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नारी अस्मिता की गूंज बना आज की द्रौपदी* . इंदौर में पांचवीं बार मंचन को मिला सराहनीय प्रतिसाद

नारी अस्मिता की गूंज बना आज की द्रौपदी

. इंदौर में पांचवीं बार मंचन को मिला सराहनीय प्रतिसाद

– सारिका दीक्षित के प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को किया भाव विभोर

*इंदौर*। पौराणिक कथा के माध्यम से समकालीन समाज की सच्चाई को मंच पर उतारता नाटक आज की द्रौपदी इंदौर में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। नारी अस्मिता, आत्मसम्मान और न्याय के सवालों को केंद्र में रखकर तैयार इस नाटक का एक ही वर्ष में पांचवीं बार मंचन हुआ। लगातार मिल रहा दर्शकों का प्रतिसाद इसकी लोकप्रियता को रेखांकित करता है।

ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित मंचन में द्रौपदी के किरदार में सारिका दीक्षित ने अपने प्रभावशाली अभिनय और सशक्त संवादों से दर्शकों को बांधे रखा। महाभारत के प्रसंगों को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जोड़ते हुए नाटक ने यह संदेश दिया कि नारी केवल सहनशीलता की प्रतीक नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होने वाली शक्ति भी है।

द्रौपदी के चीरहरण का प्रसंग और अन्याय के विरुद्ध उसके सवालों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। दुशासन की भूमिका में मिलिंद मूले ने अपने प्रभावशाली अभिनय और सशक्त मंचीय अभिव्यक्ति से प्रसंग को जीवंत बनाया। वहीं, डॉ. पंकज उपाध्याय ने श्रीकृष्ण की भूमिका में गंभीरता और प्रभावपूर्ण प्रस्तुति के साथ नाटक को महत्वपूर्ण भावनात्मक आयाम दिया। द्रौपदी के अपमान के प्रसंग में श्रीकृष्ण की उपस्थिति न्याय, आस्था और नारी गरिमा की रक्षा के संदेश को सशक्त रूप से सामने लाती है। सारिका दीक्षित, मिलिंद मूले और डॉ. पंकज उपाध्याय की भूमिकाओं ने मिलकर नाटक के प्रभाव को और गहरा बनाया तथा दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़े रखा।

नाटक की सफलता का आधार इसकी समसामयिक विषयवस्तु और प्रभावी मंच प्रस्तुति है। पौराणिक पात्र के माध्यम से आज की महिला के संघर्ष, स्वाभिमान और न्याय की आकांक्षा को अभिव्यक्त करने का प्रयास दर्शकों से जुड़ता नजर आया।

इस कार्यक्रम का आयोजन संतोष क्रांति फाउंडेशन के बैनर तले आर्ट ऑफ क्रिएशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। आयोजन में एसआईओडी/एमपीएसओएस का विशेष सहयोग रहा।

*मंच के पीछे की टीम*

नाटक की लेखक एवं परिकल्पनाकार सारिका दीक्षित हैं। प्रोड्यूसर एवं मैनेजमेंट विनोद सिंह तथा निर्देशक डॉ. पंकज उपाध्याय हैं। सारिका दीक्षित ने द्रौपदी, मिलिंद मूले ने दुशासन और डॉ. पंकज उपाध्याय ने श्रीकृष्ण की भूमिका निभाई। लाइट डायरेक्शन देव सिंह, स्क्रीनप्ले विनोद सिंह, संगीत निर्देशन अज़हर कुरैशी, मेकअप अमृता दीक्षित, हेयर निधि वर्मा और ड्रेस स्टाइलिंग वर्षा उपाध्याय ने संभाली। बैकस्टेज में सार्थक उपाध्याय, संदीप मीना एवं रोबिन तथा फोटोग्राफी में नितेश एवं रोबिन का योगदान रहा।

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