कांटाफोड़ शिव मंदिर से जुड़े 89 भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन हेतु प्रस्थित, रेलवे स्टेशन गूंजा जयघोष से
बालटाल एवं पंचतरणी में चल रही 24 घंटे लंगर सेवा में परोसेंगे मालवा के व्यंजन-आसपास के दर्शनीय स्थलों की यात्रा भी करेंगे
इंदौर। बाबा बर्फानी के दर्शन करने और अमरनाथ यात्रा मार्ग पर बालटाल एवं पंचतरणी में चल रहे शहर के नवलखा स्थित मनकामेश्वर कांटाफोड़ शिव मंदिर की लंगर सेवा में मदद के लिए मंदिर से जुड़े 101 श्रद्धालु सोमवार दोपहर इंदौर दिल्ली एक्सप्रेस से प्रस्थित हुए तो समूचा रेलवे स्टेशन परिसर बाबा बर्फानी के जयघोष से गूंज उठा। विधायक गोलू शुक्ला ने रेलवे स्टेशन पर सभी श्रद्धालुओं को विदाई दी। श्रद्धालु अपने साथ 10 किलो वजनी त्रिशूल भी लेकर गए हैं, जिसकी स्थापना गुफा स्थल पर की जाएगी। यह परंपरा वर्ष 2006 से चली आ रही है। इनके अलावा इस बार जत्थे के साथ मंदिर के 6 सेवादार एवं 6 रसोइये भी गए हैं, जो वहां पहुंचकर बाबा की गुफा के अंदर फूलों का श्रृंगार भी करेंगे, लंगर में इंदौरी व्यंजन भी बनाएँगे और रात्रिकालीन संकीर्तन में भी शामिल होंगे।
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विष्णु बिंदल, सुभाष गोयल बजरंग, टीकमचंद गर्ग एवं संयोजक बी.के. गोयल ने बताया कि अरमनाथ श्राईन बोर्ड द्वारा दूसरी बार मंदिर को लंगर सेवा के लिए सीधे अनुमति प्राप्त हुई है, फलस्वरूप पंचतरणी एवं बालटाल में खन्ना (पंजाब) के श्री बर्फानी सेवा दल के साथ गत 3 जुलाई से ही भव्य लंगर सेवा प्रारंभ हो गई है। शहर के व्यापारियों एवं जनभागीदारी के माध्यम से इन दोनों लंगरों के लिए बड़ी मात्रा में अनाज, खाद्य सामग्री, राशन एवं भोजन निर्माण में काम आने वाली 16 मी टन सामग्री ट्रक में भरकर भेजी जा चुकी है। यही नहीं, लंगर में मालवा क्षेत्र के करीब एक दर्जन रसोईए भी अपनी सेवाएं देकर देश-विदेश से आने वाले भक्तों को इंदौर के पोहे-जलेबी, कचोरी-समोसे, दाल-बाटी, चूरमा एवं अन्य परंपरागत व्यंजन भी परोस रहे हैं। इस बार लंगर स्थलों पर इंदौर एवं मालवांचल के भक्तों के लिए रात्रि विश्राम हेतु तीन दिनों तक रूकने एवं लंगर में सेवाएं देने हेतु सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। इंदौर से पहुंचे श्रद्धालु बारी-बारी से बाबा बर्फानी के दर्शन कर नीचे लौटकर लंगर में सेवाएं देने का सिलसिला जारी रखेंगे। आज गए श्रद्धालुओं के जत्थे की सारी व्यवस्थाएं संदीप गोयल, परमानन्द वालेचा, विजय काला, हेमंत गर्ग सेठानी, वरुण हरि मंगल, सुशील प्रजापति एवं आनंद शर्मा की देखरेख में संपन्न होगी। यह जत्था 16 जुलाई को इंदौर लौट आएगा।
अपनी इस यात्रा के दौरान मंदिर से जुड़े भक्तों ने करीब 10 किलो वजन का एक त्रिशूल भी तैयार किया है, जो वे साथ लेकर गए हैं। इस त्रिशूल की स्थापना बाबा बर्फानी के दरबार में की जाएगी। पिछले 18 वर्षों से मंदिर से जुड़े भक्त यह त्रिशूल बाबा बर्फानी को समर्पित कर उनसे इस अंचल में सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते आ रहे हैं। इस बार मंदिर के श्रद्धालु अमरनाथ गुफा के साथ ही वैष्णोदेवी, शिवखोड़ी, श्रीनगर एवं गुलमर्ग सहित जम्मू कश्मीर के अन्य दर्शनीय स्थलों की यात्रा भी करेंगे। इसके पूर्व 3 जुलाई को यात्रा के पहले दिन बालटाल एवं पंचतरणी में इंदौर के भक्तों द्वारा देश-विदेश से आए भक्तों को एक क्विंटल सूखे मेवे का प्रसाद भी वितरण किया गया। बालटाल और पंचतरणी में चल रहे लंगरों में प्रतिदिन 24 घंटे मालवा के व्यंजन हर 4 घंटे में बदल-बदलकर परोसे जा रहे हैं। यह सिलसिला यात्रा के समापन तक चलेगा।


