पर्युषण पर्व के पंचम दिवस भगवान महावीर के जन्म वांचन समारोह में उमड़ा आस्था का सैलाब
*4000 से अधिक श्रद्धालुओं ने गच्छाधिपति श्री नित्यसेनसूरिेश्वरजी म.सा. के मुखारविंद से जन्म वांचन श्रवण कर अक्षत से की वधमणा*
*इंदौर।* पर्युषण पर्व का पंचम दिवस जैन समाज के लिए आध्यात्मिक उल्लास, भक्ति और सामूहिक एकता का अनुपम अवसर बन गया। दिनांक *12 सितम्बर 2026, शनिवार* को भगवान महावीर स्वामीजी के जन्म वांचन समारोह का आयोजन *केशरी वाटिका* में अत्यंत श्रद्धा, भव्यता एवं हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। गच्छाधिपति *श्री नित्यसेनसूरिेश्वरजी म.सा.* के मुखारविंद से भगवान महावीर स्वामीजी के जन्म का वांचन श्रवण करने के लिए इंदौर ही नहीं, अपितु आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। समारोह में *4000 से अधिक जनसमुदाय* ने सहभागी बनकर अक्षत से वधमणा की और भगवान के जन्मोत्सव की मंगलमय प्रसन्नता को आत्मसात किया। मुनि डॉ. सिद्धरत्नजी एवं विद्वदरत्नजी ने माता त्रिशला के देखे हुए स्वप्नों की व्याख्या की।
एकता, आस्था और परंपरा का विराट संगम
सौधर्म बृहत्तपोगच्छीय परंपरा में प्रभु राजेंद्रसूरि के सातवें पट्टधर के संप्रदाय की एकता का ऐसा अनुपम दृश्य उपस्थित हुआ, जिसने समूचे इंदौर के जैन समाज को एक सूत्र में पिरो दिया। विभिन्न क्षेत्रों, परिवारों और सामाजिक समूहों से जुड़े श्रद्धालु एक ही स्थान पर एकत्रित हुए। यह आयोजन केवल जन्म वांचन का धार्मिक प्रसंग नहीं रहा, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना, गुरु भक्ति और संगठनात्मक एकता का जीवंत प्रतिबिंब बन गया।
मालवा एवं निमाड़ क्षेत्र में पिछले 100 वर्षों से अधिक समय के जनसमुदाय संबंधी रिकॉर्ड के टूटने की चर्चा के बीच समारोह में उमड़ा जनसैलाब अपने आप में ऐतिहासिक रहा। लगभग *20,000 वर्गफीट* क्षेत्रफल वाली केशरी वाटिका श्रद्धालुओं से इस प्रकार भर गई कि पैर रखने तक की जगह शेष नहीं रही। जिस श्रद्धालु को जहां स्थान मिला, वहीं खड़े होकर उसने जन्म वांचन का लाभ लिया। किसी के लिए यह दृश्य आश्चर्य का विषय था, तो किसी के लिए यह गुरु कृपा और धर्म के प्रति अटूट आस्था का साक्षात अनुभव।
गच्छाधिपति ने दी बड़े आराधना केंद्र की प्रेरणा
इतने विशाल जनसमुदाय को देखकर गच्छाधिपति *श्री नित्यसेनसूरिेश्वरजी म.सा.* ने इंदौर की बढ़ती धार्मिक चेतना और समाज की विशालता की ओर संकेत करते हुए कहा कि *अब इंदौर बहुत बड़ा हो चुका है।* उन्होंने शहर के मध्य में आराधना एवं साधना के लिए एक बड़े स्थान के निर्माण की प्रेरणा दी। साथ ही, नई पीढ़ी को धर्म से जोड़ने, संस्कारों का संवर्धन करने और धार्मिक परंपराओं को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश दिया।
गुरुदेव की यह प्रेरणा उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए केवल एक विचार नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक आध्यात्मिक संकल्प के रूप में अनुभव की गई। जन्म वांचन समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि धर्म के प्रति समाज की आस्था आज भी उतनी ही जीवंत है और नई पीढ़ी को इस आस्था से जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।लाभार्थियों ने श्रद्धा और उत्साह से लिया लाभ
समारोह के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं मांगलिक लाभों का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर चढ़ावे लिए और अपनी उपस्थिति को भक्ति के साथ सार्थक बनाया। दादा गुरुदेव की आरती उतारने का लाभ *श्री राजेंद्रजी पारेख* को प्राप्त हुआ, वहीं *श्री तेजकुमारजी बम्बोरिया* ने झूला झुलाने का लाभ लिया।
