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अपने प्रत्येक कर्म में पूर्वजों के प्रति तर्पण के साथ अर्पण और समर्पण का भाव भी रखें-महंत पवनदास 

अपने प्रत्येक कर्म में पूर्वजों के प्रति तर्पण के साथ अर्पण और समर्पण का भाव भी रखें-महंत पवनदास

हंसदास मठ पर निशुल्क तर्पण में सांसद शंकर लालवानी भी हुए शामिल – डेढ़ हजार से अधिक साधकों ने दो परियों में किया तर्पण – भागवताचार्य प. पुष्पानंदन पवन तिवारी का सम्मान

इंदौर। भारतीय संस्कृति सात जन्मों तक पुनर्जन्म में विश्वास रखती हैं। हमारे कर्मों के आधार पर ही मोक्ष की मंजिल तय होगी। भविष्य को संवारने के लिए वर्तमान में अपने प्रत्येक कर्म में अर्पण और समर्पण का भाव भी रखें, यही सबसे बड़ा तर्पण होगा। प्रसन्नता और शांति बाजार में नहीं मिलते। तर्पण हमारी श्रद्धा को व्यक्त करने का शास्त्रोक्त उपाय है जो स्वंय हमें भी मोक्ष की मंजिल तक ले जाता है। तर्पण में श्रद्धा के साथ अर्पण और समर्पण का भाव भी होना चाहिए।

ये दिव्य विचार हैं हंसदास मठ के महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज के, जो उन्होंने एयरपोर्ट रोड स्थित हंसदास मठ पर श्रद्धा सुमन सेवा समिति की मेजबानी में आश्रम के अधिष्ठाता श्रीमहंत रामचरणदास महाराज के सानिध्य एवं प्रख्यात भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी के निर्देशन में चल रहे 15 दिवसीय निशुल्क तर्पण अनुष्ठान के समापन तथा सर्वपितृ अमावस्या के उपलक्ष्य में आयोजित तर्पण अनुष्ठान में व्यक्त किए।

इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी ने भी अपने सभी पूर्वजों, देश और प्रदेश के दिवंगत शासकों एवं अयोध्या में राम मंदिर के कारसेवकों के लिए तर्पण विधि सम्पन्न की। महामंडलेश्वर स्वामी नवनीतदास महाराज के सानिध्य, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता एवं पूर्व पार्षद दीपक जैन टीनू, सत्यनारायण सलवाडिया, चंद्रप्रकाश गुप्ता एवं अशोक गोयल के आतिथ्य में भगवान हरि विष्णु के पूजन के साथ अनुष्ठान का शुभारंभ किया। शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या पर सुबह 7 बजे से ही साधकों का आगमन शुरू हो गया था। साधकों की विशाल संख्या को देखते हुए समिति की ओर से दो पारियों में तर्पण की व्यवस्था की गई, जिसमें डेढ़ हजार से अधिक साधकों ने भाग लिया। आयोजन समिति की ओर से अध्यक्ष हरि अग्रवाल, राजेन्द्र सोनी, राजेन्द्र गर्ग, डॉ. चेतन सेठिया, मुरलीधर धामानी, सूरजसिंह राठौड़, हनुमानप्रसाद सारड़ीवाल, जगमोहन वर्मा, सीए सीताराम सोनी तथा मातृशक्ति की ओर से सुश्री किरण ओझा, गीता शर्मा, पुष्पा यादव, राजकुमारी मिश्रा, लता सोनी, मंजू सोनी आदि ने अतिथियों एवं संतों का स्वागत किया।

महामंडलेश्वर स्वामी रामचरणदास महाराज ने कहा कि तर्पण किसी एक दिन अथवा श्राद्ध पक्ष में ही नहीं, बल्कि हर दिन होना चाहिए। हम अपने पूर्वजों को जब तक याद रखेंगे, उनके शुभाशीष हमारे साथ जुड़े रहेंगे। जिस तरह हम अपने प्रत्येक कर्म को ईश्वर को समर्पित करते हैं, उसी तरह यदि अपने पूर्वजों को भी कर्मों का समर्पण करते रहें तो जीवन में कभी भी दुखी नहीं रहेंगे। अपनी नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना है तो उन्हें तर्पण और श्राद्ध पक्ष का महत्व बताना चाहिए। इस अवसर पर भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी का आयोजन समिति की ओर से सभी पदाधिकारियों ने शाल-श्रीफल एवं साफा बांधकर सम्मान किया गया। संचालन राजेन्द्र सोनी एवं मुरलीधर धामनी ने किया और अंत में आभार माना हरि अग्रवाल ने।

 

 

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