जिस दिन मन में किसी को नहीं मार सकने का भाव आ जाएगा, उस दिन दुनिया की कोई ताकत हमें मार नहीं सकेगी – राष्ट्रसंत सुधासागर म.सा.
दलाल बाग में चल रहे चातुर्मास की विशाल धर्मसभा में प्रेरक आशीर्वचन, उमड़ रहा देशभर से आए साधकों का सैलाब, कल होगी स्पर्धा
इंदौर। जिस दिन हमारे मन में यह भाव आ जाएगा कि मैं किसी को मार नहीं सकता, तो मैं आपको यह विश्वास दिलाता हूँ कि उस दिन दुनिया की कोई ताकत आपको मार नहीं सकेगी। यह डर खत्म होते ही उसी दिन से आपके कल्याण का मार्ग खुल जाएगा। जिस दिन हम बोलेंगे कि मैं अधर्मी हूँ और धर्मात्मा बनना चाहता हूँ तो यहीं से पुण्य कर्मों की शुरुआत हो जाएगी। स्वयं को बुरा बोलना सीखो। रावण ने जिन्दगी में कभी भी भगवान के दर्शन किए बिना भोजन नहीं किया। उसका कठिन नियम और साधना थी फिर भी वह नर्क गया क्योंकि उसने अपनी जिन्दगी में स्वयं को कभी पापी नहीं माना। उसने बड़े-बड़े पाप किए फिर भी उसे यह अहंकार था कि मैं पापी नहीं हूँ, मैं ही सही हूँ। बस, यही भेद है राम और रावण में। जितना-जितना कठोर शब्द हमें बुरा लगता जाएगा, उतना-उतना पुण्य की क्लास से हम बाहर होते जाएँगे। अपने चहेते व्यक्ति को दुखी करना बहुत गलत है। भगवान के सामने बस यही कहो कि मैं भाग्यशाली हूँ कि मुझे आपके दर्शन का लाभ मिला। भगवान को आपके दुःख बताने की जरूरत नहीं, उनको सब पता है।
ये दिव्य और प्रेरक आशीर्वचन हैं संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज के, जो उन्होंने शुक्रवार को सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में दलाल बाग के विशाल विद्या-सुधा सत्संग मंडप में चल रहे चातुर्मास की महती धर्मसभा में उपस्थित समाज बंधुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। प्रवचन शुभारम्भ के पूर्व मंगलाचरण सीमा जैन ने किया। राजेश-संगीता काला और निलेश जैन लोहारीवाला परिवार ने पाद प्रक्षालन का लाभ लिया। दीप प्रज्वलन प्रमोद-मंजू जैन, अशोक पोटलिया, अनिल-सुनिता जैन परिवार ने किया। मंच का संचालन दिगम्बर जैन सामाजिक संघ के अध्यक्ष आनंद गोधा और समिति की ओर से अशोक-रानी डोसी ने किया। आभार माना महामंत्री हर्ष जैन ने।
राष्ट्रसंत ने अपने आशीर्वचन में कहा कि मंदिर बनाने से भगवान को कोई लाभ नहीं होता लेकिन भक्त को जरुर होता है। संसार में ऐसे अनेक कार्य हैं जिनके करने से स्वयं को नहीं, दूसरों को लाभ मिलता है। गुरु की सेवा करते हैं तो गुरु को नहीं, सेवा करने वाले को लाभ मिलता है। किसी मुनि को आहार कराते हैं तो उसका फल मुनि को नहीं, आहार कराने वालों को मिलता है। प्रवचन सुनाना घाटे का काम है लेकिन सुनना फायदे का। दूसरे का मुंह काला करने के पहले स्वयं के हाथ काले करना होते हैं इसलिए यह जरुर सोच लें कि मैं यदि दूसरों के लिए बुरा सोच रहा हूँ तो यही मिथ्या दृष्टि है।
प.पू. मुनिश्री सुधासागर म.सा. ने कहा कि याद रखें कि किसी को मिटाने का भाव रखने वाले व्यक्ति का नहीं, सिर्फ मिटने वाले व्यक्ति का ही कल्याण संभव है। दुःख वाले दिनों को हंसते-हंसते बिताना चाहिए। उपवास के दिन भूखे रहकर खुश रहेंगे तो आनंद आएगा, खा-पीकर तो दुनिया हंसती है। मन चंचल नहीं होना चाहिए। मन्दिर जाने का काम सुख के दिनों में होना चाहिए और दुःख के दिनों में किसी गार्डन की सैर करें। सुख के दिनों में मन्दिर जाने से सुख बढेगा और सुख के दिनों में गार्डन जाएँगे तो सुख घटेगा। हम बड़ों को देखकर रो-रोकर अपना दुःख सुनाते हैं जबकि भगवान राम ने संजीवनी लेने जा रहे हनुमान से कहा था कि मेरे दुःख की बात अयोध्या में किसी को मत बताना। रामजी के इस कथन में यह सन्देश मौजूद है कि अपने दुःख और अपनी परेशानी दूसरों को बताकर उन्हें दुखी नहीं करना चाहिए।
‘सुधा का सागर’ पर आधारित परीक्षा कल – सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा ने बताया कि रविवार 9 अगस्त को ‘सुधा का सागर’ पुस्तक पर आधारित रोचक प्रश्नोत्तरी स्पर्धा का आयोजन वरणीश्री गंभीर सागर म.सा. के निर्देशन में दलाल बाग पर होगा, जिसमें 5 से 16 वर्ष तक की आयु के बच्चे और 70 से 80 वर्ष तक आयु के प्रतिभागी अलग-अलग श्रेणी में भाग ले सकेंगे। चातुर्मास समिति के प्रमुख नवीन गोधा, हर्ष जैन, आकाश कोयला ने बताया कि स्पर्धा को लेकर समाज बंधुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार भी प्रदान किए जाएँगे। चातुर्मास के दौरान दलाल बाग पर प्रतिदिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक धर्मसभा में राष्ट्रसंत सहित सभी संत विद्वानों के प्रवचनों की अमृत वर्षा होगी। चातुर्मास के दौरान विभिन्न अनुष्ठान भी
होंगे।


