Narmada

‘नर्मदा सरितां वरा’ धरती के सात मील अंदर तक बहती है मां नर्मदा

मां नर्मदा नदीं के कई रहस्य है जिन्हें कोई नहीं जान पाया। मां नर्मदा की महिमा का वर्णन जितना किया जाए उतना कम है। नर्मदा नदी को समस्त तत्वों की जननी कहा गया है। नर्मदा को सरितां वरा माना जाता है। याने नदियों में सर्वश्रेष्ठ नदी, इसके कई ऐसे रहस्या है जो वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए है। ऐसा कहा जाता है कि मां नर्मदा अपने उदगम स्थान से लेकर समुद्र पर्यन्त उत्तर एवं दक्षिण दोनों तटों में, दोनों ओर सात मील तक पृथ्वी के भीतर प्रवाहित होती हैं, पृथ्वी के ऊपर तो वे मात्र दर्शनार्थ प्रवाहित होती हैं। शास्त्रों के अनुसार तो द्रोणपुत्र महाभारत काल से अब तक नर्मदा की परिक्रमा में लगे हुए है। नर्मदा नदीं के आत्मसाक्षात्कार करने की सार्मध्य तो आम मनुष्य में नहीं है लेकिन मां नर्मदा पर अब तक कोई रिर्सच नहीं हुई है। मां नर्मदा की धार्मिक मान्याएं इस तरह जनजीवन में व्याप्त है कि मां नर्मदा आज कलयूग में भी शक्ति स्वरूपा होने के कई उदाहरण दे देती है जो वैज्ञानिकों को भी हैरान कर देने वाले है।
नर्मदा में मिलते है जीवाश्म
नर्मदा नदीं में करोड़ो वर्षों पूर्व के जीवाश्म मिलते है। जिससे यह बात भी सिद्ध होती है कि मां नर्मदा करोड़ो वर्षों से धरती पर बह रही है। नर्मदा परिक्रमा के दौरान मां नर्मदा के कई ऐसे घाट भी मिलते है जो जीवाश्म से ही बने है। इसमें कंकर घाट एक ऐसा घाट है जिसका निर्माण की मानो कई करोड़ो वर्षों पुराने जीवाश्म से हुआ है।

नर्मदा तट पर दाह संस्कार
धार्मिक मान्याओं के अनुसार नर्मदा के तट पर दाह संस्कार करने पर गंगाजी नहीं जाना पड़ता है। क्योकि गंगा मां स्वयं यहां आकर मां नर्मदा से मिलती है। धार्मिक मान्यताओं  के तहत नर्मदा तट पर दाह संस्कार किया जाता है। नर्मदा पुराण के अनुसार मां के तट और जल का खास महत्व है। यदि नर्मदा नदी में जल प्रयाण किया जात है। याने कोई व्यक्ति जल में प्राण त्यागता है तो उसकी बात ही निराली है। नर्मदा के प्रमुख तटों पर प्राण त्यागने और संस्कार से सदा के लिए जीव को शांति मिलती है।

धरती के अंदर तक बहती है नर्मदा
नर्मदा अपने उदगम स्थान से लेकर समुद्र पर्यन्त उतर एवं दक्षिण दोनों तटों में,दोनों और सात मील तक पृथ्वी के अंदर ही अंदर प्रवाहित होती हैं, पृथ्वी के उपर तो वे मात्र दर्शनार्थ प्रवाहित होती हैं| (उलेखनीय है कि भूकंप मापक यंत्रों ने भी पृथ्वी की इस दरार को स्वीकृत किया हैं ) इससे यह बात भी स्पष्ट है कि नर्मदा नदी जमीन की गहराई तक बहती है।

वैज्ञानिक भी है हैरान
जहां वैज्ञानिक इसे भूकंपीय साक्ष्य यह नहीं बताते कि नदी सचमुच “पृथ्वी के अंदर तक” बहती है, बल्कि यह स्थापित करते हैं कि नदी उस गहरी भूगर्भीय दरार के ऊपरी हिस्से में बहती है, जो लाखों वर्षों में बनी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नर्मदा नदी एक भ्रंश घाटी है। नर्मदा नदी विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक दरार घाटी जिसे भूगर्भीय रूप से ‘ग्रैबेन’ भी कहा जाता है से होकर बहती है। वैज्ञानिक मानते है कि यह पृथ्वी की पपड़ी का एक धंसा हुआ खंड है जो प्राचीन काल में हलचलों के कारण बना था। इससे यह बात तो साबित होत है कि मां नर्मदा पृथ्वी के अंदर तक बहती है। जो वैज्ञानिकों के लिए एक लंबी रिर्सच का विषय है।

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