श्री श्रीविद्याधाम पहुंचकर अपने जन्म की भविष्यवाणी और कथा में बाल कृष्ण के रूप में पहुँचने की यादों को जीवंत किया इन्द्रेशजी ने
वर्ष 1996 में इन्द्रेशजी के पिताश्री को पूज्य भगवन ने दिया था आशीर्वाद – “आपके घर यशस्वी बालक का जन्म होगा”
इंदौर। देश के प्रख्यात युवा कथाकार इन्द्रेशजी ने विमानतल मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम आश्रम एवं मंदिर पहुंचकर महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती से आशीर्वाद प्राप्त किए और वर्ष 1996 में उनके पूज्य पिताश्री भागवताचार्य श्रीकृष्णचंद्र ठाकुर जी की विद्याधाम में चल रही भागवत कथा के दौरान ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी गिरिजानंद सरस्वती भगवन द्वारा की गई अपने जन्म की भविष्यवाणी और वर्ष 1997 में हुई अगली भागवत कथा में मात्र 6 माह की उम्र में पुनः विद्याधाम मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान कृष्ण के रूप में शामिल होने का प्रेरक संस्मरण भी जीवंत किया। विद्याधाम के ट्रस्टी पं. दिनेश शर्मा ने जब उन्हें यह प्रसंग सुनाया तो इन्द्रेशजी भावविभोर हो उठे।
आश्रम परिवार के प. दिनेश शर्मा एवं राजेंद्र महाजन ने बताया कि इन्द्रेशजी और उनकी धर्मपत्नी क्षिप्रा देवी ने आश्रम आकर सबसे पहले रजत मंडित गर्भगृह में विराजित माँ राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी भगवती के अलौकिक स्वरुप के दर्शन किए और मातारानी के समक्ष दंडवत प्रणाम किया। आश्रम परिवार के आचार्य पं. राजेश शर्मा, डॉ. पं. राहुल कृष्ण शास्त्री एवं अन्य विद्वानों ने स्वामी गिरिजानंद सरस्वती वेद वेदांग विद्यापीठ के भूदेवों के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनकी अगवानी की। आश्रम के सेवा प्रकल्पों, गौशाला, संत सेवा, यज्ञशाला एवं कर्मकांड शिक्षण सहित विभिन्न गतिविधियों एवं आश्रम परिसर में द्वारकादास अग्रवाल छात्रावास भवन की जानकारी प्राप्त कर इन्द्रेशजी अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी गिरिजानंद सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष पहुंचकर उनके प्रति कृतज्ञता के भाव से राधे गोविन्द, राधे गोविन्द भजन की प्रस्तुति भी दी।
इस अवसर पर आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने उन्हें आश्रम परिवार की ओर से सपत्नीक शॉल-श्रीफल भेंट कर उनके यशस्वी जीवन के शुभाशीर्वाद प्रदान किए। महामंडलेश्वरजी एवं पं. दिनेश शर्मा ने जबा उन्हें बताया कि 1996 में उनके पूज्य पिताश्री कृष्णचंद्र ठाकुर ने विद्याधाम में भागवत कथा की है और तब पूज्य भगवन ने ही उनके जन्म की भविष्यवाणी यह कहते हुए की थी कि आपके घर जल्द ही ऐसे बालक का जन्म होगा जो अत्यंत यशस्वी और कुलदीपक के रूप में ख्याति प्राप्त करेगा। तब ठाकुरजी के परिवार में तीन कन्या संतानें थीं और वे बेटे के जन्म की प्रार्थना कर रहे थे। पूज्य भगवन ने आशीर्वाद के रूप में यह भविष्यवाणी की तो ठाकुरजी वर्ष 1997 में पुनः इंदौर आए और विद्याधाम में भागवत कथा की, जिसमें कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग पर इन्द्रेशजी को मात्र 6 माह की आयु में कृष्ण के रूप में उत्सव का पात्र बनाया था। पं. दिनेश शर्मा से यह प्रसंग सुनकर इन्द्रेशजी ने गदगद भाव से विद्याधाम परिवार और पूज्य भगवन के प्रति कृतज्ञता जताई। 
करीब आधे घंटे के इस प्रवास के दौरान इन्द्रेशजी ने पूरी दिलचस्पी के साथ आश्रम के सभी सेवा प्रकल्पों की जानकारी लेकर आश्रम परिवार के सदस्यों को अपनी ओर से शुभकामनाएँ व्यक्त की। इस मौके पर उनके आगमन की सूचना मिलने पर एक हजार से अधिक श्रद्धालु उनके दर्शन हेतु विद्याधाम आ पहुंचे। किसी ने उन्हें उनका चित्र भेंट किया तो किसी ने गुलदस्ता और किसी ने पुष्प माला। भक्तों में उनके दर्शन और सानिध्य का इतना जबरदस्त उत्साह था कि स्वयं इन्द्रेशजी ने भी दो बार भक्तों से बैठकर उनका भजन सुनने का आग्रह किया, तब कहीं भक्तों को उनके आशीर्वचन और भजन का लाभ मिल सका।

