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आज की विशेष प्रस्तुति कश्मीर का रौफडांस पंजाब का जिंदवा- शिल्प मेले में आए हैं म्यूजिकल हेल्थ शिल्प

आज की विशेष प्रस्तुति कश्मीर का रौफडांस पंजाब का जिंदवा*

-शिल्प मेले में आए हैं म्यूजिकल हेल्थ शिल्प

-ऊंट पर बैठकर बच्चे हुए खुश

इंदौर। परिवार के बच्चों के समूह दोस्तों के समूह अपनी मस्ती में मस्त, मस्ती से इधर-उधर शिल्प देखते हुए तो कुछ समय के लिए मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में तालियां बजाते हुए ,छोटे बच्चे के साथ बड़े भी ऊंट पर सवारी करके आनंद लेते हुए, झूला झूलना और मालवी व्यंजनों का लजीज स्वाद तो उत्सवी माहौल का गुणगान करते इंदौरी लहजे में भैया नमस्ते कह कर आगे बढ़ते कला प्रेमियों के समूह आज मालवा उत्सव में अपनी कला प्रियता को दर्शाते हुए दिखाई दे रहे थे।

लोक संस्कृति मंच के संयोजक एवं सांसद शंकर लालवानी ने बताया की आज शिल्प बाजार में गौरव दिल्ली से स्पेशल शिल्प लेकर आए हैं तो वहीं इस मालवा उत्सव में संगीत के माध्यम से स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए कुछ म्यूजिकल शिल्प भी यहां पर आए हैं। वही अमर प्रजापति ब्लैक पॉटरी लेकर राजस्थान से आए हैं तो जयपुर से फर्नीचर आया है जिस पर खूबसूरत मेटल वर्क है। वही उत्तर प्रदेश से हैंडलूम की बेडशीट लेकर कई शिल्पकार यहां आए हैं कोलकाता का काथा वर्क भी यहां देखने को मिल रहा है ।वही डिंडोरी मध्य प्रदेश से गोंड पेंटिंग जिसे हाथ से बनाने में करीब 3 से 5 दिन लगते हैं भी यहां पर देखने को मिल रही है लेकर रजनी धुर्वे, सूरज सुकर्मा आदि आए हैं थाईलैंड युगांडा विदेश से भी शिल्पकार यहां पर आए हैं । फरीदाबाद एवं भोपाल से टेराकोटा का विशाल संग्रह जिसमें कछुआ फ्लावर पॉट बुद्धा आदि है आए हैं। पश्चिम बंगाल से जहां हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग की बेडशीट ,जूट के बैग आए हैं । टीकमगढ़ का प्रसिद्ध ब्रास शिल्प पीतल शिल्प, लौह शिल्प, पोचमपल्ली साड़ियां, महेश्वरी साड़ियां, गलीचा, ड्राई फ्लावर, बांस शिल्प, केन फर्नीचर सहित अनेकों आइटम यहां मौजूद है।

आज की विशेष प्रस्तुति-रौफडांस कश्मीर से और पंजाब से जिंदवा आंध्र का तमेटागुल्लू*

लोक संस्कृति मंच के सचिव दीपक लवंगडे, सतीश शर्मा एवं पवन शर्मा ने बताया की आज कश्मीर का रोफ डांस जो की फसल काटते समय खुशी में महिलाएं करती है जिसमें रंग बिरंगी फिरन पहनकर सर पर दुपट्टा डालकर खूबसूरत नृत्य प्रस्तुत किया गया। पंजाब का जिंदवा जिसमें देश में रहने वाली महिलाएं विदेश से अपने प्रीतम से अपने लिए पसंद की वस्तुएं लेकर आने को कहती है बोल है “जींदमाई जींद परियामे उद विदेश रेशमी नाडे” और साथ में प्रसिद्ध नृत्य भांगड़ा प्रस्तुत हुआ जिसमें खंडे, कलमुझी ,तुम्बी ढोल आदि की सहायता से शानदार नृत्य प्रस्तुत किया गया ।

विशाल गिद्वानी एवं संकल्प वर्मा ने बताया गुजरात का प्राचीन गरबा भी खूबसूरती के साथ प्रस्तुत हुआ ।डिंडोरी से आए कलाकार द्वारा धोती कुर्ता जैकेट पहनकर गोंड जनजाति का सेल नृत्य प्रस्तुत किया गया जो की दीपावली के दूसरे दिन गांव में किया जाता है। आंध्र प्रदेश का सीता राम लक्ष्मण की गाथा सुनाते हुए गाना गाकर पिरामिड बनाते हुए तमेटागुल्लु नृत्य प्रस्तुत किया गया वहीं कर्नाटक के कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुति दी यूनेस्को में दर्ज राजकोट का प्राचीन गरबा जिसमें घूम-घूम कर लड़कियां नृत्य करती है शानदार रहा भावनगर गुजरात से आए कलाकारों ने हाथ में घड़े लेकर गागर रास प्रस्तुत । नागपुर से आई ढोल ताशा पार्टी ने अपना अलग ही रंग जमाया। बैगा जनजाति ने करमा नृत्य प्रस्तुत करके दाद बटोरी।

मंच के बंटी गोयल निवेश शर्मा ने बताया कि स्थानीय कलाकारों में रौद्र से करुणा तक शिव दर्शन संध्या पंडित समूह, अष्ट मातृकाएं अंशिका पाठक द्वारा, एवं बसंत बहार फाग फुहार मयूरी डांस स्टूडियो द्वारा प्रस्तुत किया गया।

 

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