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BJYM- का प्रदर्शन या भिड़ंत! इंदौर में कांग्रेस कायकर्ता भिड़े, पथराव में फूटे सिर तो भोपाल में खूनी संघर्ष

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल  और आर्थिक राजधानी इंदौर में शनिवार को सियासत सड़क पर उतर आई। इंदौर शहर के गांधी भवन के बाहर भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। विरोध-प्रदर्शन कुछ ही देर में उग्र टकराव में बदल गया और इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया।
बोतल, टमाटर और पत्थर तक चले
टकराव भिंड़त तक पहुंच गया यहां पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच बैरिकेडिंग कर आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों का गुस्सा थमता नहीं दिखा। दोनों ओर से पानी की बोतलें, तेल की थैलियां, पत्थर, यहां तक कि संतरे और टमाटर भी फेंके गए। इसी बीच एक पत्थर सिर पर लगने से कांग्रेस जिलाध्यक्ष विपिन वानखेड़े घायल हो गए। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को भीड़ तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का सहारा लेना पड़ा। फिलहाल क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर स्थिति पर नजर

पीसीसी में तोड़फोड़
राजधानी भोपाल में राजनीतिक सरगर्मी उस वक्त हिंसक हो गई, जब कांग्रेस पार्टी के प्रदेश कार्यालय शिवाजी नगर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की। यह राजनीतिक विरोध देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया।

टुटी नाक की हड्डी और फूटा सिर
दोनों ओर से हुए पथराव में भारी नुकसान हुआ है। इस हिंसा में भाजयुमो के जिला मंत्री मोहित अग्निहोत्री की नाक की हड्डी टूट गई है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस जिला अध्यक्ष (ग्रामीण) गोपिल कोतवाल के सिर पर गंभीर चोट आई है, जिसके चलते उन्हें आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया है। घटना में दोनों दलों के लगभग आधा दर्जन अन्य कार्यकर्ता भी घायल हुए हैं।

अर्धनग्न प्रदर्शन के विरोध में भिड़त
जानकारी के अनुसार, दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए अर्धनग्न प्रदर्शन के विरोध में भाजयुमो कार्यकर्ता गांधी भवन स्थित कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने पहुंचे थे। पहले से मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया, जिससे विवाद बढ़ गया।

हमले की निंदा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र पर प्रहार बताया है। वहीं यह चिंतनिय है कि विरोध में हिंसा राजनीति की बिगड़ती छबि का नतीजा है । जहां एक और भाजपा के संगठन अनुशासन भूल गए है तो यहीं कांग्रेस शांतिपूर्ण प्रदर्शन और गांधी के सिंद्धांत भूल गई है। यह राजनीति के गिरते स्तर का नतीजा है।

 

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