लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित नर्मदा प्रवाह यूनिटी मार्च यात्रा का इंदौर में आगमन पर भव्य स्वागत किया गया। इंदौर में इस यात्रा
भिक्षावृत्ति जिसे रोकने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश के एक शहर इंदौर में जहां भिक्षावृत्ति रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे है। भिक्षावृत्ति को जहां
मां नर्मदा नदीं के कई रहस्य है जिन्हें कोई नहीं जान पाया। मां नर्मदा की महिमा का वर्णन जितना किया जाए उतना कम है। नर्मदा नदी को समस्त तत्वों की
सैकड़ो वर्षों बाद आज फिर अयोध्या में राजवंश का ध्वज फहरेगा इसके साथ ही देश में रामराज्य स्थापना का शुभदिन आया है। इसको लेकर पूरे देश में उत्साह है। यह
मां नर्मदा की परिक्रमा करने के दौरान कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। यदि मां नर्मदा की परिक्रमा के दौरान नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो
नर्मदा तट के सौंदर्य का वर्णन कभी करते-करते इतिहासकार थक जाते थे। जो नर्मदा कभी शांत तो कभी रोद्र रूप दिखाती हुई अपनी सीमाओं में रहने के लिए प्रसिद्ध रही
राजस्थान के राजसंमद जिले की कुंभलगढ़ तहसील में स्थित सुरजकुंड दिव्य धाम के संतश्री अवधेश चेतन्य बह्मचारी महाराज की नर्मदा परिक्रमा को लगभग 16 दिन हो चुके है। यात्रा 17
नर्मदा परिक्रमा वैसे तो हर वर्ष देवउठनी एकादशी से शुरू होती है। जिसे पहले तो साधु संत ही किया करते थे। लेकिन वर्तमान में नर्मदा परिक्रमा एक एडवेंचर में भी
यह यात्रा न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी भक्तों को मजबूत बना रही है, जहां प्रकृति की गोद में नर्मदा मां के दर्शन से आत्मा की
आज की यात्रा बालाजी रोकड़ा हनुमान मंदिर से शुरू हुई, जो राजघाट के निकट स्थित है। यहां से आगे बढ़ते हुए दाता श्री और उनके साथी भक्तों ने दिगंबरदास बाबा










