भागवत कालजयी ग्रन्थ, यह ऐसा सरोवर जिसमें जितनी गहरी डुबकी लगाएँगे
, जीवन को संवारने के उतने अनमोल आभूषण मिलेंगे
गीता भवन में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद के श्रीमुख से भागवत कथामृत की वर्षा – शोभायात्रा से हुआ शुभारंभ
इंदौर। भागवत ऐसा कालजयी ग्रन्थ है जो हमारे परिवारों में प्रेम, सदभाव और आपसी विश्वास को बढ़ा सकता है। विडम्बना है कि आजकल हमारे परिवारों में प्रेम और सदभाव में निरंतर कमी आ रही है। हमारी नई पौध धर्म और संस्कृति के साथ धर्म ग्रन्थों से भी दूर होती जा रही है। यदि वास्तव में हमें शक्तिशाली और खुशहाल बनना है तो परमात्मा से जुड़ना जरुरी है। भागवत कथा स्वार्थी के लिए नहीं, परमार्थी के लिए ही है। यह ऐसा सरोवर है जिसमें जितनी गहरी डुबकी लगाएँगे, जीवन को सँवारने के लिए उतने अनमोल आभूषण प्राप्त होंगे।
पुरुषोत्तम मास के पावन प्रसंग पर श्रीधाम वृन्दावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज ने मनोरमागंज स्थित गीता भवन के सत्संग सभागृह में रविवार से प्रारम्भ हुए भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव में भागवत की महत्ता बताते हुए शुभारंभ सत्र में उक्त आशीर्वचन व्यक्त किए। कथा शुभारंभ के पूर्व गीता भवन परिसर में भागवतजी एवं विद्वान वक्ता की शोभायात्रा भी निकाली गई। आयोजन समिति के प्रमुख संयोजक संजय-किरण मंगल एवं बिनोद-सुनीता अग्रवाल के साथ वरिष्ठ समाजसेवी प्रेमचंद गोयल, राजेश चेलावत, अवनि अनंत अग्रवाल, श्याम अग्रवाल, रश्मि जैन, निरंजन गुप्ता, गोविन्द मंगल, गोपाल मंगल, राजेश गर्ग एवं शिव जिंदल ने नंगे पैर भागवतजी को मस्तक पर धारण कर व्यास पीठ तक पहुँचाया, जहाँ मधुराष्टक के पश्चात भागवत की महत्ता बताते हुए महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने धर्म, अध्यात्म, संस्कृति और संस्कारों के माध्यम से परिवारों को जोड़ने का आव्हान किया। कथा में इंदौर की बेटी के नाम से प्रख्यात साध्वी कृष्णानंद ने भी अपने श्रीमुख से मनोहारी भजनों की गंगा बहाकर भक्तों को थिरकाए रखा।
संयोजक संजय मंगल एवं बिनोद अग्रवाल ने बताया कि गीता भवन में मंगल परिवार की मेजबानी में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में मातुश्री श्रीमती कमलादेवी-बाबूलाल मंगल की पुण्य स्मृति में यह दिव्य आयोजन 30 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3.30 से शाम 7 बजे तक चलेगा। कथा में इस बार सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों पर भी मंथन किया जाएगा और ज्ञान यज्ञ में आने वाले भक्तों को कथा के दौरान जल संरक्षण, जूठन नहीं छोड़ने, यातायात नियमों का पालन करने और ग्रीष्मकाल में मूक परिंदों के लिए अपने घर-आंगन में सकोरे सहित दाना-पानी रखने जैसे संकल्प भी दिलाए जाएँगे। कथा में श्रीकृष्ण जन्म, गोवर्धन पूजा एवं रुक्मणी विवाह जैसे प्रमुख उत्सव भी धूमधाम से मनाए जाएँगे।

आज शुकदेव आगमन प्रसंग – भागवत कथा में दूसरे दिन 25 मई को शुकदेव आगमन प्रसंग, 26 को शिव पार्वती विवाह, 27 को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, 28 को गोवर्धन पूजा एवं 56 भोग, 29 को रुक्मणी विवाह एवं शनिवार 30 मई को समापन दिवस पर सुदामा चरित्र के पश्चात फूलों की होली खेली जाएगी।


