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मित्रता के नाम पर स्वार्थ और मोह-माया से बंधे हुए रिश्ते ज्यादा दिनों तक नहीं चलते – स्वामी प्रणवानंद सरस्वती

इंदौर(विनोद गोयल)  कृष्ण और सुदामा की मित्रता पूरी दुनिया में अनूठा उदाहरण है। मित्रता के नाम पर स्वार्थ और मोह-माया से बंधे रिश्ते ज्यादा दिनों तक नहीं चलते। कृष्ण-सुदामा जैसा मैत्री भाव वर्तमान में पूरे विश्व की जरूरत है। यह भारत भूमि का ही पुण्य प्रताप है कि यहां कृष्ण जैसे राजा और सुदामा जैसे स्वाभिमानी ब्राह्मण हुए। राजमहलों के दरवाजे झोपड़ी में रहने वालों के लिए जिस दिन खुल जाएंगे, उस दिन देश का प्रजातंत्र सार्थक हो उठेगा। समाज के संपन्न और सक्षम लोग जिस दिन अपने आसपास के सुदामाओं को गले लगा लेंगे, उस दिन वास्तव में कृष्ण-सुदामा की मित्रता सार्थक हो जाएगी।

चौबीस अवतार एवं परीक्षित मोक्ष प्रसंगों की व्याख्या
ये प्रेरक विचार हैं अखंड प्रणव वेदांत आश्रम झलारिया के महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती के, जो उन्होंने बायपास स्थित रूचि लाइफ स्केप पर चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में मंगलवार को कृष्ण-सुदामा मैत्री, चौबीस अवतार एवं परीक्षित मोक्ष प्रसंगों की व्याख्या के दौरान व्यक्त किए। अखंड प्रणव वेदांत आश्रम पर चल रहे इस भागवत ज्ञान यज्ञ में कृष्ण-सुदामा मैत्री का जीवंत और भावपूर्ण उत्सव भी मनाया गया। महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने मित्रता की बहुत सुंदर व्याख्या प्रस्तुत की। कथा शुभारंभ के पूर्व समाजसेवी सुरेश-मृदुला शाहरा, श्रीमती कल्पना भाटिया, प्रदीप अग्रवाल, मनोज रामनानी, आनंद चौकसे, गोकुल सिसोदिया, श्रीमती कांता अग्रवाल, कमल राठी आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी कमलेश मंडन, आनंद शर्मा, गोविंद सिंह, नीरज पाटीदार, बाबूसिंह मंडलोई, अजय पानसरे ने की। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालुओं ने नाचते गाते हुए अपनी खुशियाँ व्यक्त की। सैकड़ों भक्तों ने आरती में भाग लिया। बुधवार 14 जनवरी को दोपहर 2 से 5 बजे तक हवन एवं पूर्णाहुति के साथ कथा का समापन होगा।

भागवत ही दुनिया का एकमात्र ऐसा अनूठा ग्रन्थ
महामंडलेश्वरजी ने भागवत के विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या करते हुए कहा कि भागवत ही दुनिया का एकमात्र ऐसा अनूठा ग्रन्थ है जिसे हम सैकड़ों-हजारों बार सुनने के बाद भी तृप्त नहीं होते। यह अतृप्ति ही हमारी भक्ति का प्रमाण है। भागवत को विद्वानों ने अलग-अलग चश्मों से देखने और समझने – समझाने का प्रयास किया है लेकिन आज भी भागवत पर पूरी दुनिया में विद्वानों द्वारा शोध कार्य किए जा रहे हैं। यह स्वयं भगवान की वाणी का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि भागवत जैसे कालजयी ग्रन्थ हमारी सनातन संस्कृति और भारत भूमि की पहचान बने हुए हैं। भागवत के प्रत्येक मंत्र में जीवन को सँवारने के अद्भुत उपाय बताए गए हैं।

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