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सामाजिक समरसता, पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश लेकर निकली शिव-परशुराम कार कावड़ यात्रा जानापाव पहुंची

सामाजिक समरसता, पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश लेकर निकली शिव-परशुराम कार कावड़ यात्रा जानापाव पहुंची

देवी अहिल्या और भगवान परशुराम के जयघोष से गूंजा शहर, 2 किलोमीटर लंबा नजर आया कारों का काफिला

200 से अधिक कारें, 10 बड़े वाहन, 100 दो पहिया वाहन और 3000 से ज्यादा श्रद्धालु हुए शामिल

50 से अधिक मंचों से हुआ स्वागत, केले, फलाहार, दूध और जल का किया गया वितरण

इंदौर। सामाजिक समरसता, जल संरक्षण, पर्यावरण रक्षा और सनातन संस्कृति के संवर्धन का संदेश लेकर विश्व ब्राह्मण समाज संघ के तत्वावधान में निकली शिव-परशुराम कार कावड़ यात्रा रविवार को हंसदास मठ से रवाना होकर भगवान परशुराम की जन्मस्थली जानापाव पहुंची। सुबह 7 बजे हंसदास मठ से शुरू हुई यात्रा में सर्व समाज के 3000 से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। 200 से अधिक कारों, 10 बड़े वाहनों और सैकड़ों दोपहिया वाहनों के काफिले ने शहर में भक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।

शिव परशुराम कर कावड़ यात्रा के संयोजक विश्व ब्राह्मण समाज संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व राज्य मंत्री दर्जा पंडित योगेंद्र महंत ने बताया किशाम करीब 6 बजे यात्रा जानापाव पहुंची, जहां चंबल, क्षिप्रा और नर्मदा सहित प्रमुख नदियों से लाए गए पवित्र जल से भगवान शिव के प्राचीन शिवलिंग और भगवान परशुराम का विधिविधान से पूजन-अभिषेक किया गया। इसके बाद महाआरती हुई और श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई।

चंबल-क्षिप्रा-नर्मदा के जल से हुआ अभिषेक

शिव-परशुराम कार कावड़ यात्रा के संयोजक, विश्व ब्राह्मण समाज संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मध्यप्रदेश शासन के पूर्व राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त पंडित श्री योगेंद्र महंत ने बताया कि यात्रा में चंबल, क्षिप्रा और नर्मदा सहित प्रमुख नदियों का पवित्र जल अलग-अलग दलों द्वारा एकत्रित कर जानापाव लाया गया। इसी जल से जानापाव में भगवान शिव के प्राचीन शिवलिंग और भगवान परशुराम का पूजन-अभिषेक किया गया।

संकल्प जल की एक-एक बूंद बचाएंगे अभिषेक के बाद महाआरती और प्रसादी वितरण के साथ धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं ने जल की एक-एक बूंद बचाने, नदियों को स्वच्छ रखने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

शहर के प्रमुख मार्गों से निकला काफिला हंसदास मठ से रवाना हुई यात्रा बड़ा गणपति, राजवाड़ा, गांधी प्रतिमा, नेहरू प्रतिमा, आंबेडकर प्रतिमा, जीपीओ, छावनी, अग्रसेन प्रतिमा, टॉवर चौराहा, चोइथराम अस्पताल और राजेंद्र नगर होते हुए राऊ, महू और जानापाव पहुंची।

करीब दो किलोमीटर लंबा कारों का काफिला शहर में आकर्षण का केंद्र बना रहा। हंसदास मठ से राजवाड़ा तक यात्रा का एक सिरा पहुंचने के दौरान पीछे वाहनों की लंबी कतार दिखाई देती रही। शहर के करीब 20 किलोमीटर के मार्ग को पार करने में लगभग पांच घंटे का समय लगा।

 

सर्व समाज को जोड़ना उद्देश्य यात्रा संयोजक पंडित  योगेंद्र महंत ने कहा कि शिव-परशुराम कार कावड़ यात्रा का उद्देश्य किसी एक समाज तक सीमित नहीं, बल्कि सर्व समाज को एक सूत्र में जोड़ना है। धार्मिक आस्था के साथ जल संरक्षण, पर्यावरण रक्षा और सामाजिक समरसता का संदेश यात्रा के माध्यम से दिया गया।

उन्होंने कहा कि नदियां हमारी आस्था और जीवन दोनों का आधार हैं। इसलिए नदी और जल संरक्षण को धार्मिक भावना से जोड़कर जन-जागरण का प्रयास किया गया है।

