social organization

इंदौर में रिश्तों का महाकुंभ- 38वें हिंदू सर्वजातीय परिचय सम्मेलन में 30 जीवनसाथी मिले

इंदौर(विनोद गोयल)। रिश्तों की तलाश में जुटे सैकड़ों दिलों के बीच उम्मीदों का एक अनोखा संगम उस समय देखने को मिला, जब संचार नगर स्थित आर्य समाज मंदिर में आयोजित 38वें हिंदू सर्वजातीय परिचय सम्मेलन में करीब 30 रिश्ते तय हो गए। वैदिक मंत्रों की पावन गूंज के साथ शुरू हुए इस आयोजन ने न केवल परंपराओं को जीवंत किया, बल्कि समाज में बदलती सोच की नई मिसाल भी पेश की।

युवाओं ने अंतरजातीय विवाह में खुलकर रुचि दिखाई
आर्य समाज संचार नगर इंदौर एवं गुरु विरजानंद वैदिक ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन की शुरुआत गुरु विरजानंद वैदिक गुरुकुल के ब्रह्मचारियों द्वारा किए गए वैदिक मंगलाचरण से हुई। जैसे ही मंच सजा, वैसे ही जीवनसाथी की तलाश में आए लगभग 250 प्रत्याशियों ने एक-एक कर अपने परिचय दिए। इनमें अविवाहित, विधवा, विधुर, तलाकशुदा, अधिक आयु के और दिव्यांग भी शामिल रहे। खास बात यह रही कि यहां जाति-पाति की दीवारें टूटती नजर आईं और कई युवाओं ने अंतरजातीय विवाह में खुलकर रुचि दिखाई।

कार्यक्रम में शामिल हुईं श्रीमती गायत्री सोलंकी ने बताया कि मंच पर परिचय देने वाली युवतियों को प्रोत्साहन स्वरूप सर्वजातीय परिणय स्मारिका निशुल्क भेंट की गई, जिससे उनके उत्साह में और वृद्धि हुई।

यह आयोजन केवल इंदौर तक सीमित नहीं रहा
मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और बिहार से भी बड़ी संख्या में प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। मीडिया प्रभारी राकेश शास्त्री ने जानकारी दी कि इस पुनीत परंपरा की शुरुआत वर्ष 2004 में श्री बलराज सबलोक जी की प्रेरणा और सहयोग से हुई थी, जिसे डॉ. आचार्य भानु प्रताप वेदालंकार ने आगे बढ़ाते हुए इंदौर, ग्वालियर और दिल्ली तक विस्तार दिया।

विवाह गुण, कर्म व स्वभाव के आधार पर होना चाहिए
मुख्य अतिथि  कैलाश खंडेलवाल ने अपने संबोधन में कहा कि आचार्य वेदालंकार के अथक प्रयासों से आज यह आयोजन केवल परिचय सम्मेलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निशुल्क दिव्यांग परिचय सम्मेलन और सामूहिक विवाह जैसे सामाजिक कार्यों का भी स्वरूप ले चुका है। वहीं कैलाश योगी ने महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों को याद दिलाते हुए कहा कि “मनुष्य की एक ही जाति है, और विवाह गुण, कर्म व स्वभाव के आधार पर होना चाहिए।”
जिन प्रत्याशियों से यह अवसर छूट गया है, उनके लिए भी दरवाजे खुले हैं। वे आर्य समाज मंदिर, संचार नगर, कनाड़िया रोड, इंदौर में संपर्क कर आगामी आयोजनों का हिस्सा बन सकते हैं। इस सम्मेलन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब सोच बदलती है, तो रिश्ते सिर्फ तय नहीं होते।

Shares:
Leave a Reply