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तर्पण शास्त्र सम्मत प्रक्रिया, जो स्वयं को भी ऋण मुक्त बनाकर नई पीढ़ी को भी संस्कारित करती है – स्वामी रामचरणदास

 

तर्पण शास्त्र सम्मत प्रक्रिया, जो स्वयं को भी ऋण मुक्त बनाकर नई पीढ़ी को भी संस्कारित करती है – स्वामी रामचरणदास

हंसदास मठ पर चल रहे तर्पण अनुष्ठान में सांसद शंकर लालवानी ने किया सम्मान- पितृ मोक्ष भागवत में हुआ रुक्मणी विवाह

इंदौर,। बच्चों की पहली गुरू मां ही होती है। मां से मिले संस्कार ही जीवन को संवारते हैं। भारतीय नारी जहां जाती है, वह जगह स्वर्ग बन जाती है। अब तो बेटियों का युग आ गया है। शास्त्र सम्मत तर्पण ऐसी प्रक्रिया है, जो स्वयं को ऋण मुक्त बनाती ही है, हमारी नई पीढ़ी को भी संस्कारित बनाती है। आज के दौर में इस तरह की संस्कृति को प्रोत्साहन देने की सख्त जरूरत है।

ये दिव्य विचार हैं हंसपीठाधीश्वर श्री महंत स्वामी रामचरणदास महाराज के, जो उन्होंने एयरपोर्ट रोड स्थित हंसदास मठ पर श्रद्धा सुमन सेवा समिति की मेजबानी में चल रहे निशुल्क तर्पण अनुष्ठान और पितृ मोक्षदायी भागवत के दिव्य अनुष्ठान में सांसद शंकर लालवानी के मुख्य आतिथ्य और ज्योतिषाचार्य पं. बच्चा महाराज के सानिध्य में आयोजित अपने अभिनन्दन के प्रत्युत्तर में व्यक्त किए। भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी, महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज सहित अनेक संत विद्वानों ने भी उनका स्वागत किया। श्रद्धा सुमन सेवा समिति की ओर से सांसद शंकर लालवानी, अध्यक्ष हरि अग्रवाल, राजेन्द्र सोनी, राजेन्द्र गर्ग, डॉ. चेतन सेठिया, विनय जैन, जगमोहन वर्मा, मुरलीधर धामानी, सूरजसिंह राठौड़, हनुमानप्रसाद सारड़ीवाल आदि ने हंस पीठाधीश्वर को समिति के संस्थापक मोहनलाल सोनी की श्राद्ध तिथि पर शॉल श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मानित किया। इसके पूर्व सुबह भगवान हरि विष्णु के पूजन के साथ तर्पण अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। ज्योतिषाचार्य पं. बच्चा महाराज ने भी तर्पण को सनातन संस्कृति का उजला पक्ष बताते हुए इस तरह के आयोजन को नई पीढ़ी के लिए अनुकरणीय बताया। आज भी देश के लिए हुए शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों, होल्कर राजवंश के शासकों एवं गोमाता के लिए भी तर्पण क्रिया की गई।

आज कथा का समापन, कल सर्व पितृ अमावस्या – दोपहर में पितृ मोक्षदायी भागवत में आचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी ने रुक्मणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण चित्रण किया और कहा कि विवाह हमारी भारतीय संस्कृति का सर्वश्रेष्ठ पक्ष है जिसके कारण हमारे समाज मर्यादित और संस्कारित बने हुए हैं। व्यास पीठ का पूजन संतों के सानिध्य में कालूराम–श्यामा पटेल दम्पत्ति, हरि अग्रवाल, ए.के. पुंडलिक, कमल गुप्ता, राजेंद्र गर्ग आदि ने किया। कथा में शुक्रवार 9 अक्टूबर को दोपहर 3 से 6 बजे तक सुदामा चरित्र एवं भागवत पूजन के साथ समापन होगा और शाम 7 बजे आयोजन में सहयोग देने वाले सभी कार्यकर्ताओं एवं सेवकों का सम्मान भी किया जाएगा। तर्पण अनुष्ठान का समापन शनिवार को सुबह 8 से 10 बजे तक सर्व पितृ अमावस्या के उपलक्ष्य में विशेष व्यवस्थाओं के साथ होगा। समिति की ओर से विशेष व्यवस्थाएं एवं तर्पण सामग्री की निशुल्क व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। जिन लोगों को अपने दिवंगत परिजनों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है अथवा जो किसी कारण से पूर्व तिथि पर तर्पण नहीं कर सकें हैं, वे 1० अक्टूबर को सुबह 7.30 बजे घर से स्नान कर श्वेत धोती-कुर्ता या कुर्ता-पायजामा पहनकर हंसदास मठ पहुंच जाएं जहां तर्पण की सभी व्यवस्थाएं निःशुल्क की गई हैं।

 

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