Divinity

योगमाया है माँ नर्मदा, जिनकी तपस्य़ा से टूट गई थी भगवान शिव की योग मुद्रा

आदियोगी शिव जो कि हजारों वर्षों तक योग मुद्रा में लीन रहते है। उनके ध्यान को तोड़ना किसी के बस में नहीं है। उस योगनिंदा को तोड़ने के लिए वर्षों तक भगवान भी तपस्या भी करते है। ऐसे ही आदियोगी के तपस्या में लीन होने के बाद मां नर्मदा की उत्पत्ति हुई थी। जिसें शिव की पुत्री के नाम से जाना जाता है । मां नर्मदा भी योगमाया है इसके बारे में हमें बताया ओंकार पर्वत पर सांसारिक बंधनों से मुक्त रहने वाले संत श्री अखिलेश्वरानंद जी महाराज ने जिनसे मिलना मां नर्मदा की कृपा ही थी, हम उनसे मिल पाए जो स्वयं भी मां नर्मदा के असीम भक्त है। जों मां नर्मदा को योगमाया मानते है। मां नर्मदा के किनारे ही रहते है और मां नर्मदा की तीन बार परिक्रमा कर चुके है।

मां नर्मदा प्रकट हो कर बैठ गई
स्वामी अखिलेश्वरानंद जी महाराज ने मां नर्मदा के बारे में बताते हुए कहा कि जब शिव बाब तपस्या में लीन थे तो उनके योग के पसीने से एक सरोवर भर गया। उस सरोवर में से मां नर्मदा प्रकृट तो हो गई लेकिन वह प्रकृट होने के बाद भगवान शिव के निकट ही योगमुद्रा लगा कर बैठ गई। क्योकि उस समय वह स्वयं नहीं जानती थी कि वह कौन है? तब योगमाया मां नर्मदा ने शिवजी से पूछा कि वह कौन है लेकिन भगवान शिव योगमुद्रा में लीन थे वह आवाज से तो जागने वाले थे नहीं तब मां नर्मदा भी शिव के निकट ही तपस्या में लीन हो गई।

मां नर्मदा ने प्रकृट होते ही हजारो वर्षों तक तपस्या की उनकी तपस्या का प्रभाव इतना था कि उनकी तपस्या से भगवान शिव की योगनिंद्रा भंग हो गई। जैसे ही वह योगमुद्रा से जागे तो उन्होने मां नर्मदा को देखा भगवान शिव सें उन्होने पूछा कि मैं कौन हूं तो भगवान शिव ने उन्हें बताया कि वह उनकी पुत्री है तब उन्होने अपना नाम पूछा और भगवान शिव ने उनका नाम नर्मदा रखा जो सदैव अमर रहेगी। वह इसके उन्होने भगवान शिव से अपना कार्य पूछा तो उन्होने संसार के पाप मिटाने वाली मोक्षदायी मां नमर्दा को पृथ्वी पर भेज दिया।

अलौकिक शक्ति है मां नर्मदा
मां नर्मदा अलौकिक शक्ति से सभी दुखों को हर लेती हैं, पवित्रता का प्रतीक हैं, वह अक्षय पुण्यदायिनी हैं, जो भक्तों को सभी दोषों से मुक्ति दिलाती हैं। नर्मदा में भगवान शिव की शक्ति समाहित है और वह योगमाया के रूप में पूजनीय हैं। मां योगमाया हैं जो सांसारिक बंधनों से मुक्ति दिलाती हैं। मां नर्मदा आद्यशक्ति का स्वरूप है। जो मोक्षदायिनी है।

संसार से विरक्त है यह संत
स्वामी अखिलेश्वरानंद जी महाराज एक ऐसे संत है जिन्होने हिमालय पर तपस्य़ा की है इसके बाद मां नर्मदा के किनारे मां के निकट रहते है। यह संसार से विरक्त है। जो स्वयं भी भगवान के ध्यान में लीन रहते है और ओंकारेश्वर बाबा की आराधना में लीन रहते है। जिनसे मिलने वैसे तो अदृष्य रूप से कई शक्तियां आती है। उनका ध्यान और वैराग्य रूप हमने अपनी आंखों से देखा है जिसे शब्दों में व्यक्त करना असंभव है।

 

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