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तितलियाँ को बचाने के लिए कीटनाशक का प्रयोग बंद करें, प्रदूषण भी रोकें तभी पर्यावरण सुधरेगा

इंदौर(विनोद गोयल)  तितली के पंखों पर रंग जमे हुए होते हैं। तितली के जिंदा रहने के लिए पत्तियों का होना बहुत आवश्यक है, हालाँकि तितलियाँ फूलों के आसपास पाई जाती हैं और फूलों से ही वे पराग लेती हैं। यदि हम अपने घर में आम, अरंडी, कड़ी पत्ता, आंकड़ा, सीताफल और इमली के पौधे लगाएं तो हमारे घर-आंगन में भी तितलियाँ मंडराती नजर आ सकती हैं। इन नन्हे जीवों को बचाने के लिए पौधों में कीटनाशक डालने की प्रवृत्ति बंद करना होगी तथा प्रदूषण भी कम करना होगा तभी हम पर्यावरण में सुधार कर सकते हैं।
पर्यावरण में पेड़ और तितलियों का संबंध
शहर के पर्यावरणविद डॉ. किशोर पंवार ने सोमवार को संस्था सेवा सुरभि की मेजबानी में नवलखा रेसीडेंसी एरिया स्थित सन्मति हा.से. स्कूल के सभागृह में “झंडा ऊँचा रहे हमारा” अभियान के तहत “पर्यावरण में पेड़ और तितलियों का संबंध” विषय पर बच्चों से बातचीत और परिचर्चा के दौरान ऐसी अनेक दिलचस्प जानकारियां साझा की। उन्होंने प्रोजेक्टर की मदद से पर्दे पर तितलियों से जुड़ी जानकारियां भी प्रदर्शित की। इस अवसर पर पर्यावरणविद डॉ. ओपी जोशी ने भी प्रकृति और पर्यावरण पर केन्द्रित अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि पहले पेड़ों को बचाने के लिए लोग पेड़ से चिपक जाते थे लेकिन आज समय बदल गया है और हम उनकी निर्मम हत्या कर रहे हैं। पेड़-पौधे, नदियाँ, पर्वत, पक्षी, कीट-पतंग ये सभी प्रकृति का ही हिस्सा है और पर्यावरण के सूचक हैं। इन्हें बचाना होगा अन्यथा आने वाले समय में हमारा अस्तित्व भी खतरे में पड जाएगा।

इंदौर में तितलियो की 50 प्रजातियां
इंदौर में 40 से 5- प्रजातियों की तितलियाँ – पर्यावरणविद किशोर पंवार ने जानकारी दी कि इंदौर में 40 से 50 प्रकार की तितलियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इनमें कॉमन लाइन, कॉमन केस्टर, प्लेन टाइगर, स्वेलोटेल, ब्लू टाइगर, स्ट्राइप्ड टाइगर, प्लेन टाइगर, येलोपेंसिया, पिकॉक पैंसी, ग्रे पैंसी, चॉकलेट पैंसी, ब्लैक राजा, कॉमन इमिग्रेंट जैसी प्रजातियाँ शामिल हैं।
प्रारंभ में संस्था सेवा सुरभि की ओर से वरिष्ठ अभिभाषक अनिल त्रिवेदी ने विषय की प्रस्तावना रखी। अतिथियों का स्वागत सन्मति स्कूल की ओर से ट्रस्टी नेमीचंद जैन लोहाडिया, मनोज गोधा एवं मोहित सेठ तथा संस्था सेवा सुरभि की ओर से मोहन अग्रवाल, निकेतन सेठी, डॉ. भोलाशंकर दुबे, मुरली धामानी, अशोक मित्तल, कमल कलवानी आदि ने किया। मंच पर अरविन्द जायसवाल, प्राचार्य चंद्रकांत शर्मा, अनिल त्रिवेदी एवं दिलीप डोशी भी उपस्थित थे। संचालन सुनील शाह ने किया और आभार माना संस्था के संयोजक ओमप्रकाश नरेडा ने।

समूह गीत स्पर्धा 25 को 
आज जल सभागृह में राष्ट्रीय समूह गीत स्पर्धा, कल बाल भगवान नाटक – संस्था सेवा सुरभि के संयोजक ओम प्रकाश नरेडा ने बताया कि मंगलवार 20 जनवरी को बच्चों के लिए एक और बड़ा कार्यक्रम जाल सभागृह में सुबह 9 बजे से होगा जिसमें गीता रामेश्वरम ट्रस्ट के सहयोग से स्कूली बच्चों के लिए अंतरविद्यालयीन राष्ट्रीय समूह गीत स्पर्धा का आयोजन रखा गया है। इसमें शहर के प्रमुख करीब 15 स्कूलों के चुनिन्दा छात्र –छात्राएं अपने संगीत शिक्षकों के मार्गदर्शन में देश भक्ति से प्रेरित रचनाएं प्रस्तुत करेंगे। वन्दे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर कार्यक्रम का शुभारंभ वन्दे मातरम के समवेत गान के साथ होगा। यह अपने आप में पहला ऐसा आयोजन है जिसमें स्कूली बच्चों द्वारा राष्ट्रीय भावना से प्रेरित ऐसे गीतों की प्रस्तुतियां दी जाती हैं, जिन्हें स्वयं बच्चे संगीतबद्ध और लयबद्ध करते हैं। निर्णायकों द्वारा घोषित नतीजों के आधार पर विजताओं को विशिष्ट अतिथियों द्वारा आकर्षक पुरस्कार भी दिए जाएँगे।
बच्चों के लिए ही संस्था द्वारा बुधवार 21 जनवरी को शाम 7.30 बजे “बाल भगवान” नाटक का मंचन किया जाएगा जो अंधविश्वास पर प्रहार करने वाला एक प्रभावी नाटक है। जिसे स्वदेश दीपक ने लिखा है और अर्जुन नायक ने निर्देशित किया है। स्टेट प्रेस क्लब और अभिनव कला समाज की सहभागिता में संस्था सेवा सुरभि एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं की भागीदारी में यह आयोजन होगा।

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