नई दिल्ली। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भारतीय पुरातत्व विभाग) ने मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर में मौजूद कमाल मौला मस्जिद को लेकर एक अहम दावा किया है। एएसआई की ओर से की गई वैज्ञानिक जांच और विस्तृत सर्वे के आधार पर यह निष्कर्ष सामने आया है कि कमाल मौला मस्जिद का निर्माण पुराने मंदिरों के हिस्सों का उपयोग करके किया गया था।
एएसआई ने यह निष्कर्ष वैज्ञानिक परीक्षण, सर्वे और खुदाई, प्राप्त अवशेषों के अध्ययन व विश्लेषण, स्थापत्य अवशेषों, शिलालेखों, कला और मूर्तियों की गहन जांच के बाद निकाला है। वर्ष 2024 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच (मध्य प्रदेश हाई कोर्ट) को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान ढांचा मूल संरचना के कई सदियों बाद बनाया गया, जिसमें “समरूपता, डिज़ाइन या एकरूपता पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया।”
16 मार्च को अगली सुनवाई
सोमवार को हाईकोर्ट की बेंच ने भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि एएसआई की रिपोर्ट सभी पक्षकारों को उपलब्ध कराई जाए। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां, सुझाव और राय दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।
याचिकाकर्ताओं की प्रतिक्रिया
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के राज्य उपाध्यक्ष और याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने कहा कि एएसआई के सर्वे और रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि पूरा ढांचा परमार वंश (परमार वंश) से संबंधित है। उनके अनुसार, इसका निर्माण राजा भोज (राजा भोज) और उनके पूर्वजों द्वारा कराया गया था और यह संरचना लगभग 950 से 1000 वर्ष पुरानी है।
एक अन्य याचिकाकर्ता अशोक जैन ने कहा कि उन्होंने यह स्पष्ट करने के लिए याचिका दायर की थी कि यदि यह स्थल मस्जिद है तो उसे मुस्लिम पक्ष को सौंप दिया जाए और यदि यह मंदिर है तो हिंदू पक्ष को दिया जाए। उन्होंने कहा कि अब कोर्ट द्वारा दिए गए समय में सभी पक्ष अपने जवाब दाखिल करेंगे और आगे की रणनीति अगली सुनवाई के बाद तय की जाएगी।
किसने तैयार की रिपोर्ट
करीब 2,000 पन्नों की यह रिपोर्ट एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक आलोक त्रिपाठी द्वारा तैयार की गई है। इस अध्ययन में ज़ुल्फिकार अली, भुवन विक्रम, गौतमी भट्टाचार्य, मनोज कुमार कुर्मी, इजहार आलम हाशमी, आफताब हुसैन, शंभू नाथ यादव और नीरज कुमार मिश्रा ने सहयोग किया।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
एएसआई टीम ने 98 दिनों तक चले सर्वे के दौरान आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करते हुए खुदाई और अध्ययन किया। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि यह स्थल देवी सरस्वती (देवी सरस्वती) को समर्पित एक प्राचीन मंदिर हो सकता है।
सर्वे के दौरान एएसआई को कुल 94 मूर्तियां और उनके खंड मिले हैं, जिनमें से कई छेनी से क्षतिग्रस्त या टूटी हुई अवस्था में थीं। मौजूदा ढांचे में उपयोग किए गए खंभों, बीम और खिड़कियों पर चार भुजाओं वाले देवताओं की आकृतियां उकेरी गई हैं। इनमें गणेश, ब्रह्मा और उनकी पत्नियां, नरसिंह, भैरव सहित देवी-देवताओं, मानव और पशु आकृतियों के चित्र शामिल हैं।


