NEWS

श्याम बाबा ने हजारों दुखियारों के आंसू पोंछकर उन्हें संस्कारित समाज और समृद्ध राष्ट्र से जोड़ा

श्याम बाबा ने हजारों दुखियारों के आंसू पोंछकर उन्हें संस्कारित समाज और समृद्ध राष्ट्र से जोड़ा

अम्बिकापुरी स्थित खाटू श्याम मंदिर पर आज निर्जला एकादशी पर महायज्ञ में देंगे 108 नारियलों से आहुतियाँ – खाटू श्याम भागवत का हुआ समापन

इन्दौर। कलियुग में चाहे जितनी बुराइयाँ मानी गई हों, एकमात्र खाटू श्याम का नाम ही इतना चमत्कारी है कि उनकी शरण में पहुँचने वाला भक्त चाहे किसी भी धर्म, पन्थ या सम्प्रदाय का हो, अपने कष्टों और समस्याओं से मुक्ति भी प्राप्त कर लेता है और कलियुग की बुराइयों और व्यसनों से भी दूर हो जाता है। दुनिया में खाटू श्याम बाबा से जुड़े हजारों प्रसंग है जहाँ बाबा ने अपनी कृपा से अनेक दुखियारों के आंसू पोंछकर उन्हें संस्कारित समाज और समृद्ध राष्ट्र से जोड़ा है।

एयरपोर्ट रोड, अंबिकापुरी स्थित श्री खाटू श्याम धाम मंदिर के 29वें वार्षिकोत्सव में गत 20 जून से चल रही खाटू श्याम भागवत के समापन प्रसंग पर दिल्ली से आए भागवताचार्य पं. संजय प्रभाकर ने महामंडलेश्वर गोपालदास महाराज के सानिध्य में उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। बुधवार को कथा में बर्बरीक के शक्ति प्रदर्शन, श्रीकृष्ण द्वारा शीश छेदन, मस्तक पर अमृत सींचन, बर्बरीक के पुनर्जन्म, वरदान एवं बर्बरीक स्तुति जैसे पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से पं. संजय ने कहा कि खाटू श्याम बाबा को स्वयं भगवान श्रीकृष्ण की ओर से वरदान मिला हुआ है इसलिए पूरी दुनिया में श्याम बाबा के नाम और काम की महिमा बढती जा रही है।

कथा शुभारंभ के पूर्व महामंडलेश्वर गोपालदास महाराज के सानिध्य में समाजसेवी राधेश्याम शर्मा गुरूजी, बाबूलाल वर्मा, बाबूलाल अग्रवाल, बद्रीलाल कुमावत, सीताराम कुमावत, अशोक शर्मा, सुमन शर्मा, सुधीर कुमावत, नवीन कुमावत, उमेश यादव, रवि राठौर आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी संध्या गुप्ता, करुणा शर्मा, प्रिया सांखला, बृजबाला सोनी, अमृता राठौर, रिंकू गोयल, पिंकी राजोरिया, कुसुम लता सेन, प्रियंका परमार, हर्षा शर्मा, चिराग शर्मा, मनीष जैन, मोनू जैन, तेजल जायसवाल, नितिन बागड़ी, सोनू यादव, उदित ने की।

आज निर्जला एकादशी पर विशेष आहुतियाँ – महंत नीलू बाबा ने बताया कि महोत्सव का मुख्य आयोजन गुरुवार 25 जून को निर्जला एकादशी पर सुबह 8 से 10 बजे तक 108 श्रीफलों की आहुतियों के साथ होगा। मंदिर पर चल रहे खाटू श्याम महायज्ञ में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु आकर राष्ट्र में सुखद वर्षा, जन कल्याण एवं विश्व में शांति-सदभाव की कामना से आहुतियाँ समर्पित कर रहे हैं। दोपहर में महिला मंडल द्वारा भजन-संकीर्तन, शाम 5 से पुष्प श्रृंगार एवं 56 भोग, शाम 7 बजे श्याम बाबा पुष्प बंगले में विराजित होकर अपने भक्तों को दर्शन देंगे। महाआरती के बाद पवित्र ज्योत के दर्शन भी होंगे। महायज्ञ की पूर्णाहुति शुक्रवार 26 जून को सुबह 10 बजे होगी। दोपहर 3 बजे महिला मंडल की भजन प्रस्तुतियों के बाद शाम को भजन संध्या और रात 8 बजे से चलित भंडारा होगा।

 

*इसीलिए कहते हैं शीश का दानी और हारे का सहारा*

कथा में पं. संजय प्रभाकर ने कहा कि श्याम बाबा महाभारत के भीम के पुत्र घटोत्कच के पुत्र हैं। बर्बरीक को ही खाटू श्याम कहते हैं। बर्बरीक भगवान श्रीकृष्ण के बाद दुनिया के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर हैं। देवी की कृपा से बर्बरीक को तीन बाण मिले थे जिनसे वे कौरव-पांडव, दोनों को खत्म कर सकते थे। महाभारत युद्ध में बर्बरीक एक पीपल के पेड़ के नीचे खड़े हो गए और घोषणा की कि मैं हारने वाले पक्ष का साथ दूंगा।

श्रीकृष्ण बर्बरीक के तीरों की शक्ति जानते थे, इसलिए परीक्षा लेने हेतु उन्होंने वृक्ष के सारे पत्तों को एक ही तीर से छेदने की चुनौती दी। बर्बरीक ने सचमुच एक तीर छोड़ा तो सारे पत्ते जमीन पर आ गिरे। कृष्ण ने एक पत्ते पर अपना पैर रख दिया तो बर्बरीक ने कृष्ण से पैर हटाने का आग्रह किया। बर्बरीक के इस चमत्कार और धनुर्विद्या को कृष्ण समझ गए और ब्राह्मण का वेश बनाकर बर्बरीक के घर जा पहुंचे तथा बातों-बातों में बर्बरीक से दान में उनका शीश मांग लिया, क्योंकि कृष्ण जानते थे कि बर्बरीक हारने वाले अर्थात कौरवों का साथ देगा तो पांडव हार जाएँगे।

बर्बरीक ने अपने पितामह पांडवों की जीत के लिए स्वेच्छा से अपना शीश दान कर दिया इसीलिए उन्हें शीश का दानी और हारे का सहारा जैसे अलंकरण दिए गए हैं। भगवान कृष्ण ने इस बलिदान को देखकर ही बर्बरीक को कलियुग में स्वयं कृष्ण के नाम से पूजित होने का वरदान दिया है। जहाँ कृष्ण ने उनका शीश रखा वह जगह राजस्थान के सीकर जिले का खाटू गाँव है जहाँ आज भी दुनियाभर के करोड़ों श्याम भक्त आकर अपनी मन्नतें मांगते हैं और श्याम बाबा भी अपने भक्तों की हर समस्या का समाधान करते हैं।

 

Shares: