मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए दायर याचिकाओं को आधार कार्ड से जोड़ने का सुझाव देने वाली याचिका को गंभीरता से लिया है। याचिकाकर्ता ने कहा था कि डिजिटाइजेशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्ट को दिशा-निर्देश जारी किए थे।
मृत्यु के बाद भी याचिका रहती है लंबित
कई प्रकरणों में याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद भी याचिका लंबित रहती है। जिसकों देखते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने दायर याचिकाओं को आधार कार्ड से जोड़ने के सुझाव वाली याचिका को गंभीरता से लिया।
कमेटी के समक्ष रखा सुझाव
रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दे दिए कि याचिकाकर्ता के सुझाव को अभ्यावेदन मानकर प्रशासनिक कमेटी के समक्ष रखा जाए। याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा की ओर से स्वयं पक्ष रखा गया। उन्होंने दलील दी कि डिजिटाइजेशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्ट को दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस प्रक्रिया के दौरान याचिका को आधार कार्ड से जोड़े जाने की व्यवस्था दी जानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि कई प्रकरणों में याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद भी याचिका लंबित रहती है।
प्रिजनर्स पोर्टल को भी हाई कोर्ट से जोड़ा जाएं
इसी प्रकार जिला न्यायालय में आपसी समझौता होने के बावजूद हाईकोर्ट में दायर याचिका लंबित रहती है, जिसके कारण न्यायालय का कीमती समय बर्बाद होता है। याचिकाकर्ता ने यह भी सुझाव दिया कि नेशनल प्रिजनर्स पोर्टल को भी हाई कोर्ट से जोड़ा जाए। ऐसा इसलिए ताकि जेल में सजा काट रहे कैदियों के रिकॉर्ड को देखा जा सके।
सजा पूरी होने के बावजूद भी लंबित रहती है अपील
कई प्रकरण में कैदियों के सजा पूरी होने के बावजूद उनके द्वारा दायर की गई अपील हाई कोर्ट में लंबित रहती है। इसके अलावा याचिका में फाइलिंग व आवेदन दायर करने के संबंध में भी सुझाव दिए गए। हाई कोर्ट याचिका में उठाए गए मुद्दों को उचित करार देते हुए दिशा-निर्देश सहित निराकरण कर दिया


