देश के सभी मंदिरो के नि:शुल्क दर्शन और मनसा पूजा का डिजिटल मंच ‘श्रीलोक’ लॉन्च
इंदौर के युवा शशि प्रकाश अग्रवाल का स्टार्टअप, घर बैठे देश के प्रमुख मंदिरों से जुड़ सकेंगे श्रद्धालु
इंदौर।अब मंदिर जाने के लिए लंबी कतार, घंटों का इंतजार या भीड़भाड़ वाली यात्रा जरूरी नहीं। इंदौर के युवा इंटरप्रेन्योर शशि प्रकाश अग्रवाल ने सनातन परंपरा और आधुनिक तकनीक को जोड़ते हुए ‘श्रीलोक’ नाम का नि:शुल्क डिजिटल पूजा मंच तैयार किया है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोग घर बैठे देश के प्रमुख मंदिरों के 3D दर्शन कर सकेंगे और मंत्रोच्चार के साथ मनसा पूजा से भी जुड़ सकेंगे। खास बात यह है कि श्रीलोक को सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए पूरी तरह नि:शुल्क रखा गया है। यह एप्लीकेशन हमेशा नि:शुल्क ही रहेगी।
इस बारे में जानकारी देते हुए शशि प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि देश के प्रमुख तीर्थस्थलों पर लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच यह पहल खास मायने रखती है। कई मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं, ट्रेनों और अन्य साधनों में जगह मिलना मुश्किल होता है और भीड़ के कारण धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी बनती है। ऐसे में बुजुर्गों, दिव्यांगों, अस्वस्थ लोगों और उन श्रद्धालुओं के लिए मंदिर पहुंचना आसान नहीं होता, जो देश-विदेश के अलग-अलग शहरों में रहते हैं। श्रीलोक का उद्देश्य ऐसे लोगों को घर बैठे मंदिर और पूजा से जोड़ना है। इस एप्लीकेशन से अयोध्या का मंदिर, वैष्णवदेवी मंदिर, बाके बिहारी मंदिर , मथुरा का द्धरकाधीश मंदिर , तिरुपति बालाजी, शिर्डीवाले सांई बाबा समेत दक्षिण भारत के तमाम ऐतेहासिक मंदिर जोडे गए है जो उपयोगकर्ता को वास्तविक मंदिर दर्शन का अहसास कराएगे।
श्रीलोक में श्रद्धालुओं को केवल मंदिर का 3D वीडियो देखने का अनुभव नहीं मिलेगा, बल्कि डिजिटल माध्यम से मंदिर के वातावरण और स्वरूप से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इसके साथ मंत्रोच्चार के बीच पूजा की प्रक्रिया को समझते हुए मनसा पूजा की जा सकेगी। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में मनसा पूजा का अर्थ मन, ध्यान, भावना और श्रद्धा के माध्यम से ईश्वर की आराधना से है। इसमें पंडितजी मंत्र पढेंगे, पूजा कराएगे, भोग लगवाएगें वो भी डिजीटली |
शशि प्रकाश अग्रवाल का कहना है कि श्रीलोक का उद्देश्य पारंपरिक मंदिर, पुजारी या प्रत्यक्ष तीर्थयात्रा का विकल्प बनना नहीं है। इसे उन लोगों तक भक्ति और सांस्कृतिक जुड़ाव पहुंचाने के माध्यम के रूप में विकसित किया गया है, जो किसी कारण से मंदिर नहीं जा पाते। तकनीक यहां साधन है, जबकि केंद्र में श्रद्धा, परंपरा और आध्यात्मिक अनुभव को रखा गया है।
इस अनूठी पहल के पीछे युवा उद्यमी शशि प्रकाश अग्रवाल की सोच है। उन्होंने आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से सनातन परंपराओं को नई पीढ़ी, परिवारों और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले भारतीयों तक पहुंचाने की दिशा में श्रीलोक को विकसित किया है।
शशि प्रकाश अग्रवाल को इस पहल की प्रेरणा अपने पिता राजीव प्रकाश अग्रवाल से मिली। राजीव प्रकाश अग्रवाल लंबे समय से ज्योतिष और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के क्षेत्र में सक्रिय हैं और ‘एस्ट्रोदुनिया’ के माध्यम से लोगों की जीवन से जुड़ी जिज्ञासाओं और आध्यात्मिक विषयों पर मार्गदर्शन देते हैं। पिता के इसी आध्यात्मिक अनुभव और मार्गदर्शन को शशि प्रकाश अग्रवाल ने आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर श्रीलोक को एक नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में आकार दिया है।
बुजुर्गों से लेकर विदेशों में रहने वाले भारतीयों तक के लिए उपयोगी श्रीलोक की परिकल्पना उन श्रद्धालुओं को ध्यान में रखकर की गई है जो उम्र, स्वास्थ्य, दूरी या व्यस्तता के कारण नियमित रूप से मंदिर नहीं जा पाते। विदेशों में रहने वाले भारतीयों, युवाओं और बच्चों के लिए भी यह भारतीय मंदिरों और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का एक नया माध्यम बन सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस डिजिटल मंच को नि:शुल्क रखा गया है, ताकि आर्थिक स्थिति किसी व्यक्ति के लिए भक्ति और सांस्कृतिक जुड़ाव में बाधा न बने। शशि प्रकाश अग्रवाल की यह पहल आने वाले समय में देश के विभिन्न मंदिरों और धार्मिक परंपराओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ने की दिशा में एक व्यापक मंच का रूप ले सकती है।


