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भगवान खजराना गणेश को रक्षाबंधन पर अर्पित होगी 40 इंच की भव्य ‘सनातन राखी’, ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पर आधारित है थीम

भगवान खजराना गणेश को रक्षाबंधन पर अर्पित होगी 40 इंच की भव्य ‘सनातन राखी’, ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पर आधारित है थीम

इंदौर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर खजराना गणेश मंदिर में इस वर्ष ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष ‘सनातन राखी’ अर्पित की जाएगी। मातश्री पालरेचा परिवार की ओर से 24वें वर्ष भी परंपरा को निभाते हुए 40 इंच बाय 40 इंच की भव्य और विहंगम राखी भगवान खजराना गणपति को भेंट की जाएगी।

राखी में समाहित हैं सनातन चेतना के प्रतीक
कमल पुष्प के आकार में आकार ले रही इस राखी में विभिन्न प्रमुख धार्मिक स्थलों और प्रतीकों को अंकित किया गया है:

भगवान जगन्नाथ भक्तों के प्रति अटूट आस्था और जागृत स्थल का प्रतीक।
बाबा महाकाल: आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर और महाकाल लोक के निर्माण के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की आस्था को समर्पित।
मां वाग्देवी (भोजशाला, धार): लंदन संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा की भोजशाला में पुन: पुनर्स्थापना के संकल्प के साथ।
महालक्ष्मी जी:देशवासियों की सुख, समृद्धि और संपन्नता की कामना हेतु।
महाकाली (कोलकाता):सनातन धर्म के प्रभाव और शक्ति के प्रतीक रूप में।

4 शहरों की सामग्री और ढाई महीने की मेहनत इस भव्य राखी को तैयार करने में कोलकाता, जयपुर, मुंबई और सूरत की विशेष सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है। सलमा-सितारे, नग-नगीने, मोती और जरदोजी के बारीक काम से सुसज्जित इस राखी को आकार देने में मातश्री पालरेचा परिवार के शांतु पुंडरीक पालरेचा, धीरज, जयेश, मितेश, नानेश, शैलेंद्र गुप्ता, नेहा, अंकिता, रिया, संदीपा, दीवीजा और जीविका पालरेचा सहित अन्य सदस्य बीते ढाई महीने से जुटे हुए हैं।

यहां भी अर्पित की जाएगी राखी खजराना गणेश के साथ ही यह विशेष राखी अलीजा सरकार (इंदौर), चिंतामन गणेश (उज्जैन), भगवान महाकाल (उज्जैन) और बड़े गणपति (इंदौर) को भी अर्पित की जाएगी।

23 वर्षों की गौरवशाली परंपरा विगत 23 वर्षों से पालरेचा परिवार विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व राष्ट्रीय संदेशों पर आधारित राखियां तैयार करता आ रहा है। इससे पूर्व गंगाजल, 12 ज्योतिर्लिंग, बेटी बचाओ, सत्यमेव जयते, भारतीय रुपया व वित्त, लड्डू राखी, शाकाहार संदेश, चार वेद, चार धाम, समुद्र मंथन और नवग्रह जैसी विषयों पर बनी राखियां भगवान को समर्पित की जा चुकी हैं।

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