डिफेंस मन्युफेक्चरिंग में आत्मनिर्भरता नारा नहीं बल्कि एक मिशन है- संभागायुक्त
संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की अध्यक्षता में डिफेंस मन्युफेक्चरिंग में आत्मनिर्भरता विषय पर कार्यशाला आयोजित
इंदौर । संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश इंडस्ट्रीयल डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन एवं डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन के संयुक्त प्रयासों से डिफेंस मन्युफेक्चरिंग आत्मनिर्भरता विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में एम.पी.आई.डी.सी. के कार्यकारी संचालक हिमांशु प्रजापति, एयर मॉर्शल विभास पाण्डे, मेजर जनरल एस.के. श्रीवास्तव, कर्नल राकेश सिसोदिया एवं इण्डो जर्मन टूल रूम के मैनेजर अनिल, डॉ. डी.वी. रोटेला उपस्थित थे।
जनरल डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन के डेप्यूटी डायरेक्टर अनिल राय वर्चुअली जुड़े। कार्यशाला में एम.एस.एम.ई., स्टार्टअप, शिक्षा संस्थान, रिसर्च इंस्टीटयूट, औद्योगिक संगठन आदि के 100 से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित थे। इस कार्यशाला में रक्षा मंत्रालय के कार्यक्रम में स्टेज-3 लेवल का कन्सलटेशन प्रोग्राम है, जिसमें मध्यप्रदेश को “को-लीड स्टेट” चुना गया है।
कार्यशाला में संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह प्रयास है कि भारत रक्षा उत्पादों में आत्मनिर्भरता को प्राप्त करें। वर्तमान परिदृश्य में यह अतिआवश्यक भी हो जाता है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में उपस्थित सभी को जानना आवश्यक है कि किस प्रकार स्वदेशी निर्माताओं की भूमिका रक्षा उत्पाद में बढ़ाई जा सके। जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक इको सिस्टम एवं सुविधाएं जिसमें कि शासकीय अनुदान भी शामिल है, वो यहां उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि इस इको सिस्टम का उपयोग रक्षा उत्पादों के विनिर्माण हेतु किस प्रकार किया जा सकता है, यह जरूरी है। भारत में निर्मित हर उत्पाद ग्लोबल स्टैंडर्ड का होना अत्यन्त आवश्यक है तभी उनका उपयोग किया जा सकता है। डॉ. सुदाम खाड़े ने कहा कि कार्यशाला में शामिल सभी प्रतिनिधियों द्वारा प्राप्त सुझावों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जायेगा जिससे इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही हो सके।
कार्यशाला में अनिल कुमार राय द्वारा प्रजेंटेशन के माध्यम से मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस द्वारा रक्षा उत्पादों के विनिर्माण को बढ़ावा देने की जानकारी दी गई। साथ ही डिफेंस मन्युफेक्चरिंग में एम.एस.एम.ई., स्टार्टअप, शिक्षा संस्थान, रिसर्च इंस्टीट्यूट आदि संस्थानों की भूमिका को सुनिश्चित करने तथा भारत सरकार द्वारा डिफेंस उत्पादन को बढ़ाएं जाने संबंधी नीतियों तथा सृजन पोर्टल, निर्यात आदि के संबंध में जानकारी भी प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि भारत सरकार लगातार डिफेंस उत्पादों हेतु आर एण्ड डी एवं टेस्टिंग फेसिलिटी का देश भर में विस्तार कर रही है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में एम.पी.आई.डी.सी. के कार्यकारी संचालक हिमांशु प्रजापति द्वारा मध्यप्रदेश में रक्षा विनिर्माण हेतु, इको सिस्टम एवं मध्यप्रदेश शासन की रक्षा उत्पाद हेतु विशेष नीति की जानकारी दी गई। एयर मॉर्शल विभास पाण्डे ने कहा कि रक्षा मंत्रालय के सृजन पोर्टल के माध्यम से उद्योगपति ऐसे उत्पादों की जानकारी प्राप्त कर सकते है जो रक्षा विभाग द्वारा क्रय की जा रही है, साथ ही वे अपने उत्पाद इस पोर्टल के माध्यम से रक्षा विभाग को उपलब्ध भी करवा सकते हैं।
कार्यशाला में पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी द्वारा रक्षा उत्पादों हेतु कॉमन फेसिलिटी सेन्टर एवं आर एण्ड डी फेसिलिटी, जिसमें कि सर्टिफिकेशन की सुविधाएं उपलब्ध हो, कि स्थापना क्षेत्र में किए जाने का सुझाव प्रदान किया गया।
कार्यशाला में उपस्थित उद्योगपतियों द्वारा रक्षा के आयातित उत्पादों के संबंध में जानकारी प्राप्त करने संबंधी जिज्ञासा प्रकट की गई कि किस प्रकार आयातित उत्पादों की सूची निर्माताओं को प्राप्त हो सकती है, जिससे वे देश की आयात पर निर्भरता को कम कर सके एवं ऐसे उत्पादों का देश में ही निर्माण किया जा सके।
कार्यशाला में अन्य उद्योगपतियों द्वारा रक्षा उत्पादों में एम.एस.एम.ई. एवं स्टार्टअप हेतु आर एण्ड डी लागत को कम किए जाने तथा चीक निर्माण को देश में बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही उद्योगपतियों द्वारा सृजन पोर्टल को ओर अधिक यूजर फ्रेंडली एवं सरल बनाए जाने का अनुरोध किया गया


