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हैं महाकाल! आमजन कभी नहीं कर पाएंगा गर्भगृह में प्रवेश? VIP दर्शन पर रोक की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

उज्जैन में स्थित विश्वप्रसिद्ध महाकाल के निकट अब शायद कभी भी आमजन नहीं पहुंच पाएंगा। मंदिर प्रशासक ने महाकाल को आमजन से दूर कर दिया है। अब भगवान महाकाल भी सिर्फ वीआईपी लोगों को ही अपने निकट बुलाएंगे। आम आदमी कभी भी महाकाल के निकट तक नहीं पहुंच पाएंगा। महाकाल शिवलिंग को स्पर्श करना और जलाभिषेक करने का अधिकार अब वीआईपी लोगों को ही रह गया है। यह भारत में समान अधिकार के नियमों की खुली धज्जियां है।

अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करने की लगी थी याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर में कौन प्रवेश करेगा, यह तय करना अदालत का काम नहीं है। याचिकाकर्ता ने गर्भगृह में वीआईपी और आम जनता के लिए अलग नियमों को अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया था। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने की लंबे समय से मांग हो रही है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि किसी भी मंदिर में वीआईपी दर्शन होंगे या नहीं, इसका फैसला करने का अधिकार अदालत को नहीं है। इस तरह की याचिका को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

3 जजों की बेंच ने की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने ये फैसला सुनाया है। जस्टिस महादेवन और जस्टिस जॉयमाला बागची भी इस बेंच का हिस्सा थे। याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी याचिका दायर करते हुए वीआपी दर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी। मगर, हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

वीआईपी को गर्भगृह में प्रवेश क्यों?
कोर्ट में याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि गर्भगृह में सभी के लिए नियम समान होने चाहिए। उन्होंने कहा, “ये अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। गर्भगृह में जाने के नियम सभी के लिए बराबर होने चाहिए। वीआईपी दर्शन के नाम पर नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है। अगर कोई वीआईपी व्यक्ति कलेक्टर के आदेश में गर्भगृह में जाता है, तो आम जनता को भी ये अधिकार मिलना चाहिए।”

कार्ट का भार बढ़ जाएंगा
सीजेआय ने सूर्यकांत ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, “गर्भगृह में किसे जाना चाहिए और किसे नहीं, इसका फैसला अदालत नहीं कर सकती है। हम न्याय की बात कर रहे हैं। हो सकता है ये न्याय का मामला हो, लेकिन इसपर जिम्मेदार लोग ही फैसला ले सकते हैं, न कि अदालत। अगर अदालत ये तय करने लगे कि मंदिर में कौन जाएगा और कौन नहीं, तो कोर्ट का भार बहुत बढ़ जाएगा।”

सीजेआय सूर्यकांत ने कहा कि
अगर अनुच्छे 14 की बात हो रही है, तो कल अनुच्छेद 19 की भी मांग होगी। अभी आप गर्भगृह में जाने का अधिकार मांग रहे हैं, कल कहेंगे कि मुझे मंत्र पढ़ना है, क्योंकि अनुच्छेद 19 के तहत हमारे पास बोलने का अधिकार है।

 

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