इंदौर(विनोद गोयल)। कैलाश मार्ग स्थित पंचकुइयां पर भूतेश्वर महादेव मंदिर पर शिवरात्रि के अवसर पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर इंदौऱ शहर में सुख- समृद्धि की कामना की। प्राचिन भूतेश्वर महादेव मंदिर पर अलसुबह से ही भक्तो की भीड़ लग गई । आज महाशिवरात्रि के अवसर पर जहां चारों और के शिवालयों में ओम नमः शिवाय गुंज उठा । शिवभक्तों ने अलग-अलग तरीको से शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी प्रिय वस्तुओं को अर्पित किया।
मोक्ष का द्वार खोलते है शिव
मोक्ष धाम अर्थात स्मशान घाट का क्षेत्र होने के कारण यह मान्यता है कि यहाँ आने वाले पार्थिव शरीर भगवान शिव की दृष्टि पड़ने से सहज ही मोक्ष को प्राप्त होते हैं। इस प्राचीन मंदिर पर चारों प्रहर पूजा का भी विशेष प्रावधान है। माता अहिल्या के शासनकाल में करीब 300 वर्ष पहले स्थापित इस मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन शास्त्रीय संगीत की परम्परा है। जो की करीब 88 वर्ष सतत जारी है। मंदिर के मुख्य पुजारी पं. श्री हरीशानंद तिवारी एवं आचार्य पं. यतीन्द्र तिवारी ने बताया कि भूतेश्वर महादेव मंदिर पर महाशिवरात्रि का पर्व विशेष गरिमा और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
अनंत ज्योति स्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे शिव
लिंग पुराण में वर्णन मिलता है कि इसी रात्रि को अनंत ज्योति स्तंभ के रूप में शिव का प्राकट्य हुआ है। इसे लिंगोद्भव भी कहा गया है। यह प्रसंग इस तथ्य का प्रतीक है कि भगवान शिव न आदि है, न अंत, वे स्वयं प्रकाश स्वरुप चेतना हैं। शिवरात्रि उसी अनंत सत्ता के स्मरण और आत्मबोध की साधना का अवसर है।
चारों प्रहर होगी पूजा
शिव पुराण में भी चार प्रहर पूजा का विधान बताया गया है, उसका पालन करते हुए भूतेश्वर महादेव मन्दिर में आज प्रथम प्रहर में जलाभिषेक हुआ। द्वितीय प्रहर में दुग्धाभिषेक हुआ, तृतीय प्रहर में घृताभिषेक हुआ। इसके साथ ही चतुर्थ प्रहर में शहद और बिल्व पत्र का अर्पण किए जाएंगे।
जलाभिषेक का महत्तव
जलाभिषेक अहंकार और बाहरी मलीनताओं को धोने, दुग्धाभिषेक मन और चित्त की शुद्धि, घृताभिषेक साधक के भीतर तेज और स्थिरता का संचार करने तथा शहद और बिल्व पत्र के अर्पण से आनंद, समर्पण और पूर्णता का लक्ष्य माना जाता है।