रीगल पर फायर ब्रिगेड और दो एंबुलेंस को दिया रास्ता, सरपट गुजरीं

यात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था संभालने के लिए विश्व ब्राह्मण समाज संघ तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के 60 से अधिक कार्यकर्ता सक्रिय रहे। कार्यकर्ताओं ने लंबे कार काफिले को व्यवस्थित रखने के साथ प्रमुख चौराहों पर यातायात सुचारू बनाए रखने में सहयोग किया।रीगल चौराहे पर यात्रा के पहुंचने के दौरान एक बड़ी फायर ब्रिगेड और दो एंबुलेंस वहां से गुजरीं। श्रद्धालुओं और पदाधिकारी यो की सतर्कता के चलते एक लेन यातायात के लिए खुली रखी गई थी। इसके चलते तीनों आपातकालीन वाहन बिना किसी बाधा के तेजी से निकल गए।

जगह-जगह माल्यार्पण और पूजन हंसदास मठ पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन-अभिषेक कर यात्रा का शुभारंभ किया गया। इसके बाद बड़ा गणपति पर भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया गया। राजवाड़ा पर देवी अहिल्या की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पूजन किया गया।रीगल चौराहे पर महात्मा गांधी की प्रतिमा, गीता भवन क्षेत्र में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा, अग्रसेन प्रतिमा सहित विभिन्न महापुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण और पूजन किया गया। इसके बाद कारों का काफिला जानापाव की ओर बढ़ता रहा।

घोड़े, डीजे और बैंड रहे आकर्षण का केंद्र यात्रा में घोड़े, डीजे और बैंड के साथ भगवान शिव और भगवान परशुराम की आकर्षक प्रतिकृतियां शामिल रहीं। भक्ति गीतों और जयघोष के बीच श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ते रहे। यात्रा मार्ग में बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे खड़े होकर काफिले का स्वागत करते दिखाई दिए।

50 से अधिक स्वागत मंचों पर हुआ अभिनंद हंसदास मठ से जानापाव तक 50 से अधिक स्वागत मंचों से यात्रा का अभिनंदन किया गया। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर स्वागत किया। कई स्थानों पर केले, फल, फलाहार, दूध और जल का वितरण किया गया।

इनकी रही विशेष सहभागिता शिव परशुराम कर कावड़ यात्रा के संयोजक विश्व ब्राह्मण समाज संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व राज्य मंत्री दर्जा पंडित योगेंद्र महंत, आचार्य श्री रामचन्द्र शर्मा वैदिक, श्री विजय बोड़खा, महामंडलेश्वर श्री पवन दास शर्मा, महंत श्री यज्ञत्रदास महाराज , श्रीमती सावित्री अग्रावत, श्रीमती अर्पणा जोशी, श्रीमती डिंपल शर्मा, श्रीमती छाया दुबे, श्री गोपाल कृष्ण शर्मा, श्री कृष्णा वैरागी, श्री गोविन्द शर्मा, श्री सीताराम व्यास, श्री दिनेश शर्मा, श्री जयदीप जैन, श्री भूरालाल व्यास, श्री कोमल दीक्षित, श्री कमलेश्वर सिंह सिसोदिया, श्री अनंत महंत, श्री सुरेश पाठक, श्री पुष्प कुमार भार्गव, श्री हेमेंद्र भार्गव, श्री मनोज तिवारी, श्री लक्ष्मीनारायण भार्गव, श्री प्रकाश मानावत, श्री विनीत त्रिवेदी, श्री ललित पारिख, श्री दीपक पाठक, श्रीमती प्रमिला शर्मा, श्रीमती रंजना वैष्णव, श्रीमती चंदा तिवारी, पंडित श्री अशोक चतुर्वेदी सहित अनेक श्रद्धालुओं की विशेष सहभागिता रही।

1 महीने की तैयारी हुई सफल विश्व ब्राह्मण समाज संघ की 50 से अधिक टीमें यात्रा के संचालन में जुटी रहीं। हंसदास मठ से जानापाव तक करीब 50 किलोमीटर के पूरे मार्ग में कार्यकर्ताओं ने यातायात, स्वागत, श्रद्धालुओं की सुविधा और अन्य व्यवस्थाओं को संभाला।

आस्था के साथ दिया जल और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

शिव-परशुराम कार कावड़ यात्रा धार्मिक आयोजन के साथ जल और पर्यावरण संरक्षण के संदेश का भी माध्यम बनी। चंबल, क्षिप्रा और नर्मदा के जल को जानापाव लाकर भगवान शिव और भगवान परशुराम का अभिषेक किया गया। सर्व समाज की सहभागिता और यात्रा के दौरान हुए स्वागत ने इसे सामाजिक समरसता के बड़े आयोजन का स्वरूप दिया। जानापाव में अभिषेक, महाआरती और प्रसादी वितरण के साथ यात्रा का धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ।

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