शहर के पश्चिम क्षेत्र में आस्था और उल्लास का चार दिनी संगम मंगलवार से रणजीत हनुमान मंदिर में शुरू हो गया। यहां पहले दिन ध्वजा रोहण के साथ अष्टमी महोत्सव की शुरूआत हो गई। आज कलेक्टर शिवम वर्मा ने महोत्सव की शुरूआत की। भगवान रणजीत हनुमान की विशेष पूजा अर्चना के साथ ही सिर पर ध्वजा लेकर कलेक्टर मंदिर के शिखर पर पहुंचे और अपने हाथों से ध्वजारोहण किया। इसके साथ ही पुरे परिसर को भव्य रूप से सजाया गया है।
यहां कल बाबा के दरबार में भक्त दीवाली मनाएंगे। सैकड़ों श्रद्धालु शाम ढलते ही थाल में दीपक लेकर आएंगे और परिसर के हर कोने को दीपों से रोशन करेंगे। इसके बाद तीसरे दिन उत्सव विग्रहों का महाभिषेक होगा। साथ ही कष्ट का निवारण करने वाले सवा लाख रक्षा सूत्रों को अभिमंत्रित किया जाएगा। मुख्य उत्सव रणजीत अष्टमी पर 12 दिसंबर को होगा। इस दिन प्रभातफेरी में सर्द भौर के बाद भी हर ओर बाबा रणजीत के लिए अपार आस्था दिखाई देगी।
विश्व की दुर्लभ प्रतिमा विराजी है यहां
रणजीत हनुमान मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यहां स्थापित भगवान हनुमान की प्रतिमा दुर्लभ है। ऐसी प्रतिमा जो विश्व में अपनी तरह की अकेली मानी जाती है। यहां स्वरूप में हनुमान जी हाथ में तलवार और ढाल लिए खड़े दिखाई देते हैं, मानो किसी निर्णायक युद्ध के लिए तैयार हों। उनके चरणों के पास अहिरावण का स्वरूप स्थापित है, जो इस प्रतिमा की अद्भुतता को और बढ़ा देता है। मंदिर की स्थापना या मूर्ति के निर्माण को लेकर कोई पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।

12 को निकलेगी भव्य प्रभातफेरी
मंदिर में चार दिनी महोत्सव के लिए दो मेटल डिटेक्टर मशीन लगाई गई है। इससे होकर ही हर भक्त को प्रवेश मिलेगा। प्रभातफेरी में भी सीसीटीवी और ड्रोन के माध्यम से नजर रखी जाएगी। 10 दिसंबर को बुधवार को शाम 6 बजे दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसमें श्रध्दालु 5,11 एवं 21 दीप लाकर मंदिर में सज्जा करेंगे।
इस अवसर पर हजारों दीपों से मंदिर की साज-सज्जा की जाएगी। साथ ही शाम 7 बजे भजन संध्या होगी। 11 दिसंबर गुरुवार को सुबह 10 बजे यंत्र सिद्धि महाभिषेक होगा। इन कष्ट निवारण यंत्रों सवा लाख रक्षासूत्र को अभिमंत्रित किया जाएगा। इसका वितरण अगले दिन रणजीत अष्टमी को एक मंच से होगा। से होगा। 12 दिसंबर शुक्रवार को सुबह 5 बजे प्रभातफेरी निकलेगी। इसमें रणजीत बाबा स्वर्ण रथ पर विराजित होकर साढ़े चार किलोमीटर लंबे मार्ग पर भ्रमण करेंगे। इस अवसर पर पुष्प बंगला दर्शन के साथ ही रक्षा सूत्र का वितरण भी होगा।
कभी हाथ में तस्वीर लेकर लगाते थे परिक्रमा
पौष कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर प्राचीन रणजीत हनुमान मंदिर से रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी की कहानी भी बड़ी रोचक है।अब जहा प्रभातफेरी में लाखों श्रद्धालु शुरू होते थे कभी गिनती के भक्त हाथ में तस्वीर लेकर मंदिर की परिक्रमा लगाते थे। 139 साल पुराने इस मंदिर की इस प्रभातफेरी हर वर्ष वहद स्वरूप ले रही है। मंदिर के पुजारी दीपेश व्यास बताते है कि1985 से प्रभातफेरी ठेले पर निकालना शुरू की गई। उस दौरान महूनाका चौराहा तक यात्रा निकाली जाने लगी थी। इसके बाद 2008 में बग्घी पर यात्रा निकाली गई। अब रथ में बाबा की यात्रा निकाली जाती है।


