Devasthan (temple)

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व- आत्मगौरव और पुनर्जागरण का प्रतीक बना, पीएम मोदी ने किया आगाज

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व- 2026 आस्था, आत्मगौरव और पुनर्जागरण का प्रतीक है। वर्ष 1026 में गजनी के महमूद द्वारा सोमनाथ मंदिर पर हुआ आक्रमण भारतीय सभ्यता पर एक गहरा आघात था। लेकिन यह मंदिर न केवल खड़ा रहा, बल्कि सहनशीलता, पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक निरंतरता का अमिट प्रतीक बन गया। अब, 2026 में हम उस ऐतिहासिक क्षण के 1000 वर्ष पूरे होने पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रहे हैं। एक ऐसा पर्व, जो हमारी आस्था की अडिगता और आत्मगौरव का उत्सव है।

देशभर के शिवालयों में गुंजा ॐ नमः शिवाय मंत्र
तीन दिवसीय स्मृति अभियान के अंतर्गत सोमनाथ पर हुए आक्रमण की पीड़ा को याद करते हुए, मंदिर की अखंडता को पूरे देश ने नमन किया।  प्रधानमंत्री की प्रेरणा से आज देशभर के शिवालयों में ॐ नमः शिवाय मंत्र का सामूहिक जाप किया जा रहा है। आप से आग्रह है कि अपने निकटतम शिवालय में जाकर इस मंत्र जाप में भाग लें। 11 मई 1951 को, भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन किया था। 2026 में मंदिर निर्माण के भी 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह पुनःस्थापना का गौरवशाली क्षण है। यह पर्व केवल एक स्मरण नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण है।

पीएम मोदी हुए पर्व में शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात दौरे पर सोमनाथ पहुंचे, जहां उन्होंने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लिया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर में विधिविधान के साथ पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का दुग्धाभिषेक किया। मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार के बीच हुए धार्मिक अनुष्ठानों के बाद प्रधानमंत्री ने जनसभा को संबोधित किया।

शौर्य यात्रा निकाली
सोमनाथ मंदिर में पूजा से पहले मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु शौर्य यात्रा का आयोजन किया गया। इस भव्य यात्रा में 108 घोड़ों के साथ विशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं शामिल हुए। यह यात्रा सोमनाथ की ऐतिहासिक वीरता और बलिदान की स्मृति का प्रतीक रही।

‘हर हर महादेव, जय सोमनाथ’ गूंजी जनसभा
प्रधानमंत्री ने कहा, “गजनी से औरंगजेब तक अतीत में हो गए दफन, सोमनाथ वहीं खड़ा है।” उन्होंने उल्लेख किया कि सोमनाथ के पवित्र विग्रह को तोड़ा गया और इसके क्रूर इतिहास को छिपाने के प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि धार्मिक उन्माद को साधारण लूट बताकर प्रस्तुत किया गया, जिससे सच्चाई को दबाया गया।

‘हम लोग जीव में भी शिव को देखते हैं’
पीएम मोदी ने कहा, “हम वे लोग हैं, जो जीव में भी शिव को देखते हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की सभ्यता का संदेश किसी को पराजित करने का नहीं, बल्कि जीवन को संतुलन में रखने का रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में आस्था घृणा नहीं सिखाती और शक्ति विनाश का अहंकार नहीं देती।

पुनर्निर्माण, में चुनौतियां और भविष्य का संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया, तो उन्हें रोका गया। वर्ष 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की सोमनाथ यात्रा पर भी आपत्तियां उठाई गईं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आज भी ऐसी ताकतें सक्रिय हैं जो सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध करती हैं। उन्होंने आह्वान किया कि देश को एकजुट रहकर हर विभाजनकारी शक्ति का सामना करना होगा और पिछले 1000 वर्षों की यात्रा से प्रेरणा लेकर अगले 1000 वर्षों के लिए तैयार रहना होगा। इसके बाद पीएम ने अपने भाषण का समापन “हर हर महादेव, जय सोमनाथ” के उद्घोष के साथ किया।

 

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