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नर्मदा मैया की साष्टांग दंडवत परिक्रमा करते हुए उदासीन संप्रदाय के संत मंगल मुनि पहुंचे धाराजी

इंदौर(विनोद गोयल)। माँ नर्मदा के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था को व्यक्त करने वालों की संख्या निरन्तर बढती जा रही है। इन दिनों नर्मदा की परिक्रमा करने वालों में जहाँ अनेक आम श्रद्धालु पहुँच रहे हैं वहीँ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी से लेकर अनेक नेताओं के पुत्र, पुत्री और बहू-बेटे भी नर्मदा मैया की परिक्रमा कर रहे हैं लेकिन उदासीन सम्प्रदाय के एक तपस्वी संत स्वामी मंगल मुनि उदासीन अपनी पैदल परिक्रमा के दौरान साष्टांग दंडवत करते हुए पीपरी-धाराजी पहुंचे जहाँ उन्होंने अपनी इस यात्रा से जुड़े प्रेरक संस्मरण बताए।

कई वर्षों तक चलने वाली कठिन साधना
बोल बम कावड़ यात्रा मंडल धाराजी के संयोजक गिरधर गुप्ता ने बताया कि संत मंगल मुनि उदासीन करीब 3850 किलोमीटर की नर्मदा परिक्रमा पूरी करने के लक्ष्य से आगे बढ़ रहे हैं। यह परिक्रमा एक दो दिन या माह नहीं बल्कि कई वर्षों तक चलने वाली कठिन साधना हैं जिसमें साधक प्रत्येक चरण पर जमीन पर लेटकर प्रणाम करता है और उसी क्रम से आगे बढ़ता है। तेज धूप हो, वर्षा हो या कड़ाके की ठंड हो यह परिक्रमा यात्रा न तो थमती है और न ही इसकी गति धीमी होती है।

जीवन रेखा नर्मदा की महत्ता और आध्यात्मिक मार्ग
संत मंगल मुनि ने गत 3 जून 20२४ से ओम्कारेश्वर से अपनी यह परिक्रमा यात्रा प्रारम्भ की है और वे अब तक रत्नसागर, भरूच गुजरात होते हुए धाराजी पहुंचेंगे। उनकी अब तक 1400 किलोमीटर यात्रा पूरी हो चुकी है। अपना लक्ष्य पूरा करने में उन्हें लगभग 5 वर्ष का समय और लगेगा। मात्र 31 वर्ष की आयु में अपनी इस कठिन यात्रा के दौरान वे नर्मदा संरक्षण, स्वच्छता और पौध रोपण का भी सन्देश दे रहे हैं।

वे चाहते हैं कि देश की युवा पीढ़ी उन्हें देखकर हिन्दू सनातन धर्म के महत्व, जीवन रेखा नर्मदा की महत्ता और आध्यात्मिक मार्ग को भी समझे तथा उस दिशा में प्रेरित हों। रविवार को संत मंगल मुनि के धाराजी आगमन पर नर्मदा मंदिर सनातन विचार मंच संस्था पीपरी पर आयोजित स्वागत समारोह में गिरधर गुप्ता के साथ जगदीश विश्वकर्मा, गणेश सेन, रविन्द्र चौहान, संतोष चावड़ा, जितेन्द्र शिंदे एवं रोहित परमार सहित अनेक श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। संत ने बताया कि वे केवल एक समय ही भोजन कर अपनी दंडवत परिक्रमा यात्रा जारी रखे हुए हैं। सोमवार की सुबह उन्होंने धाराजी पहुंचकर माँ नर्मदा की पूजा अर्चना की।

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