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भगवान कृष्ण के श्राप का प्रायश्चित करने के लिए आज तक अश्वत्थामा कर रहा है मां नर्मदा की परिक्रमा

अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं अश्वत्थामा। महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक अश्वत्थामा, ये कौरवों व पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र थे। हनुमानजी आदि आठ अमर लोगों
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हरिहाट 2025: इंदौर में सजेगा विश्व का एकमात्र ‘भक्ति का मेला’, 28 को गोंदवले धाम अवश्य पधारे

इंदौर( पायल पांचाल) मेले तो आप सभी ने देखे है, पर ऐसा मेला ना आपने कही देखा होगा, ना कभी इस मेले के बारे मे सुना होगा। और ये मेला 
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“पुराण” में मिलता है हिंदू धर्म, संस्कृति और सभ्यता का विस्तृत वर्णन

सष्टि की उत्पत्ति से ही संसार में धर्म और संस्कृति के बारे में हमें जिन ग्रंथो से जानकारी मिलती है वह है पुराण, पुराण का अर्थ है प्राचीन आख्यान’ या
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सोना-चांदी छोड़ “श्रीनाथ जी” आज लगा मिट्टी के बर्तन में भोग

विश्व प्रसिद्ध श्रीनाथ मंदिर नाथद्वारा में विशेष पुण्यदायी महिनों में कई तरह के मनोरथ होते है। जिनका उद्देश्य भगवान श्रीनाथ जी को रिझाना है। भक्तों के द्वारा की गई तरह-तरह
Narmada

मां नर्मदा की परिक्रमा पर निकले सीएम डॉ मोहन यादव के छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव और डॉ इशिता

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव और डॉ इशिता नर्मदा परिक्रमा पर निकले हैं। यह देश में पहला मामला है जब किसी सीएम के
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विश्व के दो ऐसे लोग जिन्हें मिली दिव्य दृष्टि, 2026 में भी क्या सच होगी उनकी भविष्यवाणी!

भारत को दिव्यभूमि माना जाता है। जहां पर धर्म और ज्योतिषशास्त्र को माना जाता है और आज भी भारत देश में भविष्य जानने की इच्छा हर एक व्यक्ति में होती
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दक्षिण का कैलाश है यह ज्योतिर्लिंग… जहां विराजते है भगवान शिव के साथ माता पार्वती

“दक्षिण का कैलाश" कहा जाने वाला यह ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग है, जो आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर एक पहाड़ी पर स्थित है।, जहाँ भगवान शिव (अर्जुन) माता
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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग- हिन्दू धर्म के उत्थान-पतन का प्रतीक है यह मंदिर

सोमनाथ मंदिर को 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि सोमराज (चंद्रदेव) ने सबसे पहले सोमनाथ में सोने का मंदिर बनवाया था। जिसे बाद
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आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ जो जगा रहे हिंदू एकता का अलख

आदि शंकराचार्य ने भारत की चारों दिशाओं में चार प्रमुख मठों (पीठों) की स्थापना की और अपने शिष्यों को इनकी जिम्मेदारी सौंपी, जिससे शंकराचार्य परंपरा शुरू हुई। वर्तमान में धार्मिक
Eternal Hinduism

लौकिक और पारलौकिक दुनिया का सिद्धांत, यहां देने से घटता है वहां पर भरते है भंडार

इस दुनिया में सफलता पाने के लिए अथवा परलोक संवारने के लिए अगर आप देने और लेने का सिद्धान्त समझ गए तो आपको लोक-परलोक सहित इस ब्रह्माण्ड का एक सबसे