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Culture and society

दीवारों के ऊपर नहीं, आत्मा के भीतर उतरती है पिथोरा कला,आदिवासी कला से रूबरू कराएगा जात्रा-2026′

इंदौर(विनोद गोयल)। कुछ कलाएँ देखने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए होती हैं। पिथोरा भी ऐसी ही एक कला है, जो रंगों से ज्यादा विश्वास, रेखाओं से ज्यादा रिश्तों