म्हारो मालवा की अभूतपूर्व प्रस्तुति – बरेदी ,गणगौर ,गुडूम बाजा ने जमाया रंग
2 मई मालवा उत्सव का समापन दिवस
इंदौर । लोक संस्कृति मंच और मालवा उत्सव लोक कलाकारों के पांव मंच की साज सज्जा देखकर अपने आप ही थिरकने लग जाते हैं ।रजत जयंती वर्ष की बात हो तो मालवा उत्सव मे मालवा की ही बात होना चाहिए लेकिन इस मंच ने देश के सभी राज्यों के लोक कलाकारों को अपने यहां पर अपनी संस्कृति अपनी विविधता अपनी लोक कला की छठा बिखरने का मौका दिया है ।तो आज भी इस ऐतिहासिक पल को साझा करने के लिए 250 कलाकारों ने संपूर्ण देश की लोक कला एवं संस्कृति को एक साथ मंच पर प्रस्तुत किया ।
लोक संस्कृति मंच के संयोजक एवं इंदौर के लोकप्रिय सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि नगर निगम एवं संस्कृति संचनालय के सहयोग से आयोजित यह सफर गांधी हॉल से शुरू होकर लालबाग होता हुआ दशहरा मैदान पहुंचा है आज 25 वा वर्ष है इस हेतु “म्हारो मालवा” विशेष प्रस्तुति जिसमें 25 राज्यों के प्रतिनिधि कलाकारों ने अलग-अलग राज्यों की लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत दिखाई। लगभग 250 कलाकारों ने इस मंच पर अपनी प्रस्तुति देते हुए मालवा उत्सव की यात्रा को एक अनुपम रूप दिया और दर्शकों को इस पल को अपनी आंखों में कैद करने का मौका दिया। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, पंजाब, कश्मीर ,महाराष्ट्र, तेलंगाना ,आंध्र प्रदेश ,कर्नाटक, केरल, तमिल नाडु ,उत्तराखंड ,हिमाचल, मणिपुर ,सिक्किम सहित सभी राज्यों के लोक नृत्य की विरासत देखने को मिली।
लोक संस्कृति मंच के सचिव दीपक लवंगड़े एवं कपिल जैन ने बताया कि आज 25 वर्ष पूर्ण होने पर भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा मालवा उत्सव पर डाक कवर जारी कर रहा है यह मालवा और इंदौर के लिए सौभाग्य की बात है। यह डाक कवर पूरे भारतवर्ष में अनेक म्यूजियम में रखा जाता है साथ ही विदेशों में कल्चरल एक्सचेंज के तहत दिया जाता है और देश में डाक संग्रहण करने वाले भी इसे ले सकते हैं इसे जारी करने के लिए सांसद शंकर लालवानी महापौर पुष्यमित्र भार्गव पोस्टमास्टर जनरल श्री गौरव श्रीवास्तव प्रवर अधीक्षक डाकघर इंदौर नगर इंदौर संभाग श्री अजय जी सहायक निदेशक ओम प्रकाश चौहान भी मौजूद थे।
लोक संस्कृति मंच के सतीश शर्मा एवं विशाल गिद्वानी ने बताया कि मालवा उत्सव मे कर्नाटक से आए लोक कलाकारो ने भगवान शिव की आराधना में किया जाने वाला डांस बीजू कंसले प्रस्तुत किया। गुजरात का प्रसिद्ध राजकोट से आए कलाकारों ने हुडा रास प्रस्तुत किया करने भावनगर से आए कलाकारों द्वारा टिप्पणी नृत्य प्रस्तुत किया गया जिसमें हाथ में कूटने का लकड़ी लेकर अनाज कूटते हुए लड़कियां दिखाई दी। यादव समाज द्वारा किया जाने वाला श्री कृष्ण की आराधना के लिए बरेदी नृत्य सागर से आई टीम ने प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने कई तरह के पिरामिड बनाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। निमाड़ का प्रसिद्ध नृत्य गणगौर भी प्रस्तुत हुआ जिसमें माथे पर गणगौर लेकर संजय महाजन की टीम ने नृत्य किया। साथ ही संजय महाजन की टीम ने नवरात्रि एवं मां की आराधना के लिए किया जाने वाला नृत्य नोरता भी प्रस्तुत किया विभिन्न पिरामिड बनाकर कौड़ियों वाली ड्रेस पहनकर गुडूम बजाते हुए डिंडोरी जिले के आदिवासी कलाकारों ने गुडूम बाजा नृत्य आदिवासी अंचल की बानगी प्रस्तुत कर गया। कर्नाटक के कलाकार ने शिव की आराधना में किया जाने वाला पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुत किया।
मंच की एकता मेहता संकल्प वर्मा ने बताया कि ध्रुपद कला अकादमी द्वारा भरतनाट्यम प्रस्तुत किया गया जो राग अमृत वर्षिनी में पुष्पांजलि की प्रस्तुति दी गई वही केरल की लोक संस्कृति और विविधता को दर्शाते हुए तिरूवतिरा नृत्य प्रस्तुत किया गया जो केरल का पारंपरिक नृत्य है अपने कोमलता के लिए जाना जाता है इसमें कलाकारों ने एक घेरे में गोलाकार घूमते हुए तालियो की गूंज के साथ नृत्य किया कलाकारों ने खूबसूरत सुनहरी सफेद कसवु साड़ी पहन रखी थी ।स्थानीय कलाकारों मनोज दुबे एवं समूह द्वारा ,तृप्ति बिल्लोरे एवं पल्लवी बाविकर समूह ने अपनी अपनी प्रस्तुतियां दी इस अवसर पर कंचन गिद्वानी ज्योति तोमर मुद्रा शास्त्री संध्या यादव एकता मेहता रितेश पाटनी कमल आहूजा मुकेश पांडे मनीष सोनी विकास केतेले आदि मौजूद थे।
12 मई के कार्यक्रम पवन शर्मा ने बताया 12 मई को मालवा उत्सव का अंतिम दिवस है शिल्प मेला दोपहर जल्दी शुरू होगा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में गुडुंमबाजा ,गरबा, तमेटागुल्लु, वीजुकंसाले, नौरता एवं स्थानीय प्रस्तुतियां होगी।