गुरुदेव के चित्र पर माल्यार्पण का लाभ * नरेंद्र राणापुर* को मिला। श्री मुकेश पोसित्रा* ने मुनिमजी बनने का लाभ लिया। *श्री प्रवीणजी पूर्णिमा* ने सभी श्रद्धालुओं को स्वप्नाजी के दर्शन करवाए, जबकि *श्री राकेश वोहरा* ने छापे लगाने का लाभ लिया। *श्री रमेश श्रीमाल* ने फूलों की माला पहनाई तथा *माणकबाई छत्तर* ने सोने की माला पहनाकर अपनी श्रद्धा अर्पित की।
श्री विपुलजी अलीराजपुर* ने देव विमान से परमात्मा को उतारने का लाभ लिया। *श्री जिनेंद्र चौधरी* ने निर्धूम अग्नि के दर्शन करवाए। *श्री दिलीप सेक्रेटरी* की ओर से पांच का पारणा होगा, वहीं *श्री अशोक जैन* की ओर से श्रीफल की प्रभावना वितरित की गई।
समारोह में * विनोदजी संघवी, हिम्मतजी संघवी, रितेशजी कुक्षी, श् मनीषजी वया, श शशिकांतजी सकलेचा, श्री रविजी रांका एवं श्री रमणलालजी पारेख* ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। *श्री विरेन्द्रजी संजय* एवं *श्री रितेशजी लुंकड* विशेष रूप से उपस्थित रहे।
त्रिशला माता के गर्भ वर्णन के साथ उमड़ा आनंद
जन्म वांचन समारोह का सबसे भावपूर्ण क्षण तब आया, जब गुरुदेव ने माता त्रिशला के गर्भ में भगवान महावीर स्वामीजी के अवतरण का पावन विवरण सुनाया। जैसे-जैसे जन्म वांचन आगे बढ़ा, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति और आनंद की तरंगें उठती गईं। जन्म का मंगल प्रसंग सुनते ही उपस्थित जनसमुदाय हर्षोल्लास से झूम उठा।
श्रद्धालुओं ने वहीं नारियल बांधकर एक-दूसरे को नारियल खिलाया और भगवान महावीर स्वामीजी के जन्म वांचन की मंगल बधाई दी। वातावरण में जयकारों की गूंज, भक्तिभाव की ऊष्मा और सामूहिक आनंद का ऐसा संगम दिखाई दिया, मानो समूचा परिसर भगवान के जन्मोत्सव की दिव्य अनुभूति से आलोकित हो उठा हो।
समाज की सामूहिक सहभागिता बनी समारोह की शक्ति*
यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज की सामूहिक सहभागिता, परस्पर सहयोग और गुरु भक्ति का प्रेरक उदाहरण बन गया। उपस्थित प्रत्येक श्रद्धालु ने अपनी क्षमता और भावना के अनुरूप समारोह में योगदान दिया। किसी ने लाभ लिया, किसी ने व्यवस्था संभाली, किसी ने सेवा की और किसी ने श्रद्धापूर्वक जन्म वांचन श्रवण कर इस पावन अवसर को सफल बनाया।
समारोह में *अध्यक्ष श् धनराजजी संघवी, सचिव श्री महेंद्रजी बागवाला एवं मीडिया समन्वयक श्री राजेश जैन युवा* सहित 4000 से अधिक श्रद्धालु उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन *श नीरजजी सुराणा* ने किया।
उपरोक्त अवसर पर शैलेश सुराणा, सपन बागवाला, अजय पारेख, विरेन्द्र पारेख, आनंदीलाल अम्बोर, संदीप पारेख, कुलदीप घंटाघर, संतोष कापड़िया, मनय संघवी, धनराज चम्पालाल कुक्षी, विजय पारेख, मांगूबाई अम्बोर, रवि मोदी, जिनेन्द्र चौधरी, सुमित कांग्रेसा, शैलेश अम्बोर, अंकित पारेख मौजूद थे।

भगवान महावीर स्वामीजी के जन्म वांचन का यह समारोह इंदौर के जैन समाज के लिए श्रद्धा, संगठन, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का अविस्मरणीय पर्व बन गया। इस अवसर ने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होकर धर्म के प्रति समर्पित होता है, तब धार्मिक आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं रहते, बल्कि वे पीढ़ियों तक स्मरण किए जाने वाले संस्कार पर्व बन जाते हैं।



