिता पंचमी के उपलक्ष्य में माँ को ललिता सहस्त्रनाम से उनके प्रिय व्यंजनों, खीरान, मालपुआ, गन्ने के रस, त्रिमधु, शहद, पान, सुगन्धित पदार्थों एवं अन्य व्यंजनों की आहुतियां समर्पित की गई। अपरान्ह में श्री दुर्गा सप्तशती से हवन भी सम्पन्न हुआ जिसमें 21 विद्वानों के अलावा महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती के सानिध्य में यजमान समूह की ओर से गोपाल महाजन, विजय सोनी, दिलीप उमा, परितोष शर्मा, बिट्टू अग्रवाल, भुरु शर्मा आदि ने आहुतियाँ समर्पित की। नवरात्रि ने प्रतिदिन कन्या भोज एवं कन्या पूजन का सिलसिला भी नियमित रूप से चल रहा है। महाअष्टमी पर भी कन्याओं का सामूहिक पूजन होगा।

