अब कमाई और पानी की बचत का जरिया बनेगी पराली
भुवनेश्वर । शायद ये अब बीते दिनों की बात हो जाए धान उत्पादक किसानों पर पराली जलाने और दिल्ली व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ाने के आरोप लगते थे। अब तक जिस पराली के धुएं से दिल्ली की हवा जहरीली होने के आरोप लगते रहे हैं, अब वो किसानों के लिये वरदान साबित हो सकती है। अब वैज्ञानिकों के प्रयास से हुई खोज के बाद पराली को जलाए बिना उसी खेत में आलू उगाये जा सकेंगे। इससे न केवल प्रदूषण संकट खत्म होगा, साथ ही पानी की बचत भी की जा सकेगी।
यह विडंबना ही रही है कि जब भी धान की फसल लहलहाकर किसान व देश के लिए खुशा का सबब बनती है, उसके तुरंत बाद पराली को ठिकाने लगाने का संकट सामने आ जाता है। दरअशल, किसान चिंता होती है अगली फसल की तैयारी की। उसके सामने चुनौती होती है पराली को हटाकर नये सिरे से खेत तैयार करने की। जब उत्तर प्रदेश, पंजाब- हरियाणा व अन्य राज्यों में किसान कोई कारगर विकल्प न मिलने पर पराली जलाता है तो उस पर आबोहवा प्रदूषित करने का आरोप लगता है। अब पराली को ठिकाने लगाने के अन्य तमाम व्यावहारिक व अव्यवहारिक उपायों के बीच कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिये नई उम्मीद जगायी है।आईसीएआर के सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर वूमेन इन एग्रीकल्चर, भुवनेश्वर के कृषि वैज्ञानिक सुकांता षडंगी ने शोध के जरिये निष्कर्ष दिया है कि किसान पराली वाले खेत में आलू की फसल उगाकर न केवल पराली का निस्तारण कर सकता है, बल्कि इससे खेत में पर्याप्त नमी बने रहने से पानी की खपत को भी कम कर सकता है। केंद्रीय कृषिरत महिला संस्थान के विशेषज्ञ डॉक्टर सुकांता का दावा है कि पराली में उगाया गया आलू बिना स्प्रे से भी 4 से 6 महीने खराब नहीं होता।
दरअसल, आईसीएआर के सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर वूमेन इन एग्रीकल्चर, भुवनेश्वर के कृषि वैज्ञानिक सुकांता षडंगी के शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि यदि इस खोज को देश के विभिन्न राज्यों की सरकारें अनुपालन करने के लिये किसानों को प्रेरित करती हैं तो उन पर स्मॉग फैलाने के आरोप लगने बंद हो जाएंगे। हालांकि, अभी बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं कि प्रदूषण बढ़ाने में पराली जलाने का कितना रोल है, लेकिन हर बार नवंबर-दिसंबर की शुरुआत में जब मौसम के बदलाव व भौगोलिक कारणों से प्रदूषण घातक रूप लेता है तो किसानों पर आक्षेप लगने लगते हैं।
यह सुखद ही है कि अब नई खोज से न केवल पराली टेंशन खत्म होगी बल्कि अब बोनस के रूप में आलू की नकद फसल का इंतजाम भी हो सकेगा। दरअसल, इन नई खोज में किसान पराली को हटाए बिना खेत में आलू की फसल उगा सकते हैं। पीआईबी चंडीगढ़ के निदेशक प्रीतम सिंह नेगी बताते हैं कि इससे जहां किसान की पैदावार में पच्चीस से पचास प्रतिशत की वृद्धि होगी, वहीं आलू खेती में पचास फीसदी की पानी की बचत हो सकेगी। दरअसल, पराली की वजह से पानी का वाष्पन कम होगा। पराली के नीचे उगने वाले आलू को अधिक नमी मिलेगी।


